कल अमित शाह के मुँह से संसद में वक्तव्य देते समय फ्लो में 'साला' शब्द निकल गया। हालांकि उन्होंने राहुल गाँधी की ओर देखकर नहीं कहा, लेकिन उन्होंने खेद जताया और लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस शब्द को संसद की कार्यवाही से निकाल दिया जाय।
साला और साली खूबसूरत सम्बन्ध होते हैं। ये किन परिस्थितियों में और क्यों गालीसूचक शब्द बन गए, किसी को पता हो तो बताये।
लेकिन यह सूचना जब बेउर जेल में अनंत सिंह को मिली तो उन्होंने अमित शाह को फोन करके कहा:
वइसे तो हम ओतना लायके नहीं हैं कि अंतरी-मंतरी बन सकें लेकिन एक बार हमको गृह मंतरी बनाकर लोकसभा में भेज दीजिये। फिर ये सरवा, बेटी...वा लोगन को हम अइसा सोझ करेंगे कि साला बोलने पर इनको असिरबाद जैसा लगेगा।