आरएसएस का बयान नाकाफ़ी है ।
भागवत और होसबोले को पश्चाताप और प्रायश्चित करना चाहिये ।
“राष्ट्रविरोधी” और “हिंदू विरोधी” वो किसे कह रहे है ?
चढ़ावा चोरों को या डकैतों को ?
संघ को ये साबित करना होगा कि वो निष्पक्ष जांच होने देगा और अब राममंदिर के प्रबंधन में आरएसएस का कोई दख़ल दूर दूर तक नहीं होगा ।
ये ईरिक्शा वाले भाई कह रहे हैं -
"जबसे राम मंदिर में चोरी हुई है, वहां जनता ने आना बंद कर दिया है। कहां लाख लोग रोज आते थे, अब सन्नाटा है। कोई कमाई नहीं हो रही है। चोरी करे कोई, भुगते कोई और...।"
आप सबसे एक अपील।
इटावा का रहने वाला छोटा भाई अंशुल यादव आंत के कैंसर से पीड़ित है, जो चौथी स्टेज में है। कई अस्पतालों ने तो इलाज से मना कर दिया, लेकिन अंशुल ने हार नहीं मानी है।
अंशुल यादव ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है और वर्तमान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पीएचडी कर रहे हैं। अचानक पता चला कि उन्हें कैंसर है। दिल्ली एम्स में जांच कराने के बाद मालूम हुआ कि उन्हें चौथी स्टेज का कैंसर है।
फिलहाल वह भगवान महावीर कैंसर अस्पताल में भर्ती हैं। उनके इलाज के लिए लगभग 50 लाख रुपये का खर्च बताया गया है।
अंशुल ने आप सभी से मदद की अपील की है। वह जीना चाहता है।
कृपया जो भी संभव हो, उनकी मदद करें।
सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी,न्यूज़ चैनल और एक “लिबरल” वर्ग ले अनुसार देश की विपक्षी दल को कभी किसी मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। क्योंकि कभी भी “सही” वक़्त नहीं होता है ।
विपक्षी दलों का गठन तो लूडो खेलने के लिए हुआ है।
चढ़ावा चोरी मामले में अब ट्रस्ट के सदस्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। पहली बार राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने पूर्व पदाधिकारी गोपाल राव पर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा- पूरी गलती गोपाल राव की है। वे राजनीति कर रहे हैं। वो सबको उलझा देते हैं। वो राम की परंपरा नहीं मानते।
गोपाल राव राम मंदिर के निर्माण प्रभारी और ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य थे। मूल रूप से कर्नाटक के रहने वाले हैं।
आंध्र प्रदेश में अजीब सरकरी तानाशाही का मामला सामने आया है!
एक व्यक्ति को पिछले तीन दिनों में तीन बार अरेस्ट किया गया है! दो बार अरेस्ट होने के बाद कोर्ट से जमानत मिली तो फिर तुरंत तीसरी बार अरेस्ट कर लिया गया!
यह व्यक्ति जो यू टूबर है वहां पवन कल्याण का विरोध कर रहा है!
चढ़ावा चोरी मामले में मोदी ने रात 2 बजे विनय कटियार से कहा- "अरे भाई, क्या-क्या होगा अब?"
मैंने कहा- "कुछ नहीं... सब ठीक हो जाएगा."
लेकिन जब मैं आयोध्या आया तो देखा- इसमें सब शामिल हैं, चंपत राय, गोपाल राव, अनिल मिश्रा.
'किसी कारण' से ये लोग बच गए, जेल नहीं गए. हो सकता है आगे जेल जाएं.
बॉम्बे हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति माधव जमदार की सख्त टिप्पणियों ने भाजपा सरकार के दमनकारी और अलोकतांत्रिक चरित्र को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। सरकार को इन टिप्पणियों पर केवल 'मनन' नहीं, बल्कि अपने कृत्य पर शर्म करनी चाहिए। लोकतंत्र में विरोध की आज़ादी ही उसकी आत्मा है, लेकिन भाजपा ने इसे 'बनाना रिपब्लिक' बना दिया है, जहां महज राजनीतिक नारेबाजी को भी बदले की कार्रवाई का आधार बना लिया जाता है। सत्ता के अहंकार में चूर भाजपा सरकारों की यह कायरतापूर्ण और तानाशाहीपूर्ण कार्रवाइयां लोकतंत्र पर कलंक हैं।
पिछले 12 वर्षों में देश में ऐसा माहौल बना दिया गया है जहां सरकार के विरोध को 'देशद्रोह' का रूप दे दिया जाता है। भाजपा नेता भूल गए कि UPA शासन में वे खुद कितनी आक्रामकता से विरोध करते थे और कांग्रेस उसे सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया मानती थी। आज केवल सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलने पर भाजपा शासित राज्यों में पत्रकारों, नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर FIR कर उन्हें महीनों-वर्षों तक जेल में बंद रखा जा रहा है।
यह सच को दबाने और देश में भय का माहौल बनाने की सोची-समझी साजिश है, जो लोकतंत्र की सरेआम हत्या है। सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व करने वालों में आलोचना सुनने की सहनशक्ति होनी चाहिए। पुलिस और जांच एजेंसियों को भी यह नहीं भूलना चाहिए कि उनकी जवाबदेही सिर्फ और सिर्फ देश के संविधान के प्रति है, किसी राजनीतिक दल के प्रति नहीं।
असम में अनमुल हक 16 डॉक्यूमेंट पेश करने के बावजूद भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर सका। 28 फरवरी 2019 को असम जिले के विदेशी न्यायाधिकरण ने उसे विदेशी घोषित किया था। वह इसके खिलाफ हाईकोर्ट गया। खुद को भारतीय साबित करने के लिए उसने 16 दस्तावेज पेश किए।
>1951 की NRC कॉपी, जिसमें पिता और दादा का नाम दर्ज था
>1966 से 2017 तक की वोटर लिस्ट, जिसमें अनिमुल और पूरे परिवार का नाम था
>1973 के जमीन खरीद के कागज
>पेन कार्ड, वोटर ID, स्कूल ID जैसे कागज
हाईकोर्ट ने माना कि अनिमुल हक अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने में नाकाम रहे। ऐसे में HC ने "विदेशी" होने का फैसला बरकरार रखा।
प्रशांत किशोर की टीम ने पुष्टि कि,बिहार में बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में पीके ख़ुद लड़ेंगे।
यह सीट बीजेपी के नेशनल प्रेसिडेंट नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के कारण खाली हुई है। इसीलिए बीजेपी के लिए यह अहम सीट है जिसे हारने का जोखिम नहीं ले सकती है।
साथ यह सीट पिछले कई सालों से बीजेपी की सबसे मजबूत सीट रही है।
पीके के ख़ुद खड़ा होने से चुनाव दिलचस्प हुआ। अब देखना होगा बाक़ी विपक्षी दल अपने उम्मीदवार उतारते हैं या इन्हें अपना समर्थन देते हैं!
DPS नोएडा की यह घटना सभी पेरेंट्स को सोचने पर मजबूर करती है
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मैं आप सभी का ध्यान एक घटना की तरफ दिलाना चाहता हूं, जो कल दिल्ली पब्लिक स्कूल नोएडा सेक्टर 132 में मेरी बेटी के एक क्लासमेट के साथ हुई। इतनी उमस भरी गर्मी के बावजूद दोपहर करीब 1 बजे छात्रों को मैदान में ले जाया गया। वहाँ लड़के फुटबॉल खेल रहे थे। अचानक एक लड़का गिर पड़ा। उसके कुछ क्लासमेट्स उसे तुरंत मेडिकल रूम ले गए। लेकिन स्कूल की मेडिकल सर्विस की लापरवाही से उस लड़के की जान चली गई।
उस लड़के को अस्थमा था। गर्मी की वजह से उसे अटैक पड़ा। उसके क्लासमेट्स ने उसे CPR दिया, लेकिन नर्स बहुत धीरे-धीरे काम कर रही थी। बच्चे चिल्ला रहे थे कि उसे अस्पताल ले जाया जाए, जो स्कूल से सिर्फ़ 100 मीटर दूर है, लेकिन उसे मेडिकल रूम के बाहर ही रखा गया और 20 मिनट तक इंतज़ार कराया गया।
20 मिनट बाद हालत और बिगड़ गई। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई। सबसे बुरी बात यह है कि मेडिकल रूम में कोई ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था, जो आजकल बहुत ज़रूरी है। सच में बहुत दुख की बात है कि कुछ मिनटों की देरी की वजह से परिवार ने अपना प्यारा बच्चा खो दिया। हम सभी को स्कूलों द्वारा दी जा रही सुविधाओं पर नज़र रखनी चाहिए, वरना इतनी भारी फीस देने का क्या मतलब है अगर स्कूल हमारे बच्चे को सुरक्षित नहीं रख सकते?
एक पेरेंट्स का मैसेज...
यूपी : मुजफ्फरनगर की दोना–पत्तल फैक्ट्री में मजदूरों को बंधक बनाने, हंटर से पीटने, नुकीले हथियार से मारने, पिटबुल से कटवाने वाला दरिंदा अंकित बालियान "जिंदा" पकड़ा गया है। हरियाणा की पलवल पुलिस ने उसे एकमात्र तमंचे सहित गिरफ्तार किया है। UP पुलिस उसे अब उसे B वारंट पर वहां से लाएगी।
ऐसे लोग समाज में असली राक्षस हैं। मजदूर गरीब हैं और दूसरे प्रदेशों के हैं, इसलिए वह बहुत ज्यादा दिन तक इस केस की पैरवी नहीं करने वाले। जरूरत है कि पुलिस अपने हिसाब से बीमारी का इलाज करे।