आज यहां 3,000 स्टूडेंट्स हैं।
⦿ 3,000 में सिर्फ 1 IAS बनेगा
⦿ 3,000 में सिर्फ 30 IIT में जाएंगे
⦿ 3,000 में सिर्फ 180 डॉक्टर बनेंगे
हिंदुस्तान में 'सलेक्शन सिस्टम' नहीं, 'रिजेक्शन सिस्टम' है।
- सुनिए नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi और स्टूडेंट्स के बीच देश के एजुकेशन सिस्टम पर क्या बात हुई 👇
बहुत शानदार चर्चा है ये,
आज देश के परिवारों पर बहुत बोझ है। वे अपने बच्चों के सपनों के लिए सबकुछ कुर्बान करने को तैयार हैं।
मगर इन युवाओं का सपना पूरा करने की जिम्मेदारी देश की है।
क्योंकि देश के परिवार टॉप 5 परीक्षाओं के लिए जितनी एग्जाम फीस देते हैं, सरकार उतना बजट 5 मंत्रालयों को देती है।
सुनिए UPSC Aspirant के परिवार के साथ बातचीत 👇
हिंदुस्तान के एजुकेशन सिस्टम की हकीकत 👇
FACT 1
⦿ NEET में 22 लाख स्टूडेंट के परिवारों से हर साल 1.32 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं
⦿ वहीं, इतना ही पैसा सरकार देश के एजुकेशन बजट में डालती है, जो 1.4 लाख करोड़ रुपए है
मतलब 22 लाख लोग एक Exam के लिए उतना पैसे देते हैं, जितना हिंदुस्तान की सरकार अपने एजुकेशन बजट में डालती है।
FACT 2
⦿ पांच सबसे बड़े Exam (SSC, UPSC, JEE, RRB, NEET) पर परिवारों से 3.5 लाख करोड़ रुपए वसूले जाते हैं
⦿ सरकार इतना ही बजट एजुकेशन, हेल्थ, लेबर, साइंस, महिला और बाल विकास मंत्रालय को देती है
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 कोटा
#ChhatronKiGoonj
आकांक्षा की चिट्ठी पढ़कर राहुल ने सबको भावुक कर दिया
◆ NEET पेपर लीक होने के बाद आकांक्षा ने आत्महत्या कर ली थी
#RahulGandhi | @RahulGandhi | Rahul Gandhi Kota
पता है, भारत की सिर्फ़ 5 परीक्षाओं - NEET, JEE, SSC, UPSC और RRB की तैयारी पर छात्र और उनके परिवार हर साल कितना ख़र्च करते हैं?
₹3.5 लाख करोड़।
यानी भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट का लगभग तीन गुना। शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान और महिला-बाल विकास - इन पाँच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर।
और बदले में करोड़ों युवाओं को क्या मिलता है? तनाव, अनिश्चितता, बेरोज़गारी, और टूटते सपने।
जो ख़र्च सरकार की ज़िम्मेदारी है, उसका बोझ आज परिवार उठा रहे हैं।
#ChhatronKiGoonj
भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है।
ज़रा सोचिए - देशभर के परिवार जितना पैसा सिर्फ़ NEET की तैयारी पर ख़र्च करते हैं, वो भारत सरकार के पूरे शिक्षा बजट के बराबर है।
आज कोटा से, और देश के हर कोने से, लाखों युवा एक सुर में कह रहे हैं - इस व्यवस्था ने हमारे साथ अन्याय किया है।
हर युवा अलग है, पर सबकी कहानी एक - या तो सपने देखने नहीं दिए गए, या देखे हुए सपने तोड़ दिए गए।
‘छात्रों की गूंज’ सिर्फ़ अभियान नहीं - एक क्रांति है। हमें एक ऐसी व्यवस्था बनानी है जो आपको बड़े सपने देखने का हक़ दे और आपकी ज़िंदगी गिरवी रखे बिना, उन्हें पूरा करने में आपका साथ दे।
#ChhatronKiGoonj
कोण म्हणतंय १५ कोटी,
कोण २५, तर कोण ८५ कोटी म्हणतंय…
ही बोली लागतेय खासदारांची,
त्यांना मतदान केलेल्या मतदारांची, लोकशाहीची…
यावर मार्ग एकच…प्रतिकार!
श्री. राहूल गांधी यांनी म्हंटल्याप्रमाणे सततचा प्रतिकार!
न थकता, न आराम करता…
प्रत्येक दिवशी, प्रत्येक क्षणी…
कुठल्याही तडजोडीशिवाय!
या लोकशाही विरोधी व्यवस्थेविरूद्ध,
जननायक श्री. राहूल गांधी यांच्यासोबत!
हा दुसरा स्वातंत्र्य लढा आहे.
त्यामुळे संघर्षही तेवढाच मोठा असणार आहे…
आणि संघर्ष हाच काँग्रेसचा श्वास आहे,
देशाला स्वातंत्र्य मिळवून देण्यात असो,
किंवा देशाच्या निर्मितीत असो,
आणि आता संविधान तसेच लोकशाही रक्षणातही...
#संघर्ष #प्रतिकार #लोकशाही
पार्टी तोड़ने वाले खेल का नया नाम है ऑपरेशन टाइगर। संजय राउत 50 करोड़ की कीमत बता रहे हैं।मॉड्यूल भी नया है - अपनी पार्टी की बजाय सहयोगी पार्टी में मर्ज़ कराना। जैसे TMC वालों को NCPI में और ठाकरे के MPs को शिंदे गुट में। आगे अनुप्रिया पटेल को भी खुशखबरी मिल सकती है। उनके यहां एक साथ 25+ MPs की आमद हो सकती है। जीतन राम मांझी की पार्टी में JDU या RJD वाले भेजे जा सकते हैं। कुल मिलाकर लोकतंत्र की मंडी में रेट अच्छा मिल रहा है।
Is @MamataOfficial back on the street as she was in the past when in opposition? Rarely a fallen political leaders chose to fight back with in a couple of weeks of a disastrous electoral defeat? Is she trying to revive her demoralised cadre?
Shiv Sena (UBT) leader Sanjay Raut said Shiv Sena (UBT) MPs whose name are going round to join Shinde, has promised they would not leave Thackeray, even one MP swore by his mother name, another by Sai Baba, third by his daughter name & 4th swore by his father so whom to trust ?
कोटा के लिए निकल चुका हूँ पर दिल में दो नाम गूंज रहे हैं: उमेश और रिया।
कल, सीकर में उमेश और देहरादून में रिया - दोनों ने Re-NEET के दबाव में अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर ली।
22 और 23 साल के बच्चे - जिन्हें सपनों के खुले आसमान में उड़ना था वो इस अन्यायी व्यवस्था से हार गए।
ये मौतें एक टूटी, भ्रष्ट व्यवस्था की देन हैं। और इसके ज़िम्मेदार हैं मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जिन्होंने छात्रों की रक्षा करने के बजाय, बार-बार पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, और भविष्य के सदागरों को संरक्षण दिया।
आज कोटा से हम वो लड़ाई शुरू करेंगे जिसका एक ही मक़सद है - किसी बच्चे के सपने ऐसे टूटने न पाएं, किसी माँ-बाप को फिर कभी अपने बच्चे को इस तरह खोना न पड़े।
हर परिवार की यह पीड़ा अब ‘छात्रों की गूंज’ बनकर पूरे देश में गूंजेगी।
#ChhatronKiGoonj
विपक्ष को तोड़ कर चुनौती जनता को दी जा रही है कि आपकी कोई औक़ात नहीं है। ऐसा कर लोकतंत्र का उत्साह ख़त्म किया जा रहा है। अगर कोर्ट केस माफ़ कराने के लिए सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं तो सवाल उठेगा कि क्या कोर्ट ने ED की जगह ले ली है? अदालत की साख को दाँव पर लगाने से नुक़सान भरोसे का होगा। वकील प्रतिस्पर्धा में निखरते हैं।उनके पेशे को AI से ज़्यादा ख़तरा न्याय व्यवस्था को पार्टी व्यवस्था में बदल देने से होगा। इसके बाद क्या बचेगा? हताशा का लंबा दौर और नतीजा? एक शब्द में - दुर्दशा। हताशा से केवल दुर्दशा पैदा होती है। राष्ट्र के लोक जीवन का उत्साह ख़त्म हो जाता है। उसकी आर्थिक प्रगति भी कुंठित हो जाती है। अभी सत्ता के दम पर कुछ भी कर लीजिए लेकिन सबके सामने सांसदों को गुलाम की तरह पेश कर राजनीति के महत्व को भी समाप्त किया जा रहा है। अगर यह जीत है तो बीजेपी जश्न क्यों नहीं मना रही? क्या इस देश में किसी को पार्टी चलाने नहीं आती? फिर जब सारा बहुमत आ ही गया तब चुनाव बंद कर दीजिए।
Shiv Sena (UBT) MPs & MLAs last time missed bus of money & power, feeling ethics & loyalty important, but later they realised that an ultimate truth of highly materialistic world is money & power, so dis time, no error of judgement. Shame is no more SHAME but it’s LEGAL pride.