"उत्तराखंड में नहीं चलेगी कट्टरपंथी सोच"
Hello @pushkardhami, Do you remember a three day hate speech conclave organized by self proclaimed religious leaders? at the event, multiple calls to k!ll minorities and attack their religious spaces were made?
https://t.co/2wwuzl8YGj
(मैं अपने ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत ये X पोस्ट कर रहा हूं क्योंकि मेरे पास @DDNewsHindi जैसा प्लेटफ़ॉर्म नहीं है जिसका बेजा इस्तेमाल करते हुए @sudhirchaudhary ने मुझे टारगेट किया है)
सुनो सुधीर चौधरी,
तुम एक घटिया पत्रकार ही नहीं घटिया इंसान भी हो। जानता तो पहले से था, आज ये कहने को इसलिए मजबूर हुआ हूं क्योंकि तुमने मेरे साथ फिर एक घटियापन किया है। दूरदर्शन के प्रोग्राम में ‘समोसे जलेबी’ वाली स्टोरी का ज़िक्र कर तुमने मुझ पर निशाना साधा है। और ये तुमने पहली बार नहीं किया है। पहली बार तो तुमने तब किया था जब तुम ज़ी न्यूज़ में थे और तुमने प्रधानमंत्री मोदी का एक लल्लो चप्पो वाला इंटरव्यू किया था। 2019 चुनाव से पहले। और फिर जब तुम्हारी जगहंसाई शुरु हुई तो फिर तुमने अपना चेहरा बचाने के लिए एक DNA कार्यक्रम पूरी तरह मुझे और राजदीप सरदेसाई को समर्पित कर बनाया था। तब मेरी रिपोर्ट की क्लिपिंग्स भी लगायी थी। ख़ैर। तुम्हारा चेहरा तब भी नहीं बचा था। अब तो तुम्हारे पास कोई चेहरा है ही नहीं। तुमने हमेशा सरकारों की गोद में बैठ कर ही पत्रकारिता की है। कांग्रेस कार्यकाल में भी तुम जैसे पत्रकार ही बहुत बड़े चापलूस थे। यहां पर एक प्रदेश की कांग्रेस सरकार का ज़िक्र करना बेमानी होगा जिसके बूते तुम तब पत्रकारिता में पले बढ़े।
क़रीब सवा मिनट के क्लिप से तुम्हारा चेहरा बचता है तो बचा लो, जनता के टैक्स के पैसे से 15 करोड़ का सरकारी पैकेज जस्टिफ़ाई कर रहे हो कर लो। और ऐसा करने के लिए ही तुमने इस क्लिप के नीचे लिखे ‘राजनीति के हल्के फुल्के पल’ को नज़रअंदाज़ किया। क्योंकि तुम संपादक नहीं चंपादक हो। अरे वो एक मोमेंट था फील्ड रिपोर्टिंग का जब राहुल गांधी यूपीए सरकार के दौरान कथित घोटाले से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे रहे थे। फिर मैंने यही पूछना शुरु किया। इसकी डिटेलिंग फिर कभी। यहां तुमको सफ़ाई के तौर पर नहीं दूंगा।
मैं जानता हूं कि तुम मुझसे सिर्फ़ इस बात का बदला ले रहे हो कि मैंने 2003 में एनडीटीवी में मेरी नौकरी लगने में तुम्हारी मदद नहीं कर पाया। 2002-03 में सहारा में तुम्हारे साथ मैंने चंद महीने काम किया था। तब तुम शेखी बघारा करते थे कि मैं तो एनडीटीवी जाने वाला हूं मेरी बात हो गई है। लेकिन तुम शेखी बघारते ही रहे लेकिन जा नहीं पाए। जब तुम्हें पता चला कि मेरी नौकरी वहां लग गई है तो पहले तो सहसा तुम्हें भरोसा नहीं हुआ... फिर तुमने कहा कि जब जा ही रहे हो तो मेरे लिए भी बात करना कि मामला कहां अटका है। मैंने कोशिश भी की और राजदीप सरदेसाई से अनुरोध भी किया था तुम्हारे लिए। लेकिन क्योंकि संस्थान में मैं ख़ुद नया था इसलिए तुम्हारे लिए ज़ोर नहीं डाल पाया था। तुम्हारी नौकरी वहां लगा नहीं पाया। आई एम सॉरी फॉर दैट। पर तुम अब कभी डीडी से निकाले जाओ तो एनडीटीवी जा सकते हो। अब माहौल तुम्हारे अनुरुप है वहां।
अंत में एक बात। ये तुम ही हो जिसका 100 करोड़ वाला वीडियो क्लिप आज भी इंटरनेट तैर रहा है। जिस भी तरह तुमने समझौता कर लिया हो लेकिन वो एक ऐसा बदनुमा दाग़ है जो कभी तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगा। डीडी पर कभी उस क्लिप की बात भी करो। और हां। लाइव इंडिया में रहते हुए कैसे तुमने स्कूल टीचर को लेकर फर्ज़ी ख़बर चलायी वो भी पत्रकारिता जगत नहीं भूला है आज तक। जिनको नहीं पता वे गूगल का ग्रोक कर सकते हैं। दो बार जेल भी गए तुम। कोई तिहाड़ी शब्द का ज़िक्र करता है तो सभी समझ जाते हैं कि तुम्हारे बारे में कुछ कहा जाता है। और तुम हो कि समोसे जलेबी वाली स्टोरी का ज़िक्र कर महान बनने की कोशिश करते हो! बनो। और क्योंकि तुमने मेरी स्टोरी का ज़िक्र किया है, अगर क़ूवत है तो किसी दिन मुझे इसी डीडी के प्लेटफ़ॉर्म पर बहस के लिए आमंत्रित करो। तुम्हारी और मेरी पत्रकारिता का अंतर तुम्हारे प्रोग्राम के ज़रिए ही पता चल जाएगा। उन दर्शकों को जिनको तुम एक तरफ़ा तरीक़े से गुमराह कर रहे हो। ये मेरा हक़ भी बनता है क्योंकि तुमने मेरी स्टोरी का ज़िक्र किया।
तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा
उमाशंकर सिंह
(पुनश्च: प्रिय पाठकों, सुधीर चौधरी को संबोधित करते हुए मैंने ‘आप’ लिखने की बहुत कोशिश की, लेकिन सहज मानवीय मूल्यों और व्यवहार कुशलता का अनुपालक होते हुए भी ऐसा नहीं कर पाया हूं। इसके लिए मैं पाठकों से बहुत माफ़ी चाहता हूं)
यह पंखा यूपी के कुशीनगर के एक मदरसे में लगा था। पंखा खराब हुआ तो, उसे सुधारने के लिए मैकेनिक को बुलाया गया। मैकेनिक ने पंखे पर Made In Pakistan लिखा देखा तो हैरान रह गया। पंखे का फोटो पुलिस को दिखाया गया, पुलिस ने मदरसा संचालक को हिरासत में ले लिया है। यह पंखा दुबई में रहने वाले एक शख्स ने दुबई से ही खरीदकर मदरसे को डोनेट किया था। लेकिन उसे क्या पता था यह पंखा मदरसे में लगाना भी ‘अपराध’ है। मुनव्वर राना का मशहूर शेर है-
बस इतनी बात पर उसने हमें बलवाई लिक्खा है
हमारे घर के बरतन पे आई.एस.आई लिक्खा है।
मैंने पहली बार जब इस शेर को पढ़ा तो लगा कि राना साहब ने ये कुछ ज्यादा ही कह दिया है। लेकिन आज कुशीनगर की इस घटना ने मुझे गलत साबित कर दिया है। राना साहब आप सही थे। बिल्कुल सही।
ईरान के नाम पर जिनको खुजली मची है उनका इलाज करने की बात करने वाले संभल के CO से कोई पूछे कि जो इजराइल को फादरलैंड बता रहे हैं, नेतन्याहू और ट्रम्प के नाम पर सोशल मीडिया पर अपने ही हमवतन भाईयों को गालियॉं दे रहे हैं उनका इलाज कौन करेगा ??
संभल पुलिस कप्तान की अगुवाई में सड़क पर होली खेलने वाली पुलिस के अधिकारी की ये भाषा कि किसी एक ने भी सड़क पर नमाज़ पढ़ी तो सीधे जेल भेज देंगे, क्या लोकतांत्रिक देश में वर्दी पहने व्यक्ति कि ये भाषा मान्य होनी चाहिये।
संभल पुलिस के अधिकारियों ने पीस कमेटी की मीटिंग में जो भाषा इस्तेमाल की वो कम से कम अमन और भाईचारे वाली तो बिल्कुल भी नहीं थी।
@Uppolice से अनुरोध है कि अपने इस अधिकारी को संविधान की प्रस्तावना तो सही से याद करवा दें ताकि वो ये समझ सकें कि भारत में सभी नागरिकों के जो मौलिक अधिकार हैं उसे पुलिसिया डंडे से छीनने की इजाज़त संविधान नहीं देता है।
ईरान ने अभी-अभी एक वीडियो जारी किया है जिसमें दो समानांतर कहानियां दिखाई गई हैं:
एक लड़की स्कूल जाने की तैयारी कर रही है,
और एक अमेरिकी सैनिक उस स्कूल पर बमबारी करने की तैयारी कर रहा है जिसमें वह पढ़ती है।
बेहद क्रूर।
फरवरी में होते हैं 28 दिन
मार्च में 31
गुप्त खबर यह है कि एक महीना तेल खरीदने की छूट फरवरी में ही मिल जाती। लेकिन नाज नखरे करके मोदी जी ने फरवरी निकाल दिया।
अब मार्च में अनुमति ली।
3 दिन एक्स्ट्रा मिले।
●●
जहाँ से कांग्रेसी सोच खत्म होती है, मोदी जी वहां से सोचना शुरू करते हैं।
समझे चमचों!!
#मातृचोट
🥰❤️💪😩
गद्दारी इनके खून में है
अगर ईरान साथ नहीं देता तो बात संयुक्त राष्ट्र संघ में चली जाती ओर जनमत संग्रह से कश्मीर पाकिस्तान को चला जाता
कांग्रेस ने कभी इन गद्दारों की तरह ढिंढोरा नहीं पीटा ।।
धन्यवाद संदीप चौधरी जी
एक अफवाह देश को बर्बाद कर सकती है
14 साल पहले, 👇
व्यक्ति-1 विनोद राय ने ₹1.76 लाख करोड़ के स्पेक्ट्रम स्कैम की अफवाह फैलाई
व्यक्ति-2 अन्ना हजारे ने इस "स्कैम" के खिलाफ प्रोटेस्ट किया
व्यक्ति-3 किरण बेदी ने इस प्रोटेस्ट में एक्टिवली हिस्सा लिया
व्यक्ति-4 अरविंद केजरीवाल ने इस प्रोटेस्ट को हाईजैक कर लिया
व्यक्ति-5 रामदेव ने ब्लैक मनी का एंगल जोड़कर इस प्रोटेस्ट को और बड़ा बना दिया
व्यक्ति-6 सुब्रमण्यम स्वामी इस प्रोटेस्ट को सुप्रीम कोर्ट ले गए
व्यक्ति-7 मोदी ने इन प्रोटेस्ट की मदद से वोट लिए।
7 साल बाद, 👇
कोर्ट ने सभी गिरफ्तार लोगों को बेगुनाह करार दिया। यह साबित हो गया कि 2G में कोई स्कैम नहीं हुआ था।
नतीजा :
व्यक्ति-1, विनोद राय को पद्म विभूषण मिला। बैंकों के बोर्ड के हेड होने के नाते मोटी सैलरी मिल रही है।
व्यक्ति-2, अन्ना हजारे को Z प्लस सिक्योरिटी और कई सरकारी सुविधाएं मिलीं।
व्यक्ति-3, किरण बेदी को BJP सरकार ने LG का पद दिया।
व्यक्ति-4, केजरीवाल दिल्ली के CM बने।
व्यक्ति-5, रामदेव अब अरबपति बिजनेसमैन हैं।
व्यक्ति-6, स्वामी ने राज्यसभा का मज़ा लिया।
व्यक्ति-7, मोदी भारत के PM बने।
इस तरह UPA खत्म हो गया, और इस नेक्सस में मीडिया और बिके हुए सेलेब्स का भी हाथ था।
बस एक अफवाह की वजह से।
Netanyahu and Trump's war on Iran is wholly unprovoked, illegal, and illegitimate.
Trump has turned 'America First' into 'Israel First'—which always means 'America Last'.
Our Powerful Armed Forces are prepared for this day and will teach the aggressors the lesson they deserve
• तारीख:- 22 सितंबर 2012
• जगह:- विज्ञान भवन दिल्ली
• कार्यक्रम:- International Academic Conference on Economic Growth and Changes of Corporate Environment in Asia
PM मनमोहन सिंह भाषण दे रहे थे, तभी बिहार के संतोष कुमार मेज पर खड़े हुए और शर्ट उतारकर विरोध किया.
जानते हैं मनमोहन सिंग ने क्या आदेश दिया- "संतोष कुमार को परेशान ना किया जाए"
संतोष पर न कोई केस हुआ, न ही गिरफ्तारी हुई.
न्यूज चैनल वालों ने ये भी नहीं कहा कि संतोष ने देश की छवि खराब कर दी.
एक बात और जान लीजिए- संतोष कुमार RJD के लीगल सेल में थे. मतलब राजनीतिक दल से भी जुड़े थे.
इसके बाद भी मनमोहन सिंह का एक लाइन का आदेश- "संतोष कुमार को परेशान ना किया जाए"
सोचिए अब वक्त कितना बदल गया है.