"यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं छात्र और नौजवानों का है। क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के लिए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नज़र आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।
भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे जायज़ होंगे?
निंदनीय!
जब संसद के बजट सेशन का अंतराल हुआ था तब विषय अलग थे और आज के युद्धकालीन हालातों की वजह से, संकट के इस माहौल में हमारी प्राथमिकता निम्नलिखित विषयों पर होनी चाहिए :
- युद्ध के संदर्भ में देश का पक्ष व राय;
- विदेश नीति के गिरवी रखने का विषय;
- तेल जैसी आपूर्ति पर आत्मनिर्णय की जगह अमेरिकी आदेश का आना;
- हमारी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रश्न;
- युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में फँसे वहाँ कार्यरत भारतीय या पर्यटक बनकर गये भारत के नागरिकों की सुरक्षा व उन्हें सकुशल भारत लाने का सवाल;
- प्रधानमंत्री के साथ गये लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण भारत न लौट पाए पत्रकारों व मीडियाकर्मियों को सुरक्षित देश वापस लाने का प्रश्न;
- युद्ध के कारण ज़रूरी आपूर्ति को नियमित व सुनिश्चित करने के साथ ही उनके बढ़ते दामों को नियंत्रित करने का विषय।
• गुरु समान शंकराचार्य से सर्टिफिकेट की माँग।
• माता समान वयोवृद्ध महिला को सदन में अभद्र शब्द से संबोधित किया।
• अपने से बड़े, सदन के सदस्य को - लठैत।
• CM यानी “करप्ट माउथ” ने नैतिकता और शिष्टाचार के सारे आयाम तोड़ दिए हैं। इसलिए बुद्ध काल की यह कथा बताना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
• आपने शायद जातक कथा के नीले सियार की कहानी सुनी होगी। एक सियार नील के टब में गिरकर नीला हो जाता है। उसके नीले रंग के कारण जंगल के अन्य जानवर उसे भगवान का दूत मानकर जंगल का राजा बना देते हैं। यह सियार राजा ज़रूर था, पर अपनी भाषा नहीं भूला था। समय बीतने पर जब उसने अन्य सियारों की हुआँ-हुआँ सुनी, तो वह खुद भी हुआँकने लगा। तभी सब जान गए कि वह सियार ही है और उसका छल खुल गया।
• आज के सीएम भी वही हैं। जिन्हें “करप्ट माउथ” का इतिहास न पता हो, उनके लिए यह दबायी गयी जानकारी :
• मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सहयोग कर रहे थे।
• उस समय उनके पास तीन बसें और एक ट्रक थे।
• उन्होंने यह सड़कछाप भाषा उसी समय, डग्गामार वाहन चलवाते समय ही सीखी थी।
• योगी आदित्यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत अवैद्यनाथ (कृपाल सिंह बिष्ट) आपस में रिश्ते में भाई थे।
• बताया जाता है कि बाद में उनके चाचा ने ही उन्हें मठ में बुलाया।
• महंत अवैद्यनाथ ने अपने भतीजे अजय सिंह बिष्ट को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
• अजय सिंह बिष्ट गोरखनाथ पीठ के माध्यम से योगी आदित्यनाथ बने, जबकि इस पीठ में हजारों संन्यासी मौजूद थे।
• सवाल उठता है कि उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया - क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था।
• पहले उन्हें मठ की गद्दी सौंपी गई और कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी दे दी गई।
• क्या मठ में महंत चुनने के लिए कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी?
• क्या 4 साल में डग्गामार चलवाने वाला योगी का सर्टिफिकेट कैसे पा सकता है?
• यदि नहीं, तो क्या इसे “भगवा परिवारवाद” कहा जा सकता है?
और अंत में - पद और परिधान तो रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
‘नयी पीढ़ी’ इसीलिए नयी कही जाती है क्योंकि :
- ‘नयी पीढ़ी’ की सोच नयी होती है या कहें पुरानी नहीं होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ आनेवाले कल की ओर खुले नज़रिये से देखती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ मतलब हर अगली पीढ़ी पिछली पीढ़ी से ज़्यादा प्रगतिशील होती है ।
- ‘नयी पीढ़ी’ की सोच का दायरा बहुत बड़ा होता है।
- ’नयी पीढ़ी’ दुनियाभर को न केवल अनुभव करना चाहती है बल्कि गले भी लगाना चाहती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ का व्यवहार दोस्ताना होता है।
- ‘नयी पीढ़ी’ सबको साथ लेकर चलना चाहती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ का नेचर इंक्लूसिव और एकमोडेटिंग होता है।
- ‘नयी पीढ़ी’ के अंदर भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं होती है ।
- ‘नयी पीढ़ी’ हर धर्म, पंथ, विचार, फ़िलॉसफ़ी के लिए टालरेंट-सहनशील होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ के विचार फ्लेक्सिबल होते हैं, उनमे वैचारिक लोच होती है
- ‘नयी पीढ़ी’ सबको सुनना-समझना चाहती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ के दिल में सबके लिए ‘सम्मान-प्रेम और मोहब्बत’ भरी होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ सही मायनों में हर बेबस व्यक्ति और जीव-जंतु के प्रति अधिक दयालु और करुणा से भरी होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ बेहद पॉज़िटिव होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ आधुनिकता को अच्छा मानती है क्योंकि मॉडर्निटी नयी दिशा दिखाती है, सोच के लिए बड़े रास्ते बनाती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ इंसानियत, बंधुत्व से भरी होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ अमन-चैन और तरक़्क़ी पसंद होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ ख़ुद भी ख़ुश रहना चाहती है और सबको ख़ुश देखना चाहती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ ख़ुशहाली को अहमियत देती है, इसीलिए दुख देनेवालों का विरोध करती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ किसी भी तरह के कट्टर विचारों के ख़िलाफ़ होती है।
- ‘नयी पीढ़ी’ साम्प्रदायिकता को समाज और अपने वैश्विक विचारों के विस्तार के लिए ख़तरा मानती है।
इसीलिए ‘नयी पीढ़ी’ उनके ख़िलाफ़ होती है जिनकी सोच रूढ़िवादी व संकीर्ण होती और जिनका नज़रिया दक़ियानूसी होता है। वो दुनिया, देश और समाज को बाँटनेवाले हर एजेंडे और विचारधारा के ख़िलाफ़ होते हैं। इसीलिए परंपरागत रूप से जो अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते हैं या दमनकारी लोग होते हैं वो ‘नयी पीढ़ी’ की खुली सोच, जागरूकता, उदय, सकारात्मकता और असीम ऊर्जा से डरते हैं क्योंकि सदियों से चली आ रही कमज़ोरों और वंचितों के उत्पीड़न और शोषण करने की उनकी प्रवृत्ति को ‘नयी पीढ़ी’ से चुनौती मिलती है।
आज ‘नयी पीढ़ी का नया सकारात्मक दौर आ गया है’, परिवर्तन तय है और बदलाव भी। नयी पीढ़ी ही नया ज़माना लाएगी और मोहब्बत, अमन-चैन, ख़ुशहाली, और सबकी तरक़्क़ी का नया इतिहास लिख जाएगी।
सबके श्रद्धेय माननीय नेता जी की पुण्यतिथि पर उनको शत्-शत् नमन करते हुए हम संकल्प लेते हैं कि :
- ‘संविधान की रक्षा’ के लिए एकजुट रहेंगे और ‘संविधान ही संजीवनी’ है और ‘संविधान ही ढाल है’ ये संदेश जन-जन तक पहुँचाते रहेंगे।
- आरक्षण को समाप्त करने के लिए जो लोग तरह-तरह के षड्यंत्र कर रहे हैं, उनको हमेशा के लिए हराएंगे।
- ‘न्याय के राज’ से आगे बढ़कर ‘सामाजिक न्याय के राज’ की स्थापना करेंगे।
- हर पीड़ित, दुखी, अपमानित को ‘पीडीए’ के एकसूत्र में बाँधे रखेंगे।
- ’पीडीए के स्वाभिमान और स्वमान’ की चेतना को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे।
- नाइंसाफी और अत्याचार करनेवाले वर्चस्ववादियों और प्रभुत्ववादियों के दंभ व अहंकार को निर्णायक रूप से पराजित करेंगे।
- जो लोग पीडीए समाज के होते हुए भी, अपने निजी स्वार्थ के लिए पीडीए समाज पर ज़ुल्म करनेवालों के साथ खड़े होकर, अपने ही समाज को धोखा दे रहे हैं, उनकी धोखेबाजी को सबके सामने लाएंगे।
- मानवता से भरे हुए हर समाज के उन अच्छे और सहृदय लोगों को साथ में लेकर आगे बढ़ते रहेंगे जो शोषण को पाप समझते हैं और बिना किसी वर्चस्व की भावना और अहंकार के मानव की सेवा में रत रहते हैं और सामाजिक भेदभाव की समाप्ति के लिए हर तरह से प्रयासरत हैं।
- हर एक पीड़ित, उत्पीड़ित, शोषित, वंचित, दमित, ग़रीब, किसान, मज़दूर, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आदिवासी, असुरक्षित महिला व उपेक्षित युवा के रूप में, पीड़ा के एकसूत्र में बंधे हुए संपूर्ण पीडीए समाज को समान अवसर और सम्मान दिलवाने के लिए लड़ेंगे और अंततः 90% लोगों की जीत दर्ज़ करके दिखाएंगे।
- हम ‘संपर्क, संवाद और सहयोग’ के अपने सिद्धांत के साथ सबकी मदद के हाथ बनते रहेंगे।
- हम अपनी ‘पीडीए सरकार’ बनाकर अपने हक़ और सम्मान की स्थापना करके रहेंगे!
एकता जीत की बुनियाद होती है। एशिया कप जीतने पर भारतीय क्रिकेट टीम के सभी एकजुट खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, सपोर्टिंग स्टाफ़ व देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!
माननीय आज़म ख़ान जी की रिहाई उनके और उनके परिवार और हम सब के साथ-साथ, उन सब लोगों के लिए राहत और ख़ुशी की बात है जो ‘इंसाफ़’ में ऐतबार करते हैं। न्याय में विश्वास को बनाए रखने के लिए अदालत का दिल से शुक्रिया।
आज फ़र्ज़ी मुकदमे करनेवालों को भी ये सबक मिल गया है कि हर ‘झूठ’ की एक मियाद होती है और हर ‘साज़िश’ की भी। जो लोग सामाजिक सौहार्द के प्रतीक होते हैं, भाजपा को वो कभी अच्छे नहीं लगते हैं।
माननीय आज़म ख़ान जी एक बार फिर से हर उपेक्षित, पीड़ित, दुखी, अपमानित के साथ खड़े होकर, भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के द्वारा किये जा रहे जनता के दमन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएंगे और हमेशा की तरह देश-प्रदेश की भावनात्मक एकता के प्रतीक बनकर, समाजवादी मूल्यों और सिद्धांतों के साथ, सामाजिक न्याय के संघर्ष की राह पर आगे बढ़ते जाएंगे!
इंसाफ़ ज़िंदाबाद!
"हमें उम्मीद है आने वाले समय में आजम साहब के सभी मुकदमे खत्म होंगे। जितने भी झूठे मुकदमे लगे हैं आजम साहब पर समाजवादी सरकार में सब वापस लेने का काम होगा।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी, लखनऊ