उर्दू के साथ ज़ुल्म इस निस्बत से होता है कि लोग इसे भाषा और जबान कम मुसलमान ज़ियादा समझते हैं। लोग ये भूल जाते हैं की वो आम बोल चाल में रोज़ 60% उर्दू लफ्ज़ का ही इस्तेमाल करते हैं।
आजकल इलाहाबाद से होकर जाने वाली ट्रेनों में सफर करने के लिए मजबूत जिगर चाहिए। सीट के मामले मे किसी तरह का कोई भी भेदभाव नही हो रहा, जिसकी सीट है या जिसकी नही है सब एक समान हैं। पेशाब पाखाना यात्रियों को कहाँ करना है इसका ज़िम्मेदार वो खुद हैं।
@AshwiniVaishnaw
जिस हिसाब की भीड़ आज मैंने इलाहाबाद (प्रायागराज) रेलवे स्टेशन पर देखा वैसा अब तक किसी स्टेशन पे नही देखा
यहाँ रुकने वाली ट्रेनों में तो पुलिस खुद ठूस ठूस कर यात्रियों को बिठा रही,अपनी सीट पर लेटना तो दूर बैठने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा। ☺
टॉयलेट तक का सफर नामुमकिन है 😃
गरीबी और ग़ुलामी में पले बढ़े ज़ियादा तर लोग जब अचानक से पैसा देखते हैं तो फिर वो आग ही मूतते हैं, फिर वो चाहे शादी की शकल में या किसी और शकल में। दर असल वो ऐसा इसलिए करते ताकि समाज उन्हें इज़्ज़त की नज़र से स्वीकार ले और उन लोगों में जगह बना सकें जिनके वो कभी हरवाह हुआ करते थे।
Artificial Intelligence (AI) एक दिन कम पढ़े और कम समझदार इंसान को लूट लेगी, ज़लील कर देगी इसलिए कम से कम AI के बारे में थोड़ा बहुत पढ़े,पढ़ न सकें तो उस से रिलेटेड वीडियो ही देख सकते
अगर AI के बारे में 1%भी इल्म होगा तो सोशल मीडिया पर बहुत सारे चीजों को share करने से बच सकेंगे।