न ट्रायल न ज़मानत। पाँच साल से जेल में। कल बेगुनाह साबित हुए तो भी सज़ा तो काट ही ली।
भाषण देते हैं जज साहब लोग कि बेल सबको मिलनी चाहिए लेकिन बड़ी-छोटी हर अदालत ने पाँच साल से इन्हें निराश ही किया है।
कैसा न्याय है यह!
बचपन में फ़िल्मों में देखते थे कि, क़ानून अंधा होता है।उमर ख़ालिद और उनके साथी 5 साल से जेल में है।5 साल में उनके केस में ट्रायल तक शुरू नहीं हुआ।किसी भी My Lords को यह दिखाई और सुनाई नहीं दे रहा है कि बिना ट्रायल के गुनाह कैसे साबित होंगे ? देश का संविधान और क़ानून सुनवाई का अधिकार तो सबको देता है।
आजकल एक नया चलन शुरू हुआ है. मामलों के जज केस से Recuse, खुद को अलग कर रहे हैं. @zoo_bear मामले ने तीन बेंच खुद को मामले से अलग कर चुकी हैं. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में खुद CJI संजीव खन्ना खुद को अलग कर चुके हैं. ऐसे में इंसाफ कैसे मिलेगा? ये क्या हो रहा है? ये है संगोल युग का न्याय? शर्मनाक!
हर मस्जिद के नीचे मंदिर ढूंढो।
जज वर्शिप एक्ट को किनारे लगाके सर्वे करवा लेगा।
सर्वे टीम के साथ नारे लगाने वाले गुंडे जाएंगे।
किसी ने विरोध किया तो गोली चलेगी, मुसलमान मरेंगे।
जब तक सुप्रीम कोर्ट डांट लगाएगा कब्रिस्तान और आबाद होता रहेगा।
मुहर्रम का दिन हमें उसूलों और इंसाफ के लिए हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाता है। उनकी कुर्बानी मज़लूमों के साथ खड़े होने, इंसाफ और सच्चाई के लिए लड़ने की प्रेरणा देती है। हजरत इमाम हुसैन की शहादत को सलाम।
आज हमें दुनिया को हमारे फ़िलिस्तीनी भाई-बहनों पर हो रहे ज़ुल्म और उनके हज़ारों मासूम बच्चों की शहादत का एहसास कराना चाहिए। उनके साथ हो रही नाइंसाफी इंसानियत के हर उसूल के खिलाफ अपराध है। हमें इस अपराध को रोकने की हर कोशिश को मज़बूती देनी चाहिए।
इजराइल इस समय राफा में बच्चों को जिंदा जला रहा है। नेतन्याहू और इजरायल के आतंक पर चुप मत रहो। मानवता और गाजा और राफा के बच्चों के लिए अपनी आवाज उठाओ। आपके शब्द गाजा और राफा में बच्चों की जान बचा सकते हैं। #AllEyesOnRafah
मेरा और लाखों मुसलमानों का पसीना इस देश की मिट्टी का है। इस देश पर किसी एक जाति और एक धर्म का हक़ नहीं है। जो भी इस देश का नागरिक है उसे इस देश के संसाधनों पर बराबर हक़ है। पाकिस्तान भेजने वालों का इलाज हमें करना आता है कोई आए तो हमें भेजने पाकिस्तान।
Gaza पर दुनिया आँख बंद करके बैठी है !
ये आवाज़ अब सोशल मीडिया पर आये दिन देखने को मिल जाती है लोगो की तरफ़ से मासूम बच्चों की तस्वीरे शेयर करके लिखा जा रहा है इनका क्या क़सूर
आए दिन इज़राइल की तरफ़ से अस्पतालों से लेकर कैम्पो तक पर बमबारी की जा रही है ऐसे में दुनिया के लोग अब सवाल पूछ रहे है बच्चों और मासूम लोगो का क्या क़सूर
कुछ X यूजर तो ये तक कह रहे है की जब हमास ने इज़राइल पर क़हर किया तो पूरी दुनिया ने एक हो कर निंदा की लेकिन अब जब इज़राइल हमास के नाम पर गाजा के लोगो को शिकार बना रहा है तो दुनिया ख़ामोश क्यों है
अब तक इज़राइल और गाजा में चल रहे युद्ध में 8000 से अधिक लोग मारे जा चुके है और अभी भी जंग की आग ठंडी होती नज़र नहीं आ रही है !
गाजा में 7000 मनुष्यों की हत्या के बाद भी रक्तपात और हिंसा का दौर थमा नहीं। इन 7000 लोगों में से 3000 मासूम बच्चे थे।
कोई ऐसा अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं, जिसे कुचला न गया हो। कोई ऐसी मर्यादा नहीं, जिसे तार-तार न किया गया हो। कोई ऐसा क़ायदा नहीं, जिसकी धज्जियाँ न उड़ी हों।
मनुष्यता की सामूहिक चेतना आख़िर और कितनी जानें चली जाने के बाद जागेगी, या ऐसी कोई चेतना अब बची ही नहीं?
इजराइल जो कर रहा है उसकी वैश्विक निंदा होनी चाहिए और दुनिया भर के इंसाफ़ पसंद लोग यह कर भी रहें हैं। फलस्तीन के नागरिकों को महज़ चंद किलोमीटर के इलाके में समेट करके इजराइल धीरे धीरे सभी की निर्मम हत्या कर रहा है। गाज़ा के लोगों को पीने तक का पानी मुहैया नहीं कराया जा रहा है, बिजली तक नहीं दी जा रही है। पूरी दुनिया के साम्राज्यवादी, पूंजीवादी ताकतवर लोग इजरायल के साथ खड़े है। ऐसा लगता है मानों यह दुनिया अपने वीभत्स रूप में हमारे सामने आ रही है। साम्राज्यवादी ताकतें अब सामने से खेल रही हैं, उन्होंने नैतिकता को त्याग दिया है। हर संस्थान, हर विधान जो दुनिया में शांति और न्याय की स्थापना के लिए बना था, ऐसा लगता है वह धोखा था। उसको बड़ी ताकतों ने इसलिए बनाया था ताकि वह अदृश्य रूप से कमज़ोर मुल्कों पर हुकूमत चला सकें। आपने एक 20 लाख की बसी बड़ी आबादी का पानी रोक दिया है, उनकी बिजली काट दी है, उनके इलाके में भारी बमबारी कर रहें हैं और उनके अस्पतालों को भी ढहा दे रहें हैं। आपके नरसंहार की मंशा एकदम स्पष्ट है। आप नहीं चाहते कि फलस्तीन का कोई नामों निशान रहे। इतिहास ऐसे तमाम किस्सों से पटा पड़ा है जब साम्राज्यवादियों को लगा कि वह सब मिटा देंगे लेकिन कितनी भी बर्बर हुकूमत आ जाए वह सच को नहीं मिटा सकती हां कुछ वक्त के लिए दबा ज़रूर सकती है। एक बादशाह ने सोचा था कि वह हज़रत हुसैन को शहीद करके अपने सामने की हर नैतिक चुनौती को ख़त्म कर देगा, लेकिन हुआ क्या? हुसैन और उनके साथी अपनी प्यास के साथ अमर हो गए। इसी तरह हम डंके की चोट पर कहना चाहते हैं कि फलस्तीन था, फलस्तीन है और फलस्तीन रहेगा। इंसान ख़त्म हो जाते हैं पर जो नहीं ख़त्म होती वह हैं स्मृतियां। हम अपनी रीढ़ में जज्ब कर लेंगे इजरायल के अत्याचार को और जाने से पहले सुना देंगे इन किस्सों को आने वाली पीढ़ियों को, कि कैसे अमरीका, इजरायल, यूरोप जैसे मुल्कों ने एक बड़ी आबादी का नरसंहार किया। #IStandWithPalestinians
इजराइल द्वारा गाजा पर बमबारी के दौरान अब तक कुल 2808 लोग मारे जा चुके है। 10, 850 लोग घायल है। मारे गए लोगों में 60% बेकसूर महिलाएं और बच्चे है। दुनिया लहू के इस ख़ेल का तमाशा देख रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ इजरायल के इस आतंकवाद पर तमाशबीन बना हुआ है। शर्मनाक। #GazaUnderAttack
नूह की महिलाओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है जिसकी कोई सफ़ाई नही,महिलाओं का आरोप है कि "जब पुलिस हमारे घरों में घुसी हम क़ुरआन की तिलावत कर रहे थे,पुलिस ने हमारे हाथ से क़ुरआन छीनकर फेंक दिये,हमारा सब सामान फेंक देते पर क़ुरआन नही फेंकना था"!