मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव को लेकर बड़ा अपडेट—
मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला है।
इस उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने अपनी ही पार्टी के नेता राजेंद्र भारती के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं।
राजेंद्र भारती वही कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक हैं जिनकी सदस्यता जाने के बाद दतिया में उपचुनाव हुआ।
इस उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने राजेंद्र भारती पर आरोप लगाया है कि “ राजेंद्र भारती ने अंदरूनी तौर पर बीजेपी से मिलकर उन्हें हराने के लिए पूरी ताक़त लगा दी।
बीजेपी से पैसा लेकर उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर क्षेत्र में वितरित किया,,
इसके बाद राजेंद्र भर्ती ने जवाब देते हुए कहा कि “ जो लोग इस तरह का आरोप लगाते हैं वो लोग अपने गिरेबान में देखें की उन्होंने नरोत्तम मिश्रा से कितना पैसा लिया चुनाव लड़ने के लिए,,
कांग्रेस आपस में ही अब लड़ती नजर आ रही है।
जिस तरह से SIR में बीएलओ की जान जा रही है और निर्दयी भाजपा सरकार लोगों के दुख के लिए शोक प्रकट न करके, उल्टा जिनकी जान जा रही है, उनके ऊपर ही कामचोरी का जो आरोप लगा रही है वो बेहद निंदनीय है।
सत्ता के अहंकार में भाजपा सरकार ये मानकर चल रही है कि काम के दबाव में किसी की मृत्यु होने पर भी न तो हम अपनी व्यवस्था सुधारेंगे न ही कोई मुआवज़ा देंगे। भाजपा के कट्टर समर्थक तक इससे शर्मिंदा हैं और जनाक्रोश की प्रतिक्रिया के डर से उन लोगों के घर तक नहीं जा पा रहे हैं, जिनकी जान जा रही है। उनके सामाजिक संबंधों में दरार आ गयी है।
‘भाजपाई’ होना एक तरह से उन लोगों के लिए नकारात्मक रूप से इस्तेमाल किया जाने लगा है, जो दंभी, अंहकारी, निर्दयी और दूसरे के दुख से सुख पाते हैं।
सत्ता के दंभ में भाजपा अमानवीय हो गयी है।
इस दुखद घटना के लिए बस इतना ही कहना है कि बदइंतज़ामी और भ्रष्टाचार में लिप्तता इतनी भी न हो कि किसी की जान चली जाए।
स्वास्थ्य मंत्री के संज्ञान में ये बात अगर आए तो पीड़ित परिवार को उनका बेटा तो वापस नहीं करवा सकते लेकिन मुआवज़ा देकर कुछ तो पश्चाताप कर सकते हैं।
और कुछ नहीं कहना है।
मेरे अभिभावक, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री लालू प्रसाद यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई. थावे वाली माई के कृपा हमेशा अपने पS बनल रहो, रउआ हमेशा स्वस्थ रही, इहे प्रार्थना बा. 🙏🏻
झूठ बोलनेवालों कि सबसे बड़ी पहचान ये होती है कि वो अपनी कमियों, अपनी ग़लतियों और अपनी असफलताओं के लिए किसी और को दोषी बताते हैं।
आज सत्ताधारियों द्वारा महाकुंभ को लेकर जो बयानबाज़ी मीडिया के सामने की गयी है, वो उनकी कमज़ोरी का प्रतीक है। भाजपा सरकार में लोगों के बीच अपने को ‘झूठ का कुलपति’ साबित करने की होड़ लगी है। इंजन और डिब्बों के बाद अब तो पहिये भी टकरा रहे हैं। ये बड़े-बड़े दावे तो करते हैं, पर वो दावे आख़िर में झूठ साबित होते हैं।
ये समझ नहीं आता है कि जो भी बात ये अंदाज़े से करते हैं वो नकारात्मक ही क्यों होती है, क्या इसका कारण ये है कि वो स्वयं नकारात्मक हैं या उनके कामों के परिणाम नकारात्मक निकलते हैं। झूठ बोलनेवाले याद रखें कि जुमलों की उम्र बहुत ज़्यादा नहीं होती है।