Full poetry https://t.co/ZTUB2PF1ni
By:- kumarbharat
कर्ज ,फर्ज़ ,मर्ज
जरा मां का भी तू याद कर
बात क्या है कितनी बड़ी
मां से तो तू बात कर
याद कर वो पल्लू, गोद
मां से जो है तुझको मिली
मां ने तुझे प्यार किया
तू भी मां को प्यार कर
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जिंदगी चाहती थी
मैं हार मान लूं
खुद नहीं मानी मैंने
जो जिंदगी चाहती थी
चाहती थी हौसले तोड़ना
मैं उसकी बातें कैसे मान लूं
खुद को जानता हूं मैं
फिर हार कैसे मान लूं