@Gyaneshwar_Jour beltron कर्मी का केवल GST नहीं हटा सकती, न जाने सरकार ऐसा beltron कर्मी के साथ क्यों करती हैं। सरकारी कर्मी के बेतन से भी आधा बेतन भी beltron कर्मी को नहीं मिलता। लगता हैं सरकार के नजर में सरकारी कर्मचारी ही भोजन करते और हम beltron कर्मी माटी खाते है। तभी तो GST kat रहा है।
@Gyaneshwar_Jour सर बेल्ट्रॉन डाटा ऑपरेटर रात दिन त्योहार SIR इलेक्शन आदि जैसे महत्पूर्ण कार्य करते है ऑफिस में सारा काम करते है फिर भी न समय से BETAN मिलता है जो मिलता है वो भी सब लोग खाकर छोड़ देते है उसके बाद हमलोग के खाता में आता है आखिर इतना शोषण क्यों डाटा ऑपरेटर के साथ 🙏🙏🙏
@Gyaneshwar_Jour आपका आकलन सही है सर बेल्ट्रॉन के माध्यम से नियोजित कर्मियों की समस्याओं का मात्र एक निदान है कि सरकार शिक्षक की भांति इन्हें राजकर्मी का दर्जा प्रदान करें
@NitishKumar@officebihar
@Gyaneshwar_Jour बेल्ट्रॉन डाटा ऑपरेटर सरकार से निवेदन करता है कि 20000 ऑपरेटर को शोषण मुक्त किया जाए आउटसोर्सिंग मुक्त किया जाए सेवा समायोजन किया जाए पदाधिकारी लोग बहुत मानसिक शोषण करते है जबकि सारा काम ऑपरेटर ही करता है @NitishKumar
बिहार में सालों से Manpower Outsourcing का मतलब एक ही नाम रहा #Beltron.
सरकारी दफ्तरों में कंप्यूटर ऑपरेटर से लेकर डेटा एंट्री तक, हजारों युवा बिहार सरकार के तमाम विभागों का काम संभालते हैं.
अब खबर है कि सरकार Beltron की ये मोनोपॉली तोड़ने जा रही है. यानी अब सिर्फ एक एजेंसी नहीं, कई कंपनियां इस काम में आएंगी.
सवाल ये है- क्या इससे सिस्टम बेहतर होगा? या फिर बेल्ट्रोन कर्मियों की नौकरी और सुरक्षा पर नया खतरा खड़ा होगा?
हकीकत ये है कि ये कर्मचारी सालों से कम सैलरी, अस्थायी नौकरी और अनिश्चित भविष्य के साथ काम कर रहे हैं. और अब अगर नया सिस्टम आया, तो सबसे पहले असर इन्हीं पर पड़ेगा. है कि नहीं?
सरकार कह रही है- प्रतिस्पर्धा आएगी, पारदर्शिता बढ़ेगी. लेकिन कर्मचारी पूछ रहे हैं- हमारी गारंटी कौन देगा?
तो असली मुद्दा यही है —
मोनोपॉली टूटनी चाहिए, या फिर सरकार को उनका समायोजन करना चाहिए?
सबसे सबसे बड़ा सवाल तो यही है न भाई.
@officecmbihar@NitishKumar@samrat4bjp
BREAKING NEWS
सरकार की तैयारी से स्पष्ट संकेत. Manpower Outsourcing में Beltron की मोनोपॉली तोड़ी जाएगी. खास के लिए बहुत हो चुकी बदनामी. अब विभागों को मिल सकता अधिकार.
#Beltron#ManpowerOutsourcing#DataOperator
Manpower Outsourcing Tender: IAS लॉबी में जीत की जंग है. दोनों ओर ही नहीं कई ओर हैं. लेकिन, सरकार भी इस बार Beltron को Urmila के कब्जे से मुक्त कराना चाहती है. बहुत बदनामी हो चुकी है. केस-मुकदमे भी. अविनाश सबको नचा देते हैं, कहा जाता है. श्रम विभाग में भी मामला फंस गया है. मुक्ति को बंद फाइलें तैयार हो रही है, लेकिन खरीद के तराजू का वजन भी बहुत बढ़ा दिया गया है. देखिए, आगे-आगे क्या होता है ?
@NitishKumar लोग बोलता है कंपनी में काम करता है मैं 29 साल को हो गया हूं पर विवाह नहीं हो रहा है कहना कब हटा देगा पता नहीं । सर हमलोग अलग अलग विभाग में लगभग 20000 की संख्या में है। मैं LRC में हूं यहां पद स्वीकृत हैं हमलोग को परमानेंट कर दीजिए विश्वास दिलाता हूं में आपका ही रहूंग
@NitishKumar माननीय मुख्यमंत्री जी आप विकास पुरूष है इस साल सबको कुछ न कुछ दिये है हमलोग बैल्ट्रांन से डाटा इंट्री आपरेटर है जिसको उर्मिला के तहत पैसा देकर आउटसोर्स बना दिया गया है ऐसा कांट्रेक्ट को अधिकारी हथियार बना कर हमलोग पर युज करता है समाज में भी लोग बोलता है।
@VijayKChy@NitishKumar@Jduonline आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं आदरणीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी आपके डबल इंजन की बिहार सरकार में हम सभी डाटा एंट्री ऑपरेटर अपनी सेवा समायोजन के लिए 17/07/2025 से अभी तक हड़ताल पर है। 25 वर्षों से हमारा शोषण किया जा रहा है। @narendramodi, @NitishKumar
आज से #Beltron कर्मी अपनी 11 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। अस्थायीकरण के खिलाफ हड़ताल शुरू कर दी है।
हमारा संघर्ष रोज़गार की स्थिरता, सम्मान और अधिकारों के लिए है।
सरकार को अब जवाब देना होगा!
#स्थायीकरण_हमारा_अधिकार@IPRDBihar@DitBihar@bsedc@gadbihar
सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार,पुलों के गिरने पर जिस तरह से फ़ज़ीहत झेली, बलिहारी है. हज़ारों करोड़ बह गए, बेईमानों के पेट भर गए- लेकिन बेल्ट्रॉन कर्मचारियों को सरकार के तहत नहीं लेंगे.
स्कूल-अस्पताल-भवन-सड़क, हर जगह लोगों के पैसों की लूट को कैसे मैनेज किया जाए, इसमें दिमाग़ खपेगा, लेकिन बीस हज़ार परिवारों को चैन की नींद आए,इसका फ़ैसला नहीं किया जाएगा.
#beltron #bridge #SC #bihar
मैं बार-बार बिहार में #Beltron कर्मियों का सवाल उठाता रहता हूं. मुझे उम्मीद है कि उनके हालात के बारे में बात ठीक से रखी जाए और उनकी सेवाओं की अहमियत पर जनमत तैयार किया जाए, तो नीतीश कुमार की सरकार किसी ना किसी रोज उनको स्थाई करने का फैसला लेगी.
बेल्ट्रॉनकर्मियों की सारी तकलीफ की जड़ एक प्रायवेट कंपनी है, जिसके जरिए वेतन भी दिया जाता है. एक स्टेट पीएसयू में लंबे समय से एक प्राइवेट कंपनी सर्वेसर्वा बनकर कैसे बैठी है?
मेरे पास लोग जब अपनी स्थिति का कच्चा-चिट्ठा भेजते हैं तो लगता है कि यह सरासर नाइंसाफी है. फिर भी,उनके लिए कुछ बेहतर नहीं हो पाना,कई तरह की आशंका पैदा करता है.