राघव त्रिवेदी जी, चलिए आपकी बात मैंने मान ली कि आपके बाप, दादा, परदादा इत्यादि बलात्कारी, शोषक, अत्याचारी और नीच लोग थे।
वे दलित, पिछड़े महिलाओं और पुरुषों का देखते ही शोषण कर लेते थे।
आपकी यह बात भी मान ली कि आप ऐसे ही नीच और घटिया खानदान में पैदा हुए हैं।
लेकिन आप इसे सभी राजपूतों और ब्राह्मणों पर मत जोड़िए। हमारे पूर्वज महान थे। हमारी लाखों स्त्रियों ने जौहर किया है। हमारे राजपूत राजाओं ने सैकड़ों बार किले में सभी जातियों के लोगों को शरण दी, जिससे राशन जल्दी खत्म हो गया और इन सैकड़ों जौहरों में हमारी लाखों स्त्रियों को जलकर मरना पड़ा।
हमारे लाखों पुरुष विदेशियों से लड़ते-लड़ते साका करके मर गए।
ब्राह्मणों ने भी अपनी जान दे दी, लेकिन जनेऊ नहीं छोड़ा। चंद्रशेखर आजाद और रामप्रसाद बिस्मिल जैसे हजारों क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिनमें 70% से ज्यादा ठाकुर और ब्राह्मण थे। हमारे पूर्वज सबकी मदद करते थे।
तो अगर आप घटिया खानदान में पैदा हुए हैं, तो आप जाकर अपना शोषण करवा लीजिए। आपके जिस अंग के शोषण से दलित-पिछड़ों का मकसद पूरा होता है, वह आप करवा लो और अगर आपकी अम्मा, बहन इत्यादि को भी आपके ही जैसे लगता है कि वे सब घटिया खानदान में पैदा हुई हैं, तो आप उनका भी जाकर दलितों-पिछड़ों की इच्छानुसार और उनकी सुविधानुसार उनसे शोषण करवा लीजिए। दलित-पिछड़े जैसे भी बदला पूरा करना चाहते हैं, उनका जैसे बदला पूरा होता है, करवा लीजिए, लेकिन हम लोगों को इसमें मत घसीटिए।
रही बात आत्महत्या की, तो इस समय देश में डेढ़ लाख लोग हर साल आत्महत्या करते हैं। एनसीआरबी (NCRB) का आंकड़ा है कि IIT, IIM में सिर्फ 24 दलित छात्रों ने आत्महत्या की थी, लेकिन 62 सवर्ण छात्र आत्महत्या किए। इसी तरीके से चाहे सरकारी नौकरी हो या उच्च पद हों, आत्महत्या करने के मामले में दलितों से तीन गुना सवर्ण हैं।
हमारी आत्महत्या के पीछे भी सैकड़ों केस में कारण दलित और पिछड़े हैं।
तो झूठ बोलने का कोई फायदा नहीं है।
जहाँ तक आरक्षण की बात है, निजी क्षेत्र तो छोड़ो, अब यह सरकारी नौकरी में भी खत्म होगा। यह हमारे बच्चों के साथ अन्याय है।
आज 10 लाख फीस देने वाला बच्चा, बड़ी-बड़ी कार में घूमने वाला बच्चा 40 नंबर पर सीट पा रहा है, लेकिन हमारे बच्चे दिन-रात पढ़कर 80 नंबर लाने पर भी बाहर कर दिए जा रहे हैं, क्योंकि उसके बाप ने खुद को आर्टिफिशियल दलित-पिछड़ा घोषित कर लिया है।
तो यह अन्याय खत्म होगा, अब आप या आपके जैसा कोई दूसरा चाहे जिस लालच में आर्टिफिशियल पिछड़ों की दलाली कर ले।
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एक-दो-तीन, ये थप्पड़ों की बौछार कांवड़िए पर नहीं बल्कि हिंदू आस्था पर हुई। थाने के आगे कैमरे के सामने आस्था से ऐसा खिलवाड़? ऐसा दुर्व्यवहार? पहले कांवड़ियों को थाने लाया, उनके साथ गाली-गलौज किया फिर खुलेआम मारपीट?
सवाल तो ये है कि क्या ये पुलिसकर्मी कांवड़ियों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं? पहले तो मुझे लगा ये किसी के गुंडई का मामला है, बाद में पता चला महोदय पुलिसकर्मी हैं। मामला राजस्थान के जयपुर का।
ये है आपका टिपिकल मुसलमान युवा। वो चाहे कामगार हो या बेरोज़गार, उसका लक्ष्य एक ही है: हिन्दुओं का खात्मा। ये लोग दिन भर मौलवियों से ले कर ओवैसी जैसों को सुनते हैं और हृदय में विष लिए घूमते हैं। और इनके मौलवी इन्हें समझाते नहीं, हाथ में तलवार दे देते हैं।