आज राजनाथ सिंह का बेटा प्रदेश उपाध्यक्ष बन गया
अमित शाह का बेटा ICC सचिव बन गया
नितिन गडकरी का बेटा पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाकर पूरे देश को चूना लगा रहा है
ज्योतिरादित्य सिंधिया का बेटा मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष बन गया
अरुण जेटली का बेटा दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष है
अपने बच्चों को बड़ी बड़ी पोस्ट पर सेट करने के बाद देश के युवाओं को धर्म की चाशनी चटाते है।
सबसे बड़ा सवाल, ये परिवारवाद है की नहीं ?
जनता अब भाजपाइयों का भाषण सुनने के मूड में नहीं है।
अंहकार विवेक हर लेता है।
जो दूर से ये धारणा बनाये बैठे थे कि ‘कोई’ ईमानदार है; भ्रष्ट नहीं है; जन-सेवा में निस्वार्थ भाव से लगा है; भौतिक-लालच से परे है, अब तथाकथित माननीय का ‘म्यूट कर दिया गया वो वीडियो’ देखकर, उनका भी सारा भ्रम टूटकर चकनाचूर हो गया है। जो व्यक्ति सैकड़ों कैमरों के सामने किसी माँ की गोद उजड़ जाने के सबसे बड़े दुख के क्षण में भी एक दुखी परिवार को सांत्वना देने की जगह धमकी भरे लहजे में, अपने कठोर हाव-भाव के साथ बोल रहा हो, वो कितना हृदयहीन, संवेदना शून्य, निष्ठुर और निर्मम होगा, अब ये बात सबके सामने खुल गई है। इसे ही क्रूर-व्यवहार कहते हैं, ये बेहद अमानवीय है।
अब इनके झूठे नायकत्व का सारा मायाजाल तार-तार हो गया है। सबसे ज़्यादा ठेस इनके सबसे बड़े उन प्रशंसकों और समर्थकों को लगी है जो इनकी ‘मिथ्या दिव्यता’ के गुणगान करते नहीं थकते थे। वो अब अपने घर की महिलाओं को ही मुँह दिखाने लायक नहीं बचे, अन्य महिलाओं का सामना करने की तो बात ही बहुत दूर है। वो जब ये सोचकर देख रहे हैं कि कहीं ऐसी दुखद घटना उनके परिवार के साथ घटती और उनके घर की किसी ‘माँ’ के साथ ऐसा दुर्व्यवहार होता तो क्या होता, ये विचार करके ही वो काँप जा रहे हैं और सोच रहे हैं कि वो किस पाताली कूप में कूदकर अपनी शर्मिंदगी छिपाएं।
याद रखा जाए इनकी कटु-वचन वाणी का ये पहला उदाहरण नहीं है। पत्रकार से लेकर अधिकारी तक पहले भी सरेआम इनका शिकार हो चुके हैं।
जिसके लोक व्यवहार में खोट होता है, वो अकेले में कैसा व्यवहार करता होगा, जनता ये समझ गई है। अब क्या तथाकथित माननीय ये कहेंगे कि पूरी दुनिया में फैल चुका उनका वीडियो AI जेनरेटेड है। सच तो ये है कि अगर जनता चाहे तो AI से होंठों को पढ़कर ये बता सकती है कि ‘वास्तव में उन्होंने किन अपशब्दों का इस्तेमाल किया था’।
जिसका अपने वचन-व्यवहार पर नियंत्रण नहीं वो प्रदेश पर क्या नियंत्रण करेगा और दिल्ली पर राज के सपने क्या देखेगा।
इनके इस कुकृत्य की वजह से अब प्रदेश, देश, दुनिया की कोई महिला चाहे वो माँ हो या बहन, वो अब भाजपा का पूर्ण बहिष्कार करेगी। इस घटना ने संपूर्ण विश्व में भाजपा की दिखावटी, सजावटी, बनावटी छवि को मिट्टी में मिला दिया है। अब भाजपा इनको पद से हटा भी देगी तो भी ‘आधी आबादी’ के वोट नहीं पायेगी क्योंकि ‘बात जब माँ की आती है तो हर सरहद मिट जाती है।’
जनता ने भाजपाइयों का ‘नारी वंदन’ का सच कैमरे के सामने देख लिया है। भाजपा और उनके संकीर्ण सोच के संगी-साथी सभी लोगों की सामंती सोच में जब नारी के लिए ही कोई स्थान नहीं है तो नारी के मान-सम्मान के लिए क्या होगा।
अभूतपूर्व निंदनीय!
भाजपा हटाओ, संवेदना बचाओ!
माँ का दर्द कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
🙏 गाय की जान बचाने की ये कोशिश देखकर आप भी इमोशनल हो जाएंगे।जानवरों के प्रति प्यार और इंसानियत का बेहतरीन उदाहरण।
👉 जानवरों को कभी भी मुसीबत आए तो ऊपर वाले किसी न किसी को फरिश्ते बनाकर भेजते हैं , क्या आपने कभी जानवरों को इस तरह मदद किए हैं ??
हम में से ज़्यादातर लोग सोचते हैं कि बैंकिंग अब पूरी तरह डिजिटल हो चुकी है
मैं भी यही सोचती थी...
फिर पता चला कि SBI ने सिर्फ FY25 में कागज़ और स्टेशनरी पर ₹986 करोड़ खर्च किए
यानी लगभग ₹2.7 करोड़ हर दिन...😳
पहले सुनकर लगा कि जब सब कुछ मोबाइल पर हो रहा है तो इतना कागज़ क्यों???
लेकिन थोड़ा सोचिए...
जब हम बैंक अकाउंट खुलवाते हैं... लोन लेते हैं या कोई बड़ा ट्रांज़ैक्शन करते हैं तो सिर्फ एक क्लिक से काम नहीं चलता
उसके पीछे होते हैं
KYC और पहचान की पुष्टि
सुरक्षा और ऑडिट की ज़रूरतें
सरकारी नियम और रिकॉर्ड
यही वजह है कि बैंक आज भी दो दुनियाओं में काम कर रहे हैं...
एक तरफ तेज़ और आसान डिजिटल बैंकिंग
दूसरी तरफ फाइलें.. दस्तावेज़.. सिग्नेचर और रिकॉर्ड
शायद डिजिटल होने का मतलब कागज़ को पूरी तरह खत्म करना नहीं है...
बल्कि नई तकनीक को अपनाते हुए उन चीज़ों को संभालकर रखना है जो भरोसा और सुरक्षा बनाए रखती हैं
अनिल यादव: ओम प्रकाश राजभर की क्या नाराजगी होगी वो तो आपके पार्टनर रहे है।
पवन पांडे जी: हम बता रहे हैं आपसे जबतक वो हमारे साथ थे कोई नसा नहीं करते थे..
जब कभी अगर अखिलेश जी के चोरी छुपके पी भी लेते थे तो देखो कैसे भाजपाइयों को गरियाते थे मोदी योगी को लेकर क्या क्या बोलते थे..
हम लोग और अखिलेश जी उनको मना भी करते थे कि भइया नशा न करो किसी को गाली वाली न दो लेकिन वह जब चोरी चुपके पी लेते थे..
अब हम लोग हर समय तो रह नहीं सकते है उनके साथ..😂😂
❌ये कैसा वयान जब पासपोर्ट नागरिकता
संबित नही होती
तो विदेश जाने पर हमे कहाँ का
नागरिक समझा जायेगा
विदेश वाले deport कर सकते हैं
X के साथियों मार्ग दर्शन करें
जय श्री राम जी
योगी सरकार की नाकामी से लखनऊ की लाइब्रेरी में 15 बच्चे मर गए
दावा लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने का करते हैं हकीकत में आग लगने पर एक फ़ायर ब्रिगेड नहीं पहुँच रही है ।
भाई ने Paid Post का ऑफर दिया...
मैंने साफ़ कह दिया, "हम हरिश्चंद्र की औलाद हैं, नोट देखकर पोस्ट नहीं बदलते।😎
आजकल कुछ लोग ऐसे मैसेज डालकर खुद भी गुमराह होते हैं और दूसरों को भी गुमराह करते हैं।
सच और झूठ का फर्क समझना जरूरी है,
क्योंकि सोशल मीडिया पर हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। 😂
निष्कर्ष: पैसा कमाना बुरी बात नहीं है, लेकिन लोगों को भ्रमित करके कमाया गया भरोसा ज़्यादा दिन नहीं टिकता। 🙏
65 साल की मां का इकलौता सहारा चला गया
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में एक मां ने अपने बुढ़ापे का एकमात्र सहारा हमेशा के लिए खो दिया
चिखें, आँसू और बिखरे हुए सपने बूढ़ी मां अब अपने बेटे की यादों के सहारे इस दुनिया में अकेली रह गई हैं
घर में और कोई नहीं बेटा ही आखरी…Read News
🔥 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को लेकर लगातार राजनीतिक हमले और आलोचनाएं देखने को मिल रही हैं।
कुछ लोग मानते हैं कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध है, जबकि कुछ का मानना है कि इसके पीछे सत्ता और संगठन के अंदर की खींचतान भी हो सकती है।
सवाल यह है कि किसी भी नेता का मूल्यांकन उसके कामकाज और नीतियों के आधार पर होना चाहिए या फिर उसकी जाति और पहचान के आधार पर?
लोकतंत्र में आलोचना होना स्वाभाविक है, लेकिन यदि किसी के खिलाफ केवल उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर माहौल बनाया जाए, तो यह भी गंभीर चर्चा का विषय है।
जनता आखिरकार काम, विकास और परिणाम देखती है। बाकी आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक समीकरणों का फैसला समय और जनता दोनों कर देते हैं।