राष्ट्र सर्वोपरि, गुणवत्तापूर्ण प्रशासन और त्वरित न्याय का पक्षधर, जिज्ञासु हिन्दू !
राष्ट्र सर्वोपरि नहीं तो फौलो नहीं !!
RT is not endorsement
No DM pl.
@ocjain4 दिल्ली तो लूट लिया अब पंजाब में दखल देके मोटा मॉल कमाना है फिर बगल में बॉर्डर क्रॉस कर पाक में ढिकाना है। आखिर कट्टर बेईमान का किरदार तो निभाना है।।
हिंदू नहीं सुधरेगा 🚨
थूक वाली रोटी खुद भी
खायेगी बारात को भी खिलायेगा 😡
वीडियो मेरठ का एक शादी समारोह का है
जहाँ अब्दुल को तंदूर पे लगाया गया था
अब्दुल अपने मज़हबी रंग में काफिरों के जिश्म में थूक पंहुचाने के इरादे से रोटियों पर थूकने लगा..
लेकिन वीडियो बनाने वाले ने इसे छुपा लिया जिससे शादी न रुके, वीडियो 21 तारीख़ का है
@meerutpolice@adgzonemeerut
कृपया संज्ञान लें और ऐसी कार्यवाही करें जिससे सबक मिले ऐसे दूसरे महा घृणित घटिया मज़हबी कीड़ो को✍️
NDA सरकार ना होती, तो बिहार सहित देशभर के मेरे किसान भाई-बहनों को पीएम किसान सम्मान निधि ना मिलती। बीते 6 साल में इसका एक-एक पैसा सीधे हमारे अन्नदाताओं के खाते में पहुंचा है।
खबर जोरदार है...
यह खबर सुनकर आप हंसेंगे या रोयेंगे....
आप पर निर्भर करता है।
मैं तो पहले शॉक्ड रह गया...
फिर जोर से हंसा, लिखना शुरू किया तो दुखी हूँ..!!
दो बार सैन्य विमान से भारत के अवैध घुसपैठियों को भारत भेजने के बाद जब अमेरिका की भारत का विपक्ष बहुत तगड़ी आलोचना किया और भारत सरकार ने भी अमेरिका के सामने मुद्दा उठाया ,,
पूरी खबर कमेंट में है.... 👇
उसके बाद अमेरिकी सरकार संबंधित देशों को कह दी है और उन घुसपैटियों के परिवार वालों को भी सूचना दे दिया गया है...
कि आप इनको यहां से जैसे चाहे वैसे फूल-मालाएं पहना कर ले जा सकते हैं...
अब अमेरिका किसी भी देश में घुसपैठियों को अपने विमान से अपना पैसा खर्च करके नहीं भेजेगा बल्कि उन्हें ग्वाटेमाला मैक्सिको और पनामा में छोड़ देगा जहां वो मुफ्त में पनामा नहर खुदाई करेंगे।
सही सलामत घर वापसी हो रही थी उसकी खुशी मनाने की जगह विपक्ष अमेरिका ओर मोदी सरकार को कोस रहे थे।
जबकि लोगो को पता है मोदी है तो लोग विदेशों से सही सलामत ओर जीवित लौट रहे थे।
ये कतर में फांसी की सजा पा चुके नौसैनिक के बारे में नहीं बताते।
कांग्रेस से एक सबरजीत जिंदा नहीं लाया गया था।
कुत्तों... को घी हजम न होना था
ना हुआ,
अमेरिका घुसपैठियों को घर तक छोड़ता था तो पेट में दर्द था.. नहीं, जबरजस्ती दर्द उठवाया...
ना ही सरकारी खजाने से ₹1 भी मुआवजा देने का ऐलान किया और ना ही अपने पार्टी के किसी नेता या मंत्री को भारत यादव के घर पर भेजा...
आप लोग चाहे तो गूगल पर इस बारे में सर्च कर सकते हैं
क्योंकि अखिलेश यादव को लग रहा था कि हत्यारा मुस्लिम है तो यदि वह भारत यादव के घर जाएंगे तो मुस्लिम समाज उनसे नाराज हो जाएंगे
वह तो कई हिंदू संगठनों ने क्राउड फंडिंग करके भारत यादव के परिवार को 51 लाख रुपए का चेक दिया था....
दिन रात जातिवाद का जहर बोने वाले अखिलेश यादव को यादव तब याद नहीं आते जब किसी बेगुनाह यादव की हत्या कोई जिहादी कर देता है।
ऐसा ही वाक्या अभी प्रयागराज में देखने को मिला जब.. नवीं क्लास में पढ़ने वाले शैलेश यादव की बेरहमी से हत्या जिहादियों ने कर दिया था।
शैलेश की लाश को भी इन राक्षसों ने क्षत विक्षत कर दिया था। यहां पर जेहादियों ने एक भूल कर दी थी कि वो भूल गए थे कि उत्तर प्रदेश में अब योगी सरकार है। बुलडोजर दहाड़ दिया...
लेकिन सवाल यह है कि संभल में पत्थरबाजों को 5-5 लाख रुपए बांटने वाले अखिलेश यादव जी शैलेश यादव के परिवार को एक फूटी कौड़ी तक नहीं दिया...
आखिर क्यों..?
मुस्लिम नाराज ना हो जाए सिर्फ इसलिए...
याद तो होगा ही...?
सुल्तानपुर में तमंचे के बल पर ज्वेलरी की दुकान लूटने वाले डकैत मंगेश यादव के एनकाउंटर के बाद अखिलेश यादव ने कैसे छाती कूट कूट कर रोया था।
एक अपराधी के मारे जाने पर जातिप्रेम जाग जाता है किन्तु किसी निर्दोष के मारे जाने पर वोट बैंक की नाराजगी मोल नहीं लेते हैं अखिलेश यादव...
अखिलेश यादव जी आज मैं पूछना चाहता हूं कि क्या भारत यादव या शैलेश यादव आपके जाति के नहीं थे।
एक नहीं...
हजारों भारत यादव और शैलेश यादव जैसे यादवों की कहानी है, गिनाने लगूंगा तो देर हो जाएगी..
यह भी तो याद ही होगा....
मुख़्तार अंसारी की मौत से जितना दुःखी मुख्तार का परिवार नहीं हुआ होगा उससे ज्यादा दुःखी श्रीमान अखिलेश यादव हुए थे।
लगभग इतने ही दुःखी अखिलेश यादव अतीक अहमद व अशरफ के मारे जाने पर हुए थे।
जेहादी, आतंकी, डकैत, माफिया व अपराधी अखिलेश यादव के हृदय में बसते हैं।
उनके लिए अखिलेश यादव जी पार्लियामेंट में भी छाती पीट पीटकर रोते हुए बिल्कुल नहीं शर्माते हैं।
यही तो असली तुष्टिकरण की राजनीति है। जब किसी खास समुदाय के उपद्रवी पकड़े जाते हैं तो तुरंत मदद और मुआवजे की घोषणा होती है, लेकिन जब एक निर्दोष हिंदू, खासकर यादव समाज का बेटा मारा जाता है, तब नेता मौन साध लेते हैं।
क्या यादव समाज सिर्फ वोट बैंक है? जब चुनाव आते हैं, तो जातिवाद की राजनीति की जाती है, लेकिन जब उनके ही समाज का कोई निर्दोष मारा जाता है, तब कोई सहानुभूति नहीं?
योगी सरकार ने दिखा दिया कि उत्तर प्रदेश में अब अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। बुलडोजर एक्शन से ये संदेश गया कि अगर कोई निर्दोष हिंदू की हत्या करेगा, तो उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा।
अब सवाल यादव समाज से है—क्या वे ऐसे नेताओं को समर्थन देते रहेंगे जो उनके दुश्मनों के पक्ष में खड़े होते हैं?
कठपुतली की नाच देखा है किसी ने.....🤔🤔
आइए मैं ऐसा राजनीतिक कठपुतली का नाच दिखाऊंगा कि आप हैरान रह जाएंगे...
बस लेख आखिरी तक पढ़ना..
“वामपंथ की फ्रेंचाइजी”
11 वर्ष पहले केजरीवाल एकाएक कहीं से आया और दिल्ली जीत ली. फिर दोबारा और तिबारा जीत लिया, वह भी भयंकर भारी बहुमत से....
साथ ही पंजाब जीता,
गोवा और गुजरात में भी थोड़ी बहुत पैठ बनाई.
किसी भी दृष्टि से एक राजनीतिक फ्रीलांसर के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होती....
बस एक अंतर है...
बाकी लेख कमेंट में पढ़िए...
एक थी बेहद शरीफ भाजपा, जिसे केवल 1 वोट से संसद भवन में गिरा दिया गया था, और इटली की चतुर महिला गुलाबी होंठों से मंद-मंद मुस्करा रही थी। अटल बिहारी वाजपेयी जी हाथ हिला-हिलाकर अपनी चिर-परिचित शैली में व्यस्त थे।
जब तक भाजपा अटल जी की विचारधारा पर चलती रही, वो प्रभु श्रीराम के बताये मार्ग पर चलती रही। मर्यादा, नैतिकता और शुचिता द्वारा इनके लिये कड़े मापदंड तय किये गये थे। परन्तु कभी भी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सके।
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बस शिवलिंग पकड़ के रोए जा रहा था और यही बोल रहा था..
बैजू.. आँखें खोलो बैजू.. हम आ गये.. आँखें खोलो बैजू..
सामने ही माता पार्वती और भोलेनाथ बिराजमान थे.. लिपट गया चरणों में..
माँ-बाबा जो आज तुम न आते तो जान दे देता मैं अपनी..
भोलेनाथ ने बैजू को ह्रदय से लगाया..
बोले, बैजू बेमोल बिक गया तेरे हाथों में..
सुन आज से मुझ से पहले लोग तेरा नाम लेगें फिर मेरा.. आगे बैजू पीछे नाथ.. 'बैजनाथ'
हमका आपन जानवर तक बेचय के पड़ा..
पुजारी बाबा अपलक बैजू को निहार रहे धे.. जानते थे के ए झूठ बोल नहीं सकता..
तो क्या भोलेनाथ माता पार्वती के साथ आते थे?
बैजू आज तुम फिर भोग लगाओ देखें कौन-कौन आता है..?
बैजू बेचारा समय से भोजन ले के हाजिर.. बुलाना शुरू..
काहे को भोलेनाथ आयें..!!
बुलाते-बुलाते थक गया पर न भोलेनाथ को आना था न वो आये..
बाबा बाबा लाठी न उठाऊंगा चाहे तुम आओ या न आओ.. लाठी न उठाऊंगा.. बाबा लाठी न उठाऊंगा..
दो महीनों का भोग सामग्री और कहाँ तीन आदमी का भोजन..
बेचारे बैजू को अपने जानवर तक बेंच देनें पड़े..
किन्हीं कारणवश पुजारी बाबा बजाय दो महीनों के एक महीनें के अंदर ही तीर्थ से वापस आ गये..
पुजारी बाबा ने बैजू को बुलाया और कहा
बैजू.. भोलेनाथ को समय से भोग लगाता था न..?
हाँ पुजारी बाबा, पर बाबा तुम तो कहत रहयो के उ अकले आयेगें..
पर ऊ तो माता अन्नपूर्णा के साथे आवत रहेंन, और दुईनों जनें कस के भोजनव करत रहेंन..