मेरे 5 सजेशन है कृपया शॉर्ट में डिसकस करके बताए।।
1. धार्मिक अपमान पर संतों की आवाज़: आस्था और देवी-देवताओं के अपमान के ख़िलाफ़ प्रमुख संतों और धर्मगुरुओं को मंच पर लाकर स्पष्ट पक्ष रखने बोलिये। जिस धर्म से उनका जीवन यापन होता है कि वो चुप क्यों है ईश्वर के अपमान पर जो सोशल मीडिया पर नीले लोगो ने फैलाई है।।
2. सत्ता से जवाबदेही: हिंदुत्व और धार्मिक मुद्दों के दम पर सत्ता में आई सरकार से सबको यह सवाल पूछना कि सोशल मीडिया पर आस्था के अपमान पर ठोस कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
3. वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व: आप लोग पॉडकास्ट करिए, अपने पॉडकास्ट में आरक्षण से वंचित SC/ST नेताओं और विचारकों को आमंत्रित करना, जिससे वो अपने जाति में पॉपुलर हो सके ऐसे नेता बुलाए जो आरक्षण नहीं ले पा रहा है दलित होके।
4. माइक्रो-इन्फ्लुएंसर ट्रेनिंग: छोटे और उभरते कंटेंट क्रिएटर्स को तैयार करके अलग-अलग चैनलों व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बात रखने के लिए भेजना।
5. स्वतंत्र पॉडकास्ट ब्रांडिंग: खुद पॉडकास्ट करे जन-मुद्दों पर गहरी बहस और ज़मीनी पकड़ वाला एक मजबूत नैरेटिव सेट करे धर्मगुरु और sc st नेताओं को बुला के।
@neha_laldas@ThusSpokeDharma@talk2anuradha@ajeetbharti
@KreatelyMedia सुना है वहां के कुछ लोगों ने बताया है कि विरार ओर नालासोपारा मुंब्रा कुर्ला मस्जिद बंदर ये सब कुछ एरिया है मुंबई में जहां आपलोग नहीं जा पाते हो @mnsadhikrut
@VikingRagnarL@shiv94624869145 ऐसा है बाबा सही है अपने जगह पे. हम लोड क्यों ले ? इन बाकचोद कानून ने हाथ बांध रखा है नहीं तो सामान्य वर्ग अपना न्याय खुद कर सकता है। ये पार्टी कब सोचेंगे कि उसने जनरल को क्या दिया है, सिर्फ हम ही सोचे क्या ?
आरक्षण पर बहस तेज है, लेकिन ज़रा इस बच्चे को देखिए, माँ की गोद में कुपोषण से जूझता हुआ, दवा तक ठीक से नहीं मिल पा रही।
मुसहर समाज आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। सवाल सिर्फ आरक्षण का नहीं, बराबरी के अवसर और सामाजिक न्याय का है।
क्या हम यह सवाल नहीं पूछेंगे कि जिन समुदायों की स्थिति आज भी इतनी दयनीय है, उनके लिए व्यवस्था में पर्याप्त अवसर और प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है?
(पत्रकार महोदय का आभार, ये दृश्य हम सभी तक पहुँचाने के लिए)