अनुराग जी संविधान ने प्रोटेस्ट करने का अधिकार सबको दिया है साथ में उसका तरीका भी बताया है यह गुंडागर्दी गाड़ियों को जलाना तोड़फोड़ करना भारत विरोधी नारे लगाना भारत तेरे टुकड़े होंगे टुकड़े होंगे इंशाल्लाह इंशाल्लाह यह कहना कहां तक उचित है विरोध करो पर संविधान की मर्यादा में रहकर
अनुराग,
विरोध और असहमति की भी एक भाषा होती है . तमीज होती है . मर्यादा होती है . मुझे लगता है कि आप उन सीमाओं को तोड़कर कई बार 'बेलगाम ट्रोल' से मुकाबला करने लगते हैं .
विरोध किसी भी सीमा तक करिए लेकिन आपको ऐसी भाषा से बचना चाहिए . बाकी आप खुद समझदार हैं @anuragkashyap72
@premchand20189@savedemocracyI ऐसा कोई एक उदाहरण बताओ 1980 के बाद कोई व्यक्ति बीजेपी को छोड़ कर किसी दूसरी पार्टी में जा के कामयाब हुआ हो ना हुया ना होगा क्यों के बीजेपी को छोड़ हर पार्टी परिवारवाद से घिरी हुई है
उनके अपने पट्ठे फिट नहीं हो रहे वो दूसरों को क्या करेंगे