सांसद चन्द्रशेखर आजाद जी की वजह से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस व भाजपा के तलवे चाटने वाले दलित समाज के नेताओं को उनके समाज का कोई समर्थन प्राप्त नहीं होता
इसलिए बेचारे सभी बौखलाए रहते हैं चन्द्रशेखर आजाद से। इन नेताओं के पीछे न तो कोई जनाधार है और न इनकी पार्टी में इनकी कोई इज्जत है
इन्हें सिर्फ चन्द्रशेखर आजाद को टार्गेट करने के लिए ही विशेष तौर पर रखा गया है
याद रखो दलालों, चन्द्रशेखर आजाद को इस बहुजन समाज ने खुद तैयार किया है। तुम क्या, तुम्हारे जैसे हजार दलाल नेता भी चन्द्रशेखर आजाद को टार्गेट करेंगे, फिर भी कुछ उखाड़ नहीं पाओगे
@AdvRajendraPal
दलित लड़की से दुष्कर्म का प्रयास।
यूपी के सुल्तानपुर में सोनू तिवारी ने घर में घुसकर एक दलित लड़की से रेप का प्रयास किया। असफल होने पर उसने लड़की का गला घोंटकर हत्या करने का प्रयास किया।
स्थानीय जयसिंहपुर थाने ने FIR दर्ज करने से मना कर दिया। बाद में SP के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया। भाजपा के शासन में प्रदेश में दलित समुदाय की बहन-बेटियां भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं। ऊपर से जब पीड़ित दलित न्याय मांगने थाने जाते हैं, तो उन्हें दोहरे उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। दलितों के मामलों में प्रशासन पर पक्षपात के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।
इस घटना पर सभी हिंदू संगठन मौन क्यों हैं? क्या सिर्फ इसलिए कि आरोपी ब्राह्मण समुदाय से आता है? क्या इसी तथाकथित मेरिट के आगे सभी हिंदू संगठन नतमस्तक हो जाते हैं? इससे यह सवाल उठता है कि दलितों को हिंदू कहना क्या सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित है? हकीकत यह है कि सामाजिक भेदभाव की घटनाएं आज भी बड़ी संख्या में सामने आती हैं।
उम्मीद है कि SP महोदय के आदेश के बाद पुलिस-प्रशासन सोनू तिवारी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। पीड़िता को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए।
सहरानपुर में विजय पंडित नामक पुजारी 10 साल की दलित बच्ची से खेड़खानी के मामले में गिरफ्तार हुआ।
अब ब्राह्मण समाज के लोग "हवस के पुजारी" के समर्थन में जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं, हनुमान चालीसा पढ़ रहे हैं।
क्या राम और हनुमान पापी पुजारी की रक्षा करेंगे? हद है। दुनिया के किसी भी अन्य कोने में आप शायद ही ऐसा पाएंगे कि कोई समाज बच्ची पर गंदी नजर रखने वाले आरोपी के बचाव में अपने आराध्य की पूजा करे। यह सिर्फ भारत में ही संभव है। धन्य है ब्राह्मण समाज, तुम लोग क्या खूब तरीके से हिंदू धर्म का प्रचार कर रहे हो। दुनिया तुम्हारी उस जातिवादी एवं स्त्रीद्वेषी सड़ियल सोच पर लानत भेज रही है।
मनु-युग भले खत्म हो गया हो, लेकिन आज भी कुछ मनुवादी मानसिकता वाले लोगों को यही लगता है कि यदि कोई ब्राह्मण बच्ची के साथ छेड़खानी करे, तो उसे अपराध न माना जाए। भला दलितों की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वे बच्ची के साथ छेड़खानी करने वाले ब्राह्मण पुजारी की गिरफ्तारी करा दें? कानून भले इसे अपराध मानता हो, लेकिन उनकी मानसिकता में ब्राह्मण पुजारी का कोई दोष नहीं है।
इसीलिए वे पुलिस थाने और प्रशासनिक कार्यालयों के सामने मासूम बच्ची के साथ छेड़खानी के आरोपी "हवस के पुजारी" के समर्थन में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं और जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं। उन्हें आज भी यह भ्रम है कि राम और हनुमान उनके इस कृत्य का समर्थन करेंगे। न लाज है, न शर्म। इनके जैसे ब्राह्मण समुदाय के कुंठित लोग देश, धर्म एवं समाज को कलंकित करते हैं। घिन आती है ऐसी सोच पर, घिन आती है ऐसी मानसिकता पर।
माननीय न्यायालय द्वारा बार-बार अपने आदेशों और व्याख्याओं के माध्यम से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजातियों अत्याचार निवारण अधिनियम को कमजोर करने का काम किया जा रहा है। यह बेहद चिंताजनक और दुर्भावनापूर्ण है।
दिनांक 11 मई को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश में “सार्वजनिक दृष्टि” की शर्त लगाकर जातिसूचक गाली को अपराध की परिभाषा से बाहर किया गया। वहीं, कुछ महीनों पूर्व दिसंबर 2025 में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह कहा कि फोन पर 'जातिसूचक' गाली-गलौज किए जाने पर SC/ST एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होते, जो कि न्याय की मूल भावना के खिलाफ है।
मेरा सवाल है माननीय न्यायालय से- क्या अब दलितों का अपमान “लोकेशन” और “माध्यम” देखकर तय होगा? क्या चारदीवारी के भीतर या फोन पर किया गया जातीय अपमान अपराध नहीं माना जाएगा?
ऐसे फैसले यह संकेत देते हैं कि न्यायिक व्याख्या के जरिए इस सशक्त कानून के प्रभाव को सीमित किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में और अधिक कठिनाई उत्पन्न हो सकती है।
हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन संविधान और सामाजिक न्याय के मूल सिद्धांतों की रक्षा के लिए ऐसे फैसलों पर सवाल उठाना भी उतना ही आवश्यक है।हम इस संबंध में शीघ्र ही माननीय उच्चतम न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर करेंगे।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का “दुरुपयोग” हो रहा है, यह बात आए दिन कोई न कोई कहता दिखाई देता है। अभी @richaanirudh जी भी यही कह रही हैं।
दरअसल, यह शोषित-वंचित समाज को मिले कानूनी सुरक्षा कवच को बदनाम कर उसे कमजोर करने की साजिश है।
हमारा सवाल है रिचा अनिरुद्ध जी से कि ऐसा कौन सा कानून है, जिसके दुरुपयोग की शिकायतें नहीं हुई हैं?
सबसे बड़ा दुरुपयोग तो जाति, ऊँच-नीच और सामाजिक वर्चस्व का हुआ है, जिसने करोड़ों शोषित-वंचितों को हजारों साल अपमान, हिंसा और भेदभाव में जीने पर मजबूर किया। उस “दुरुपयोग” पर इतनी बेचैनी क्यों नहीं दिखाई देती?
दुरुपयोग तो राज्य की शक्ति का भी होता है, झूठे मुकदमे भी लगते हैं, निर्दोष लोग भी फँसते हैं। फिर क्या सारे कानून खत्म कर दिए जाएँ? क्या राज्य की व्यवस्था खत्म कर अराजकता को स्वीकार कर लिया जाए?
और वैसे भी, अगर किसी कानून का दुरुपयोग होता है, तो उसके खिलाफ मुकदमा करने और न्याय पाने का अधिकार हर व्यक्ति को है।
सच यह है कि समस्या कानून नहीं, बल्कि वह मानसिकता है, जिसने दलितों, आदिवासियों और वंचितों का बराबरी से जीना आज भी स्वीकार नहीं किया। इसलिए बार-बार SC/ST Act को निशाना बनाया जाता है, ताकि समाज में नफरत और भ्रम फैलाकर इसे कमजोर किया जा सके।
जय भीम! SC/ST Act जिंदाबाद!
बंदूक से ज़्यादा विचार घातक होते हैं, बंदूक देना आसान है किन्तु बुद्धि देना कठिन।
~ डॉ. भीमराव अम्बेडकर
डॉक्टर बी आर अंबेडकर जयंती की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन।
समता, करुणा और मानवता पर आधारित उनके विचार आज भी सामाजिक न्याय और समानता का मार्ग दिखाते हैं।
#SantRavidasJayanti
बाबासाहेब आंबेडकर का अपमान करने वाले आरोपी अनिल मिश्रा पर NSA लगाकर इसे जेल में डाले ये व्यक्ति पूरे प्रदेश का माहौल खराब कर रहा है।
#अनिल_मिश्रा_पर_NSA_लगाओ
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"भंगन-चमारी से पैदा नही हुए, हम नाथ समाज से है, हम भी दिखा देंगे"
यह वीडियो राजस्थान के दौसा का बताया जा रहा है जहां कुछ जातीय आतंकी खुलेआम दलित समाज के खिलाफ जातीय टिप्पणियां कर रहे हैं
@DausaPolice जल्द से जल्द इन आतंकियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करें, इनका सभ्य समाज में खुला घूमना बहुत हानिकारक है
@PoliceRajasthan@anil_aazad
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चितरंजन पांडे नामक यह जातिवादी व्यक्ति खुलेआम फेसबुक पर बाबासाहेब अम्बेडकर व उनके अनुयाइयों को गालियां दे रहा है
मैं @pratapgarhpol से निवेदन करता हूं कि ऐसे लोगों पर कानूनी शिकंजा कसें 🙏🙏
@Uppolice@dgpup@NCSC_GoI
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल में सरकारी स्कूल के 8 वर्षीय दलित छात्र के साथ हुई बर्बरता — न सिर्फ दलित विरोधी मानसिकता का घिनौना उदाहरण है, बल्कि पूरे समाज के विवेक पर कलंक है।
प्रधानाध्यापक और दो शिक्षकों ने दलित बच्चे को बार-बार पीटा, धमकाया और उसकी पैंट में बिच्छू डाल दिया!
सोचिए, एक मासूम बच्चा जिसने अभी जीवन की शुरुआत भी नहीं की — उसे जाति के नाम पर इतना दर्द दिया गया कि उसके कान से खून बह निकला।
यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, यह हमारे समाज के उस ज़हर की याद है जो अब तक खत्म नहीं हुआ है।
हम @CMOFFICEHP से माँग करते हैं कि —
1. तीनों आरोपियों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए।
2. पीड़ित बच्चे को सरकारी सुरक्षा, इलाज और मुआवजा दिया जाए।
3. घटना की स्वतंत्र जांच हो और दोषियों पर SC/ST Act के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
@SukhuSukhvinder
उत्तर प्रदेश के जिला अमेठी के फुरसतगंज थाना क्षेत्र के चकदहिरामऊ गांव में जातंकवादी ने दलित मजदूर हौसिला प्रसाद सरोज को अपनी मजदूरी के पैसे मांगने पर इस बेरहमी से पीटा कि कई दिनों तक इलाज चलने के बाद कल उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना अत्यंत दुखद, पीड़ादायक और दण्डनीय है।
परिजनों के अनुसार, 26 अक्तूबर को हौसिला प्रसाद मजदूरी के पैसे मांगने आरोपी के घर गए, तो जातंकवादी ने उन्हें बुरी तरह पीटकर घायल अवस्था में घर के पास फेंक दिया।
गंभीर हालत में उन्हें सीएचसी फुरसतगंज से रायबरेली जिला अस्पताल और फिर लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। इलाज के बाद बृहस्पतिवार को उन्हें घर भेजा गया, लेकिन तबीयत बिगड़ती रही और शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने पहले मामूली धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की, जिससे आरोपी को बचाने की कोशिश की गई। यह पुलिस की लापरवाही और जातिवादी मानसिकता को उजागर करता है।
हम शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकसंतप्त परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि —
1. आरोपी पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और हत्या की कठोर धाराएँ लगाई जाएँ।
2. पीड़ित परिवार को 50 लाख रूपए का मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी और सुरक्षा दी जाए।
3. शुरुआत में हल्की धाराएँ लगाने वाले पुलिस अधिकारियों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जाए।
@CMOfficeUP@myogiadityanath