दिनांक-28/01/2026, समय- 03:00, दिल्ली।
गगन यादव- जय श्री कृष्ण भैया।
अखिलेश यादव- ए तुम हमसे बड़े नेता हो गए?
गगन यादव- नहीं भैया
अखिलेश यादव- अब तुम यादवों के नेता बनोगे?
गगन यादव- ऐसा नहीं है भैया, मेरी बात तो सुनो आप।
अखिलेश यादव- हमे कुछ नहीं सुनना, तुम पुराने RSS के कार्यकर्ता हो और BJP के संपर्क में लंबे समय से हो।
गगन यादव- नहीं भैया, ये ग़लत जानकारी है आपको।
अखिलेश यादव- हमे सब पता है।
गगन यादव- एक बार मुझे सबूत के साथ अपनी सफ़ाई पेश करने का मौक़ा दो आप, सारी ग़लत फ़हमियाँ दूर हो जायेंगी।
अखिलेश यादव- (कमरे में मौजूद 40-50 समाजवादी कार्यकर्ताओं से) ए सुनो सभी ध्यान से, ऐसे लोगो से सतर्क रहना, ये हमे तोड़ने आए हैं।
गगन यादव- ऐसा मत कहो भैया, मोहब्बत है आपसे।
अखिलेश यादव- कोई ज़रूरत नहीं हमे इस मोहब्बत की।
गगन यादव- भैया एक बार सेवा का मौक़ा दो, मैंने पिछले 7 सालो से सिर्फ़ आपको मज़बूत करने के लिए मेहनत करी है, आप समझ क्यो नहीं रहे हैं।
अखिलेश यादव- ए सुनो (security), इसकी एंट्री बंद करदो।
गगन यादव- ये ग़लत हो रहा है भैया, हमसे आप खून माँगोगे तो वो भी दे देंगे, एक बार आदेश करिए।
अखिलेश यादव- ए लेजाओ इसे और अपने साथियों को भी अपने साथ लेकर जाओ।
वहाँ से नम आँखो के साथ जाते-जाते मैं अपने नेता के चरण स्पर्श करने के लिए झुखा तो मेरे नेता ने अपने कदम पीछे कर लिए, बस उस दिन से हमारे रास्ते अलग हो गए, इससे ज़्यादा बेइज़्ज़ती नहीं करवा पाऊँगा राजनीति के चक्कर में, अखिलेश जी जैसे बड़े नेता को ऐसा व्यवहार सबके सामने नहीं करना चाहिए था, अकेले में डाट भी देते तो महसूस नहीं होता और जिस दिन समाजवादियों ने यह बात साबित करदी की गगन यादव RSS और BJP के संपर्क में कभी रहा था तो मैं उसी दिन राजनीति का फितूर अपने दिमाग से निकाल दूँगा और अपना कार्यक्षेत्र बदल दूँगा।
मेरा गुनाह सिर्फ इतना है की मैं उत्तरप्रदेश का यादव हूँ और ज़मीनी संघर्ष करके राजनीति में कदम रखना चाहता हूँ।
समाजवादियों से मेरा कभी कोई मनमुटाव नहीं रहेगा, आप सबके द्वारा दिए गए प्यार का मैं ताउम्र आभारी रहूँगा, बिना किसी पद के मुझे बहुत सम्मान मिला, शुक्रिया। @yadavakhilesh