सर्वण् समाज की महान विभूति जिन्होंने नअपने प्राणो की आहुति दी 1990 मंडल आयोग के विरोध मै
तब से लेकर आज तक कुछ नही बदला
केवल सरकार जरुरु बदल गयी देश को जातियों धर्म मै तोड़ने वाली
उसका सबसे बड़ा कारण देश की सडी हुई न्याय व्यवस्था
अजीत भाई ने मोदी एक्ट के खिलाफ सभी प्रोफेसरों से आवाज उठाने की अपील की है।
मुद्दा सिर्फ किसी एक प्रोफेसर का नहीं है।
आज अगर परीक्षा में नियम लागू करने वाले शिक्षक ही कानून की धाराओं के डर में रहेंगे, तो कल कोई प्रोफेसर नकल रोकने से पहले दस बार सोचेगा।
शिक्षकों को भी अपनी आवाज उठानी होगी।
कक्षा और परीक्षा में नियम लागू करना अपराध नहीं बनना चाहिए। 🤬
तहसीन पूनावाला का क्या दोष है? अनुमति दी जाती है, फिर एक दिन पहले हटा ली जाती है। स्पष्ट है कि आप यदि तिलचट्टे हैं तो सरकार आपके देह की मालिश के लिए पंचकर्मा करने को तैयार रहेगी, परंतु आप @tehseenp हैं या सवर्ण हैं तो आंदोलन हेतु आपको स्थान तक नहीं मिलेगा।
तहसीन को दिल्ली पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है क्योंकि E20 से ले कर सत्य निकेतन में बच्चों की मृत्यु पर वो मुखरता से बोल रहे हैं। सरकार चाहे जितना प्रयास कर ले, जितने असंवैधानिक कार्य करे, सबका अंत निश्चित है।
यह घमंड टूटेगा और हम तोड़ेंगे।
प्रतिभा दमन का एक नमूना -
जिस IIT बांबे के प्रोफेसर पर SC ST एक्ट लगा उसकी अचीवमेंट्स तो देखिए। अवॉर्ड देखिए,
अब बताइए क्या ये देश कभी विकसित हो सकेगा?
@PMOIndia
तिवारी जी की बेटी से कुछ गुंडे गाली-गलौज, छेड़खानी कर रहे थे, माँ ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट करने लगे।
बच्चियों ने अपने मामा प्रदीप द्विवेदी को बुलाया तो विशाल पाल और विशाल पासी के साथ अन्य दर्जन भर गुंडों ने उन्हें बेरहमी से मारकर अधमरा कर दिया। प्रदीप द्विवेदी हॉस्पिटल में भर्ती हैं। पूरा परिवार डरा हुआ है।
तिवारी जी बेहद गरीब परिवार से हैं। उनकी बच्चियाँ अब पढ़ने जाने से भी डर रही हैं। मैं परिवार के संपर्क में हूं लेकिन कैसे मदद करूँ? ये उत्पीड़न और अत्याचार नहीं तो क्या है?
मामला UP के प्रयागराज के नैनी थाना का।
यदि आप स्वयं लड़ नहीं सकते, तो उनका सहयोग कीजिये जो आपके और आपके बच्चों के भविष्य हेतु लड़ रहे हैं,
और यदि वह भी संभव ना हो तो कम से कम ऐसे लोगों का विरोध कभी ना करें।
आपकी जय हो
@AshwiniUpadhyay
SCSTAct का भयानक रूप है ये। लोग बहुत ध्यान से कोई प्रॉपर्टी खरीदे। अपना मकान किराए पर दे।लोगों को नौकरी पर रखे।वरना आपको ऐसे दिन देखने को मिल जायेगे।
आप खुद देखिए..कैसे एक व्यापारी अपना घर बेचने को मजबूर हो गया फर्जी SCSTAct से डर!
इस काले कानून को जल्द से जल्द खत्म किया जाय।
तीस हजारी के अधिवक्ता के जीजा जी मिसिंग हैं। SHO FIR नहीं कर रहे
कथित कारण: DU Election में व्यस्तता।
हमारी टीम में 400 अधिवक्ता है FIR कराने हम कब आए?
@DcpNorthDelhi@DelhiPolice@CPDelhi
ये IIT बांबे की नोटिस है।
एक कोटे का व्यक्ति IIT में एडमिशन लेने के बाद क्वेश्चन पेपर Chatgpt में अपलोड करके सॉल्व कर रहा था। नक़ल को रोकने के लिए एक अनरिजर्व्ड प्रोफ़ेसर ने उसे टोंका, तो उसने आत्महत्या कर ली! अब प्रोफेसर साहब SC ST एक्ट का एंगल बनाया जा रहा है।
WTF!!
पूरा देश जानना चाहता है
बेटियों के सरकारी स्कूल के अंदर बनी अवैध मस्जिद वजीरपुर जे जे कॉलोनी कब हटेगी ?
कोर्ट का ऑर्डर हुए भी एक साल हो गया
@LtGovDelhi@gupta_rekha@MCD_Delhi
उत्तर प्रदेश के ललितपुर के सिलावन गांव के रहने वाले विष्णु तिवारी को रेप और SC/ST एक्ट के मामले में करीब 20 साल जेल में रहने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। विष्णु तिवारी के मुताबिक, साल 2000 में जमीन के विवाद को लेकर पड़ोसी परिवार से झगड़ा हुआ था। इसके बाद उन पर मारपीट, SC/ST एक्ट और पड़ोसी की बहू से रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया। वर्ष 2003 में ललितपुर की अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसके बाद उन्हें आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
विष्णु तिवारी का दावा है कि मुकदमे के दौरान उनके परिवार की करीब 5 एकड़ जमीन बिक गई और परिवार पूरी तरह बिखर गया। जेल में रहने के दौरान उनके पिता की 2013 में मौत हो गई। इसके बाद 2014 में एक भाई और 2015 में मां की मौत हो गई। 2017 में एक और भाई की मौत हो गई। विष्णु तिवारी का कहना है कि वह 20 साल जेल में रहने के कारण अपने माता-पिता और भाइयों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके और न ही उनकी अर्थी को कंधा दे पाए। एक भाई परिवार में लगातार हुई मौतों के बाद सदमे में मानसिक रूप से बीमार हो गया।
विष्णु के मामले में 2017 में एक NGO की टीम को जानकारी मिली, जिसके बाद एक वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका मुकदमा लड़ा। 28 जनवरी 2021 को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष ने दलील दी कि रेप का आरोप मेडिकल साक्ष्यों से पुष्ट नहीं होता और FIR भी घटना के तीन दिन बाद दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास समेत मामले के कई पहलुओं पर गौर करते हुए विष्णु तिवारी को दोषमुक्त कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 3 मार्च 2021 को विष्णु तिवारी को आगरा सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। करीब 20 साल बाद जब वह अपने गांव पहुंचे तो उनका पुश्तैनी घर जर्जर हालत में था और परिवार के अधिकांश सदस्य दुनिया में नहीं थे। रिहाई के बाद भी उन्हें रोजगार पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विष्णु का कहना है कि लोग उनके 20 साल जेल में रहने की बात जानने के बाद उन्हें काम पर रखने से बचते हैं और वह फिलहाल लखनऊ में खाना बनाने का काम कर रहे है।
विष्णु तिवारी का मामला लंबे समय तक जेल में रहने और बाद में अदालत से बरी होने के बाद उनके परिवार पर पड़े असर को लेकर चर्चा में रहा है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद वह जेल से तो बाहर आ गए, लेकिन उनके मुताबिक 20 साल की कैद के दौरान उनका परिवार और घर दोनों उजड़ चुके थे। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार को जांच के आदेश दिए थे और विष्णु तिवारी को मुआवजा देने की सिफारिश की थी।
लोग कहते है,जातिया पंडितों ने बनाई है ,
तो जाती प्रमाणपत्र तहसील में क्यों मिलता है ,पंडितजी के घर से क्यों नहीं मिलता ..?
पूछता है सवर्ण समाज ..?
आरक्षण हटाओ देश बचाओ ...
जवाब दे अगर मेरी बात झूठ हैं तो ?
जब तक असीमित शक्तियों वाले बेलगाम वक़्फ़ एक्ट और SC/ST एक्ट हैं
तब तक न ज़मीन बचेगी, न इज़्ज़त बचेगी, और अंत में सिर्फ़ मरेगा या जेल का रास्ता बचेगा!
19 सितम्बर को हर साल हम इस दिन को यादगार बनाते थे और आरक्षण के विरोध में शाहिद हुए भाइयों और बहनों को याद करते थे। ट्रेड चलवाते थे। कार्यक्रम करते थे।
लेकिन अफसोस अब पहिले जैसे लोग नहीं रह गए।अब सिर्फ नाम और दिखावे के आरक्षण विरोधी बचे है यहाँ।
सभी भाइयों के चरणों में नमन।🙏💐
20 साल... एक बेकसूर की पूरी जवानी जेल में बर्बाद हो गई और सिस्टम अब भी सोया है?
@India_NHRC तुरंत सरकार को मजबूर करे कि #VishnuTiwari को भारी मुआवज़ा दिया जाए.
जो साल छीने गए वो वापस नहीं आएंगे, पर सम्मान और गुज़र-बसर बहाल सरकार का फर्ज है. न्याय में देरी भी अपराध है..इस दिशा में काम कर रहे किसी वकील भाई से निवेदन है की विष्णु तिवारी की मदद की जाये और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के सामने के सामने इस मामले को उठाये .
@indSupremeCourt@BhaiPreetSingh@barcouncilindia
अपने देश में अलग ही बवाल चल रहा है।
तीस परसेंट वाले को डॉक्टर इंजीनियर बना दो..
नब्बे प्रतिशत वाले पे Sc. St. Ugc. लगा के क्रिमिनल बना दो।
फिर पूछो सड़क जल्दी क्यो टूटी।पुल 90% पे क्यों बना।मरीज अस्पताल गया था फिर ऊपर कैसे चला गया?
कबाड़खाना बना दो सब मिल के…?