उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर के गांधीग्राम में विक्की बाल्मीकि पर पुलिसिया बर्बरता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में दलितों की जान और सम्मान दोनों ही खतरे में हैं। जब खुद कानून के रखवाले ही अत्याचार के पर्याय बन जाएं, तो आमजन किससे न्याय की उम्मीद करे? ट्रेनी दरोगा और उसके साथियों ने घर में घुसकर विक्की को बाल पकड़कर घसीटा, बेहरमी से पीटा और उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी।यह घटना अत्यंत पीड़ादायक और निंदनीय है।
आज देश में दलितों के खिलाफ हिंसा अपने चरम पर है। कभी हाथरस में बेटी को जला दिया जाता है, कभी उन्नाव में दबंगों के जुल्म देखने को मिलते हैं, और अब कानपुर में कानून के रक्षक ही भक्षक बन गए। लेकिन सरकार चुप है, प्रशासन चुप है, मानो दलितों की जान की कोई कीमत ही नहीं! हम यह अन्याय अब और नहीं सहेंगे।
@kanpurnagarpol दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार कर उन पर SC/ST एक्ट व हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जाए। पीड़ित परिवार को 50 लाख मुआवजा मिले और घायल युवक के समुचित इलाज की व्यवस्था हो।
एक बात और सरकार ने अब भी आंख मूंदे रखी, तो हम न्याय छीनकर लेंगे- चाहे उसकी कीमत कुछ भी हो !
दिल्ली विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग के इस नेता को उनकी ईमानदारी का इनाम नरेंद्र मोदी जरूर देंगे!
सत्ता की गोद में बैठी निष्पक्षता का ऐसा नजारा दुर्लभ है।
#DelhiElectionResults
आज लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान मान्यवर साहब कांशीराम जी के नारे 'जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' को याद करते हुए अपनी बात रखी।
#BudgetSession2025
Propaganda : Modi has made India vishwaguru, videsh mai danka baj raha hai
Reality : Passport ranking continuously dropping & Indian Nationals getting sent back caged like animals 😑
#Deportation
राजस्थान के जिला धौलपुर की नगर परिषद कार्यालय के चैम्बर में सफाई कर्मचारी प्रदेशाध्यक्ष मोहन सिंह थनवार जी की संदिग्ध हत्या सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि दलित समाज को दबाने की सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। जो भी दलितों के अधिकारों की बात करता है, उसे या तो प्रताड़ित किया जाता है या उसकी हत्या कर दी जाती है। यह कोई पहली घटना नहीं है— हर दिन देश में दलितों पर हमले हो रहे हैं, और सरकार मूकदर्शक बनी बैठी है। क्या दलितों की जान की कोई कीमत नहीं? क्या न्याय सिर्फ विशेष वर्गों के लिए है?
मोहन सिंह थनवार जी सफाई कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। उनकी हत्या यह साबित करती है कि दलित समाज की आवाज को दबाने के लिए किस हद तक साजिशें रची जा रही हैं।
हम सरकार से दो टूक मांग करते हैं:
1. इस हत्या की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच (सीबीआई या विशेष जांच आयोग) कर दोषियों को फांसी तक पहुंचाया जाए।
2. देशभर में सफाई कर्मचारियों और दलित समाज के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने के लिए ठोस और सख्त कानून तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं।
4. सरकार दलित उत्पीड़न के हर मामले में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए और दोषियों को त्वरित न्याय दिलाए।
अगर सरकार अब भी नहीं जागी, तो दलित समाज चुप नहीं बैठेगा!
हम चेतावनी देते हैं कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो पूरा दलित समाज सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ेगा। यह लड़ाई अब सिर्फ मोहन सिंह थनवार जी के न्याय की नहीं, बल्कि हर दलित की सुरक्षा, सम्मान और अस्तित्व की है।
अगर सरकार दलितों की रक्षा नहीं कर सकती, तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं!
"अब न झुकेंगे, न रुकेंगे—हम अपना हक छीनकर रहेंगे!"
जय भीम! जय संविधान!
राजस्थान के जिला दौसा के ग्राम चांदसेन में बैरवा समाज की बारात में डीजे बजाने पर योजनाबद्ध तरीके से किया गया हमला न केवल जघन्य अपराध है, बल्कि समाज में गहरी जड़ें जमा चुके जातिवाद और प्रशासनिक निष्क्रियता का क्रूर प्रमाण भी है। घर में घुसकर महिलाओं-बच्चों पर हमला करना, संपत्ति तोड़फोड़ करना और खुलेआम धमकियां देना इस बात का सबूत है कि असामाजिक तत्वों के मन में कानून का कोई भय नहीं है।
यह तब हो रहा है जब राजस्थान के उपमुख्यमंत्री @DrPremBairwa ,खुद बैरवा समाज से आते हैं।तब तो यह स्थिति बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है। क्या यह उपमुख्यमंत्री सिर्फ दिखावे के लिए है? अगर उपमुख्यमंत्री के समाज के लोग ही सुरक्षित नहीं हैं,तो फिर सरकार के दावों पर कैसे भरोसा किया जाए? क्या समाज ने इन्हें इसीलिए नेता चुना था?
प्रशासन की लापरवाही जगजाहिर है—
1. पहली बार विवाद हुआ, पुलिस आई, लेकिन अपराधियों को छोड़कर चली गई—यह किसके दबाव में हुआ?
2. रात में असामाजिक तत्वों ने घर में घुसकर जानलेवा हमला किया, लेकिन पुलिस गायब रही—क्यों?
3. आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं, और सरकार मौन है—क्या यह जातीय भेदभाव नहीं?
यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक पैटर्न है—जातिगत हमले बढ़ते जा रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।
हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि -
1. इस घटना के सभी दोषियों को अविलंब गिरफ्तार कर उन पर सख्त धाराओं में मुकदमा चलाया जाए।
2. पीड़ित परिवार को सरकार मुआवजा और पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे।
3. जातीय हिंसा को रोकने के लिए सरकार ठोस नीति बनाए और तुरंत प्रभाव से लागू करे।
अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो हम सड़कों पर उतरकर बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। सरकार और प्रशासन को यह समझ लेना चाहिए कि अब सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा— अब न्याय होगा या न्याय के लिए संघर्ष!
@deshbhakat1950 glti inki nhi hai ..glti sc st walo ki hi hai ..jab jante hai ki is dharm mei unki izzat ek janwar se bhi kum hai fir bhi lge huye hai inke dharm mei khud ko hindu sabit krne mei ..to bhai jab khud hi self respect nhi h to fir ye sab kyu izzat denge sc st walo ko
अयोध्या की बेटी के लिए चंद्रशेखर आज़ाद का प्रोटेस्ट!
नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने अयोध्या में नाबालिग के साथ हुई घटना को लेकर जताई पीड़ा, बोले: ये सिर्फ मेरी नहीं, पूरी देश की पीड़ा है. यूपी सरकार पर बोला हमला.
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