सबै मेरो मेरो भनिकन अघी जीवित छँदा,
स्वयं हाँस्थ्यो हेरी जुन विभव वा दौलत सदा ।
पछी उस्को देखी क्षणिक मनको अन्तिम गति, उही हाँस्यो 'तेरो अब कति छ' भन्दै खितिखिति
।। #तरुण#तपसी
चाणक्य कहते हैं की
नदीनाञ्च नखीनाञ्च श्रृङ्गीणां शस्त्रपाणिनाम् ।
विश्वासो नैव कर्त्तव्यः स्त्रीषु राजकुलेषु च ॥
नदियों का, नखवालों (व्याघ्र-सिंह आदि) का, सींगवालों का, हाथ में शस्त्र लिए हुए तथा राजा से निकट रहने वालों का विश्वास नहीं करना चाहिए। १५ ।🌾🌾