प्रधानमंत्री जी थोड़ी बहुत भी शर्म बची हो तो ऐसे लोगों के लिए कुछ करिए......ये आँसू देखना बहुत दर्दनाक है.....सिर्फ अपने कपड़ों पर ही ध्यान मत दीजिए.....जो कुछ भी इस देश में हो रहा चाहे वो मणिपुर हो या इस प्रकार लोगों का महंगाई से तड़पना या कोई और .....कुछ करिए.....@narendramodi
मध्य प्रदेश की स्मार्ट सिटी इंदौर में 40 करोड़ रुपए में बनी सड़क फट गई।
इस सड़क को बने अभी साल भर ही हुआ था कि BJP का हवा-हवाई 'विकास' जनता के सामने बह गया।
देखिए- 'करप्शन का मुजस्समा' 👇
आरएसएस को उपद्रवी संगठन मानते थे डॉ राजेंद्र प्रसाद
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 14 मई, 1948 को सरदार पटेल को पत्र लिखकर चिंता जताई:
"दूसरी कई ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में मैं आपसे बात करना चाहता हूँ उनमें से एक है दिल्ली की स्थिति. यहां की स्थिति बड़ी तेजी से बिग���़ रही है और लोग मुझसे कहते हैं कि न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फिर से खुद को संगठित कर रहा है या एक बार फिर खुले में आ रहा है.
दरअसल वह कभी बिखेरा ही नहीं गया है, बल्कि चारों तरफ विशेष रूप से निराश्रितों (पाकिस्तान से आए शरणार्थी) में कानाफूसी और अंदरखाने आंदोलन भी चल रहा है. किसी भी सम�� उपद्रव फूट सकता है. कुछ घटनाएं तो हो ही चुकी हैं.
लगातार यह अफ़वाह सुनाई दे रही है कि 15 जून की तारीख किसी बड़ी घटना के लिए नियत की गई है और इसकी वजह से लोगों में घबराहट और भय बढ़ रहा है. यह भय है कि उस दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कुछ कर सकता है. मुझसे कहा गया है कि आरएसएस की उस दिन कोई उपद्रव करने की योजना है.
उनके पास अनेक लोग ऐसे हैं जो मुसलमानों की पोशाक पहनते हैं और मुसलमान जैसे दिखते हैं. यह लोग हिंदुओं पर आक्रमण करके गड़बड़ी पैदा करेंगे और इस प्रकार हिंदुओं को भड़काएंगे. इसी प्रकार उनमें से कुछ ऐसे हिंदू होंगे जो मुसलमानों पर आक्रमण करेंगे और मुसलमानों को भड़काएंगे.
हिंदू और मुसलमानों में इस प्रकार उपद्रव खड़ा करने कापरिणाम भयंकर सांप्रदायिक विस्फोट होगा. ऐसे संवेदनशील समय में दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल का तबादला कर दिया गया है, जबकि वह दिल्ली क�� जानते हैं और स्थिति पर अंकुश लगा सकते हैं.
इससे हालात और उलझ जाएंगे. खासकर के इसलिए कि उनका उत्तराधिकारी दिल्ली के लिए नया होगा और पंजाबी होगा. मुझे बताया गया है कि सांप्रदायिक मामलों में उनकी अच्छी ख्याति नहीं है. यह सारी जानकारी में आपको इसलिए दे रहा हूं कि आप इसका उचित मूल्यांकन करें.'
BIHAR RIGGING | 128 seats out of the 202 won by the NDA came purely from SIR-based voter deletions.
We analysed the voter deletion data published by the ECI as ordered by the Supreme Court and compared it with the victory margins in each constituency. The pattern is unmistakable: genuine, living voters were removed arbitrarily under SIR.
SIR was supposed to identify and remove illegal immigrants from Bangladesh, Myanmar and Nepal. But in the entire dataset released by the ECI, not even one illegal immigrant was found.
What actually happened was a wholesale purge in the name of SIR to remove poor and vulnerable voters who were suffering under the NDA. After striking them off the rolls, they prevented whoever was left from voting and then walked away with a fully stage-managed election.
This is the “mother of democracy” for you. If we do not realise the game plan now, BJP will quietly remove each one of us from the list, add dummy Brazilians in our place, cast votes on their behalf and keep winning elections forever.
गांधी ने 1942 में नेहरू को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था और ऐसा शख्स कहा 'जो मेरे ना रहने पर.. मेरी भाषा बोलेगा'। ऐसा ही हुआ भी।
1948 की जनवरी में जब गोड़से ने गोली चला कर देश के सबसे बड़े अभिभावक को मौत की नींद सुला दिया तब नेहरू ने दुख में डूबकर भी गांधी की ही भाषा बोली।
उन्होंने कहा था- ' हमें याद रखना है कि हम में से किसी को गुस्से में कोई कार्रवाई नहीं करनी है। हमें सशक्त और संकल्पवान लोगों की तरह व्यवहार करना चाहिए।सभी खतरों का सामना करने के संकल्प के साथ, हमारे महान गुरू और महान नेता द्वारा दिए गए आदेश को पूरा करने के संकल्प के साथ और हमेशा यह ध्यान रखते हुए कि उनकी आत्मा हमें देख रही है, तो उसके ल���ए इससे अधिक कष्टदायक कुछ नहीं होगा कि हमें क्षुद्र व्यवहार या हिंसा में लिप्त देखें।'
वैसे ऐसा नहीं कि नेहरू किसी कट्टरपंथी की तरह गांधी के वचनों पर चलते रहे हों। परिस्थितियों के हिसाब से उन्होंने लचकदार रवैया भी अपनाया, लेकिन गांधीवाद से उनकी आस्था कभी डिगी नहीं। यूं भी नहीं कि गांधी इस बात को जानते नहीं थे ल��किन उन्हें विश्वास था कि नए युग की नवीन चुनौतियों के बीच प्रयोग करते नेहरू कभी उन मूल सिद्धातों को तिलांजलि नहीं देंगे जिन पर चलते हुए गांधी ने जान दे दी।
नेहरू पक्के राष्ट्रवादी थे लेकिन उनके राष्ट्रवादी दर्शन में किसी को गद्दार ठहराने के लिए जगह नहीं थी। दो धुरी में बंटे विश्व के बीच कमज़ोर भारत के मज़बूत नेता ने किसी एक पक्ष का पल्लू पकड़कर खुद को सुरक्षित नहीं कर लिया, बल्कि वो सोवियत ��े मदद पाकर भी ताल ठोककर अलग खड़े रहने का साहस जुटा सकनेवाले नेता थे। अगर सनातन धर्म और भारत की उदार परंपरा का कोई सच्चा शिष्य था तो वो भी नेहरू थे। उन्होंने धर्म के मामले में सभी को स्वीकारने और किसी को भी ना नकारने की नीति ना सिर्फ अपनाई बल्कि कई बार अपने दल के नेताओं से इस मुद्दे पर टकराव तक मोल ले लिया। वो ही हो स��ते थे जो अपने सूटकेस में गीता की प्रति और संयुक्त राष्ट्र संघ का चार्टर साथ लेकर चलते थे।
नेहरू का चारित्रिक गुण ही था कि माउंटबेटन से दोस्ती के बावजूद उन्होंने भारत को कई हिस्सों में तोड़ने की उनकी रणनीति का मुंहतोड़ जवाब दिया। बाद में 3 जून की योजना नेहरू के दबाव के बाद ही बनी, लेकिन गांधी का सच्चा प्रतिनिधि जाते हुए अंग्रेज़ों को गांधी की भाषा में दोस्त कहता रहा, और हां वो एडविना की मौत के बाद उन्हें संसद में श्रद्धांजलि देने से नहीं चूका। अहिंसा के सिद्धांत को मानने लेकिन परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र के स्वप्न की तरफ पहला कदम उठानेवाले नेता भी नेहरू ही थे। आज़ादी से पहले हाथ से कपड़े बुननेवाले नेहरू ने आज़ादी के बाद उन्हीं हाथों से मशीनों और बांधों का उद्घाटन भी किया।
मज़बूत विपक्ष और आज़ाद प्रेस के पक्षधर नेहरू ने नवंबर 1937 में अपने खिलाफ मॉडर्न टाइम्स में लेख लिख दिया।चाणक्य के छद्मनाम से ‘द राष्ट्रपति’ नाम के लेख में उन्होंने पाठकों को नेहरू के तानाशाही रवैये पर चेताया। उन्होंने लिखा कि नेहरू को इतना मज़बूत ना होने दें कि वो सीज़र जैसा हो जाए। खुद मशहूर कार्टूनिस्ट शंकर याद करते हैं कि कैसे वो अपने पॉलिटिकल कार्टून में नेहरू की खिल्ली नहीं उड़ाते थे लेकिन एक मुलाकात में भारत के पहले प्रधानमंत्री (खुद को प्रधान सेवक कहनेवाले) ने शं���र से कहा था- मुझे भी मत बख्शना। बाद में शंकर ने ‘डोंट स्पेयर मी, शंकर' नाम से नेहरू पर जमकर तंज कसे। नेहरू हर आवाज़ के सुने जाने को लेकर कितने आग्रही थे इस बात का अनुमान लगाइए कि संघ पर लगे प्रतिबंध को भी उन्होंने हटाया। हां, गोलवलकर को चिट्ठी लिखकर साफ कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनका संगठन संविधान में निहित सिद्धातों को मान रहा है। ये नेहरू थे जो हमेशा चाहते थे कि लोहिया ��ुनाव में जीतकर हमेशा संसद में पहुंचें ताकि सरकार के खिलाफ एक सशक्त आलोचना होती रहे।
नेहरू के पास भारत नाम के नए बगीचे को खूबसूरत बनाने का महती कार्य था। उन्हें हर तरह के फूल खिलाने थे। इसमें उनकी पसंद और नापसंद मायने नहीं रखती थी। एक व्यक्ति जितने प्रयास कर सकता था वो करते रहे। उनके पास कोई बनी -बनाई लीक नहीं थी जिसका अनुसरण करना हो। कहा भी जाता है कि - लीक लीक तीनों चलें कायर, कूत,कपूत, बिना लीक तीनों चलें शायर, सिंह, सपूत। नेहरू सिंह ही साबित हुए।
🇮🇳🗽 न्यूयॉर्क में गूंजे नेहरू के शब्द :
📍नवनिर्वाचित न्यूयॉर्क मेयर ज़ोहरान ममदानी ने अपने संबोधन में पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद करते हुए कहा :
“मैं जवाहरलाल नेहरू के शब्दों क��� याद करता हूँ
इतिहास में ऐसा क्षण बहुत कम आता है जब हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ाते हैं,
जब एक युग का अंत होता है और एक राष्ट्र की आत्मा को अभिव्यक्ति मिलती है।
आज रात हम पुराने से नए की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।”
#ZohranMamdani #NewYork #JawaharlalNehru #IndiaUS #HistoricMoment
𝐖𝐡𝐚𝐭 𝐢𝐬 𝐚 𝐁𝐫𝐚𝐳𝐢𝐥𝐢𝐚𝐧 𝐰𝐨𝐦𝐚𝐧 𝐝𝐨𝐢𝐧𝐠 𝐨𝐧 𝐇𝐚𝐫𝐲𝐚𝐧𝐚'𝐬 𝐞𝐥𝐞𝐜𝐭𝐨𝐫𝐚𝐥 𝐥𝐢𝐬𝐭?
❓ Who is this lady?
❓ How old is she?
❓ Where is she from?
She voted 22 times in Haryana, across 10 different booths in the state, using multiple names: Seema, Sweety, Rashmi, etc.
This suggests a centralised operation, similar to Aland and Mahadevapura.
What's shocking is that she's reportedly from Brazil - a Brazilian model, to be specific. She's one of the 25 lakh such records in Haryana, which further supports the existence of a centralised operation.
❓ The big question remains: what is a Brazilian woman doing on Haryana's electoral list?
There's clearly a reason behind it.
: LoP Shri @RahulGandhi
📍 Delhi
JNU के गलियारों में फिर से विचारों की गूंज के साथ चुनावी बिगुल बज चुका हैं. हमने पहला कदम रख दिया है….
लड़ेंगे और जीतेंगे
इंक़लाब ज़िंदाबाद ✊
#NSUI4JNU#VIKASH4JNUSU
केरल के आनंदू अजी ने आत्महत्या से पहले अपने ‘नोट’ में सलाह दी है कि :
‘RSS के किसी भी मेंबर से कभी दोस्ती मत करो. चाहे वो तुम्हारे परिवार का ही क्यों ना हो. तुम्हारे पिता, भाई या ��ेटा ही क्यों ना हो. उनसे अपने रिलेशंस खत्म कर लो. उनके अंदर बहुत जहर भरा हुआ है.’
आगे लिखा कि ‘मैंने वह संगठन छोड़ दिया है इसलिए खुलकर बोल पा रहा हूं. वे कई बच्चों का यौन और शारीरिक शोषण करते हैं. मुझे पता है कि मेरी इन बातों का कोई यकीन नहीं करेगा क्योंकि मेरे पास सबूत नहीं है. लेकिन मेरा जीवन ही मेरा सबूत है. मैं नहीं चाहता कि दुनिया के किसी और बच्चे को वो सब सहन करना पड़े जो मैंने सहा है.’
और सचमुच पूरा मीडिया ग़ुलामी के सन्नाटे में है.
जब मैं छोटा था, तो मेरी दादी कहती थी कि उस मोहल्ले के पार्क में मत जाना- वहां RSS की शाखा लगती है ।
मैं पूछता था कि क्यों नहीं जाना, तो दादी कहती थी कि वो बच्चों को खराब कर देते हैं। यह बात मुझे कल समझ में आई कि आखिर वहां क्या होता है।
��सलिए अगर हम आनंदु अजी और ऐसे लाखों बच्चों को न्याय दिलाना चाहते हैं, तो हमें इस संगठन को एक्सपोज करना होगा।
RSS की जांच होनी चाहिए और आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि समाज में इस तरह की संस्था चलाने वालों के लिए उदाहरण बन जाए।
: AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera जी
📍 दिल्ली
'संस्कार' की आड़ में RSS कब तक अपराध छिपाएगा??
आईट�� प्रोफेशनल आनंदु अजी की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है 👇🏻
उनकी आखिरी इंस्टा पोस्ट में खुलासा- RSS के कई सदस्यों ने उनके साथ बचपन से बलात्कार किया।
तीन साल की उम्र से शाखा में गया एक मासूम, वहाँ दरिंदगी का शिकार बना।
अगर यह सच है, तो यह RSS की शाखाओं में छिपे काले सच को उजागर करता है।
क्या मोदी सरकार अब भी इस पर चुप्पी साधेगी?
#JusticeForAnandu #RSS #Kerala
वोट चोरी के खिलाफ़ अभियान अब एक विशाल जन आंदोलन बन चुका है।
पिछले 24 घंटे में:
▪️15 लाख+ समर्थन certificate डाउनलोड
▪️10 लाख+ मिस्ड कॉल मिले
ये है आज हिंदुस्तान के लोकतंत्र की सच्ची तस्वीर - सच्चाई क��� दबी हुई आवाज़ें, जो हमारे अभियान के ज़रिए बुलंद होकर सामने आ रही हैं।
https://t.co/1qXg5bUDuP पर जाएं या 9650003420 पर ��िस्ड कॉल दें - वोट चोरी का एक भी मामला छूटने न पाए।
अपना समर्थन बरकरार रखें और ये संदेश जन-जन तक फैलाएं - आइए, मिलकर लोकतंत्र बचाएं।
“Make in India” promised a factory boom. So why is manufacturing at record lows, youth unemployment at record highs, and why have imports from China more than doubled?
Modi ji has mastered the art of slogans, not solutions. Since 2014, manufacturing has fallen to 14% of our economy.
In Nehru Place, New Delhi, I met Shivam and Saif - bright, skilled, full of promise - yet denied the opportunity to fulfil it.
The truth is stark: we assemble, we import, but we don’t build. China profits.
With no new ideas, Modi ji has surrendered. Even the much-hyped PLI scheme is now being quietly rolled back.
India needs a fundamental shift - one that empowers lakhs of producers through honest reforms and financial support.
We must stop being a market for others. If we don’t build here, we’ll keep buying from those who do. The clock is ticking.
"प्रकृति का प्रेमी, प्रकृति की रक्षा करते करते पंच तत्व में विलीन"
जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र में हिरण शिकार की सूचना पर रेस्क्यू के लिए जंगल की ओर जा रहे वन्य जीव संरक्षक श्री राधेश्याम पैमाणी धोलिया, श्री श्याम फौजी धोलिया, श्री कंवराजसिंह भादरिया व वन विभाग के कार्मिक श्री सुरेन्द्र चौधरी के सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन हो गया। @Sanjay4India1@ForestRajasthan@byadavbjp
जब हमारी सेना जीत रही थी, तब सीजफायर कर दिया गया नहीं तो POK आज भारत का हिस्सा होता
~ अमित शाह दिसंबर 2023 में whatsapp का ज्ञान दे रहे थे
तो चलिए बताइए, अब क्या हुआ?