पढ़ाई छोड़कर जब विद्यार्थियों को अपने हक और बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतारकर धरना देना पड़े, तो यह शिक्षा प्रणाली और व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
मूलभूत सुविधाओं से रहित और असुरक्षित स्कूल भवनों में पढ़ने को मजबूर छात्रों को अब स्कूलों पर तालाबंदी करने की नौबत आ गई है। जिम्मेदार अधिकारियों और मंत्री ने आँखें मूँद रखी हैं।
सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
मैं डेली बाँटता हूं 10 लाख..1984 से...मेरे बाप दादा के पास 32000 भैंस होती थीं मेरे दादा दूध और चूरा रास्ते में लोगों को खिलाते थे..
मेरी दिल्ली वाली कोठी न्याय का मंदिर है मैं और मेरी पत्नी MP हैं एक कोठी मैं हम रहते थे और दूसरी में गरीबों का इलाज करते हैं.. डेली 500 से 600 लोग खाना खाते हैं...
पूर्णियाँ घर पर दो हजार से तीन हजार पटना में 150 से 200 खुर्दा में 300 से 400 डेली 5000 लोगों को खाना खिलाता हूं सेवा आश्रम में लोगों का मुफ़्त इलाज करता हूँ पूरी दुनियां देख चुकी है।
पूर्णियाँ जहां से मैं चुनाव लड़ता हूं वहां मेरी जात के लोग नहीं हैं फिर भी मैं लगातार निर्दलीय चुनाव जीत रहा हूं..!
ये सविता प्रधान हैं जो मध्य प्रदेश के सिंगरौली में बतौर PCS अधिकारी तैनात हैं।
इनकी एक दिलचस्प कहानी काफी चर्चा में है जिसे सुनकर आप उन्हें Salute करने लग जाएंगे और यही कहेंगे कि हर अधिकारी को इतना विनम्र होना चाहिए।
दो दिनों पहले इनसे एक बच्ची की मुलाकात होती है, जो कैंसर की आखिरी स्टेज से गुजर रही होती है उस बच्ची ने इनसे कहा कि
"मैम मुझे आपके बाल बहुत पसंद है।"
बच्ची कैंसर के आखिरी स्टेज पर थी तो सविता प्रधान इसे सुनकर भावुक हो गईं और उन्होंने दो दिन बाद अपने सिर मुड़वा दिए और
बच्ची को विग बनवाकर गिफ्ट करते हुए लिखा कि
"मेरी असली सुंदरता मेरे बालों में नहीं बल्कि मेरे आत्मविश्वास में है।"
सविता प्रधान जी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें कैंसर के कीमोथेरेपी में बाल झड़ने का दर्द पता है और उनकी माँ भी कैंसर से पीड़ित रही हैं।
बच्ची खुश रहे इसलिए इन्होंने इतना बड़ा त्याग किया।
महज 13 साल की बच्ची के साथ 32 लोगों ने 5 दिन हैवानियत बहुत ही दर्दनाक और शर्मनाक है!
ऐसी घटनाएं सिर्फ एक परिवार को नहीं बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती है!
दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले और बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाये जाये!!