I thank the Chief Ministers and leaders of the NDA for their warm wishes. The NDA’s journey has been defined by a shared resolve to further national interest and regional aspirations. This spirit has strengthened our democracy, deepened cooperative federalism and accelerated development. Over the last 12 years, the NDA has provided a stable government that has furthered progress across sectors.
We will continue working together with renewed vigour in service of the nation and the vision of Viksit Bharat.
कालजयी इतिहास • अद्भुत • अविस्मरणीय • दिव्य एवं भव्य गाथा
10 जून 2026 भारतीय लोकतंत्र, भारत और 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण दिवस है। आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी @narendramodi Ji भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। यह केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि देशवासियों के अटूट विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा तथा सुशासन के प्रति प्रधानमंत्री जी की अविचल प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है.
पिछले 12 वर्षों में भारत ने विकास, आत्मविश्वास और राष्ट्रगौरव के अनेक स्वर्णिम अध्याय लिखे हैं। नई संसद का निर्माण, तीन नए आपराधिक कानूनों का क्रियान्वयन, नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षा का भारतीयकरण तथा मातृभाषाओं में मेडिकल और इंजीनियरिंग शिक्षा का मार्ग प्रशस्त होना परिवर्तनकारी उपलब्धियाँ हैं। आत्मनिर्भर भारत का संकल्प आज जन-जन का राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने अभूतपूर्व शक्ति और दृढ़ता का परिचय दिया है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का निष्कासन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण, नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार तथा आतंकवाद के विरुद्ध कठोर और प्रभावी कार्रवाई ने नए भारत की सामर्थ्य को विश्व के समक्ष स्थापित किया है.
भारत ने अपनी संस्कृति, विरासत, आध्यात्मिक मूल्यों और राष्ट्रीय पहचान पर गर्व करना सीखा है। देशवासियों को सुरक्षा का विश्वास, आत्मसम्मान की अनुभूति और राष्ट्रीय गौरव का पुनर्जागरण प्रदान करना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सबसे बड़ी एवं ऐतिहासिक उपलब्धि है.
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ভারতের গণতান্ত্রিক ইতিহাসে নতুন অধ্যায়!
নির্বাচিত প্রধানমন্ত্রী হিসেবে সর্বাধিক দীর্ঘ সময় দায়িত্ব পালন করে নতুন রেকর্ড গড়লেন মাননীয় প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদীজি।
দেশসেবা, সুশাসন ও উন্নয়নের প্রতি তাঁর অবিচল অঙ্গীকার ভারতকে এগিয়ে নিয়ে চলেছে নতুন উচ্চতায়।
@narendramodi নরেন্দ্র মোদীজিকে জানাই আন্তরিক শুভেচ্ছা ও অভিনন্দন ।
#LongestServingElectedPMModi
4,399 days. ✅
Countless milestones. ✅
Historic transformations. ✅
One unwavering commitment — Bharat First. 🇮🇳
PM Modi's journey is not just about longevity in office, but about leaving a lasting imprint on the nation's destiny.
#LongestServingElectedPMModi
।। “श्वेताश्वतर” उपनिषद् ।।
स्वदेहमरणिं कृत्वा प्रणवं चोत्तरारणिम् ।
ध्याननिर्मथनाभ्यासादेवं पश्येन्निगूढवत् ।।१४।।
("श्वेताश्वतर" उपनिषद् - प्रथमोध्याय)
यह मंत्र उपनिषद्-साहित्य के उन विलक्षण मंत्रों में से है, जिनमें सम्पूर्ण साधना-पथ को एक अत्यन्त सरल, किन्तु अत्यन्त गहन रूपक के माध्यम से व्यक्त किया गया है। यह केवल ध्यान की कोई सामान्य विधि नहीं बताता, अपितु आत्मसाक्षात्कार की सम्पूर्ण प्रक्रिया का दार्शनिक, आध्यात्मिक तथा अनुभूतिपरक रहस्य उद्घाटित करता है। भगवत्पादाचार्य आदि शंकराचार्य के भाष्य के आलोक में यह मंत्र साधक को बाह्य जगत् से हटाकर उसके अपने अन्तःकरण की ओर ले जाता है, जहाँ ब्रह्म का शाश्वत प्रकाश सदा से विद्यमान है, किन्तु अविद्या के आवरण के कारण अप्रकट प्रतीत होता है।
उपनिषद् यहाँ वैदिक यज्ञपरम्परा में प्रयुक्त अरणि-मंथन की प्रक्रिया का अत्यन्त सुन्दर रूपक प्रस्तुत करता है। प्राचीन काल में अग्नि उत्पन्न करने के लिए दो अरणियों का उपयोग किया जाता था। अधःस्थित अरणि आधार बनती थी और ऊर्ध्वस्थित अरणि को निरन्तर घर्षण द्वारा घुमाया जाता था। दीर्घ अभ्यास एवं सतत प्रयास से उसी घर्षण से अग्नि प्रकट होती थी। उपनिषद् कहता है कि आत्मज्ञान की प्राप्ति भी इसी प्रकार होती है। साधक अपने शरीर और अन्तःकरण को अधःअरणि के रूप में धारण करे तथा प्रणव अर्थात् “ॐ” को उत्तरारणि के रूप में स्थापित करे। तत्पश्चात् ध्यान, मनन, चिन्तन और आत्मविवेक रूपी मंथन के द्वारा उस परम सत्य को प्रकट करे, जो उसके भीतर ही गुप्त रूप से विद्यमान है।
भगवत्पादाचार्य इस मंत्र की व्याख्या करते हुए स्पष्ट करते हैं कि आत्मा कोई उत्पन्न होने वाली वस्तु नहीं है। जिस प्रकार अग्नि वास्तव में अरणियों में पहले से ही सूक्ष्म रूप में विद्यमान रहती है और मंथन के द्वारा केवल प्रकट होती है, उसी प्रकार आत्मा भी नित्य, शुद्ध, बुद्ध और मुक्त स्वरूप से सदैव विद्यमान है। साधना का प्रयोजन आत्मा को उत्पन्न करना नहीं, बल्कि अज्ञानरूपी आवरण को हटाना है। ज्ञान किसी नवीन वस्तु की प्राप्ति नहीं, प्रत्युत अपने वास्तविक स्वरूप की पुनः पहचान है।
इस मंत्र का विशेष महत्व इस तथ्य में निहित है कि यहाँ साधना का केन्द्र बाह्य कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि अन्तर्मुखता है। उपनिषद् यह संकेत करता है कि परम सत्य को बाह्य विषयों, इन्द्रियानुभवों अथवा लौकिक उपलब्धियों में खोजने का प्रयास अन्ततः व्यर्थ सिद्ध होता है। सत्य का निवास स्वयं साधक के अन्तःकरण में है। इसी कारण कहा गया - “स्वदेहमरणिं कृत्वा”। साधना का क्षेत्र कोई बाहरी स्थान नहीं, अपितु स्वयं का अन्तःकरण है; और साधना का उपकरण भी वही अन्तःकरण है।
यहाँ “प्रणव” अर्थात् “ॐ” को उत्तरारणि कहा गया है। समस्त उपनिषदों में प्रणव को ब्रह्म का प्रत्यक्ष वाचक माना गया है। माण्डूक्य उपनिषद् उद्घोष करता है - “ओंकार एवेदं सर्वम्” यह सम्पूर्ण विश्व ओंकारस्वरूप है। भगवत्पादाचार्य के अनुसार प्रणव का ध्यान वस्तुतः ब्रह्म के ध्यान से भिन्न नहीं है। प्रणव में सम्पूर्ण वेदों का सार निहित है। उसमें जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति तथा तुरीय - चारों अवस्थाओं का समन्वय है। अतः जब साधक श्रद्धा, भक्ति और एकाग्रता के साथ प्रणव का चिन्तन करता है, तब उसका चित्त क्रमशः बाह्य विषयों से निवृत्त होकर ब्रह्माकार वृत्ति को प्राप्त करता है।
मंत्र में प्रयुक्त “ध्याननिर्मथनाभ्यास” शब्द अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। केवल एक बार का ध्यान या क्षणिक साधना आत्मसाक्षात्कार का कारण नहीं बनती। जिस प्रकार अग्नि उत्पन्न करने के लिए निरन्तर और धैर्यपूर्ण मंथन आवश्यक होता है, उसी प्रकार आत्मज्ञान के लिए भी अविरत अभ्यास आवश्यक है। योगशास्त्र में जिसे “अभ्यास” कहा गया है और वेदान्त में जिसे “निदिध्यासन” कहा गया है, वही यहाँ “ध्याननिर्मथन” के रूप में व्यक्त हुआ है। बार-बार आत्मतत्त्व का चिन्तन, बार-बार ब्रह्मभाव में स्थित होने का प्रयास, बार-बार मन को विषयों से हटाकर आत्मा में स्थिर करना - यही वह मंथन है जिससे ज्ञानाग्नि प्रज्वलित होती है।
श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश भी इसी सत्य की पुष्टि करता है। भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं -
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।”
अर्थात्, इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कोई वस्तु नहीं है। परन्तु यह ज्ञान केवल बौद्धिक सूचना नहीं है; यह ध्यान, साधना, अन्तर्मुखता और आत्मानुभूति से प्रकाशित होने वाला सत्य है। इसी कारण गीता के छठे अध्याय में योगी को अपने मन को बार-बार आत्मा में स्थिर करने का निर्देश दिया गया है।
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आज का दिन ऐतिहासिक है।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। 4,399 दिनों की यह यात्रा केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के जीवन में आए बदलाव की कहानी है।
गरीब कल्याण, डिजिटल क्रांति, बुनियादी ढांचे का विस्तार, नारी शक्ति, आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक मंच पर भारत की नई पहचान, यह सब मोदी जी के अथक परिश्रम और दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है।
2047 के विकसित भारत की नींव इन्हीं 4,399 दिनों में रखी गई है। मोदी जी को इस ऐतिहासिक पड़ाव पर हार्दिक बधाई।
#LongestServingElectedPMModi 🇮🇳
4,399 दिन... और सफर अब भी जारी है!
कर्तव्य पथ पर निरंतर अग्रसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जीवन राष्ट्रसेवा, समर्पण और संकल्प का प्रतीक है।
जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उन्होंने भारत को विकास, आत्मविश्वास और वैश्विक प्रतिष्ठा की नई पहचान दी है।
#LongestServingElectedPMModi
आज, 10 जून 2026 को प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में नया अध्याय रचा है।
4,399 दिनों की निरंतर जनसेवा, मजबूत नेतृत्व, तीन लगातार जनादेश और राष्ट्र प्रथम का संकल्प—यही है मोदी नेतृत्व की पहचान। जनादेश से जनसेवा तक, भारत को मिला स्थिर, मजबूत और विश्वसनीय नेतृत्व।
#LongestServingElectedPMModi
भारत केवल एक राष्ट्र नहीं, अपितु सनातन सांस्कृतिक चेतना, जीवंत सभ्यता और सहस्राब्दियों से प्रवाहित आध्यात्मिक परम्परा का दिव्य प्रतीक है। जब-जब इस राष्ट्र ने इतिहास के महत्वपूर्ण मोड़ों पर स्वयं को नवीन रूप में प्रतिष्ठित किया है, तब-तब उसे ऐसे नेतृत्व का सान्निध्य प्राप्त हुआ है जिसने केवल शासन नहीं किया, बल्कि राष्ट्रजीवन में नवचेतना, नवविश्वास और नवसंकल्प का संचार किया है। वर्तमान युग में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रभाई मोदी जी का नेतृत्व इसी राष्ट्रीय पुनर्जागरण का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय बनकर उभरा है।
विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र भारतवर्ष को पुनः तीसरी बार ऐसे प्रधानमंत्री का नेतृत्व प्राप्त हुआ है, जिनके व्यक्तित्व में सेवा, समर्पण, संकल्प और कर्मनिष्ठा का अद्भुत समन्वय दृष्टिगोचर होता है। आदरणीय मोदी जी करोड़ों भारतीयों की आकांक्षाओं के प्रतीक तथा राष्ट्रविश्वास के केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं। वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, विकास-दृष्टि और वैश्विक प्रतिष्ठा के समर्थ संवाहक के रूप में उभरे हैं।
भारतीय सनातन धर्म संस्कृति और में आदर्श नेतृत्व को सदैव “राजर्षि” की संज्ञा दी गई है ऐसा नेतृत्व जो प्रशासनिक दक्षता के साथ नैतिकता, आध्यात्मिकता और लोकमंगल के प्रति समर्पित हो। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के व्यक्तित्व में शासक, प्रशासक और उपासक इन तीनों आयामों का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर होता है। उनकी कार्यशैली में अनुशासन, दृष्टि में दूरदर्शिता तथा संकल्पों में जनकल्याण का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इसी कारण उनके नेतृत्व में शासन केवल सत्ता संचालन का माध्यम न रहकर राष्ट्र-निर्माण का व्यापक अभियान बन गया है।
इतिहास साक्षी है कि सम्राट विक्रमादित्य, महाराज हर्षवर्धन और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जैसे लोकनायक शासकों ने भारत की सांस्कृतिक चेतना और जनकल्याणकारी शासन-परम्परा को सुदृढ़ किया था। आधुनिक भारत में आदरणीय प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी उसी गौरवशाली परम्परा के समकालीन संवाहक सिद्ध हुए हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को नवीन आत्मविश्वास के साथ अभिव्यक्त किया है तथा विश्वपटल पर अपनी सभ्यतागत पहचान को गौरवपूर्ण स्वर में स्थापित किया है।
पिछले वर्षों में भारत ने विकास और जनकल्याण के ऐसे समन्वित मॉडल को साकार होते देखा है, जिसमें समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएँ पहुँचाने का प्रयास स्पष्ट दिखाई देता है। गरीबों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुरक्षा, निःशुल्क खाद्यान्न, स्वच्छ ऊर्जा, आधारभूत संरचना का तीव्र विस्तार, आधुनिक रेलवे, वंदे भारत ट्रेनों का संचालन, नए हवाई अड्डों का निर्माण तथा राजमार्गों और एक्सप्रेसवे का अभूतपूर्व विकास-ये सभी उस दूरदर्शी दृष्टि के प्रतीक हैं, जिसका केन्द्र सामान्य नागरिक का जीवन आधार है
आज भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी सशक्त उपस्थिति स्थापित कर रहा है। वैश्विक मंचों पर उसकी प्रतिष्ठा, कूटनीतिक प्रभाव और आर्थिक सामर्थ्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भारतीय भावना को वैश्विक विमर्श में प्रतिष्ठित करने में भी भारत की भूमिका अधिक प्रभावशाली हुई है। यह केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास और आत्मगौरव के पुनरुत्थान का भी प्रतीक है।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी की कार्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण विशेष रूप से प्रेरणादायी है। भारतीय संस्कृति जिस “कर्मयोग” की शिक्षा देती है, उसका जीवंत प्रतिबिम्ब उनके सार्वजनिक जीवन में दृष्टिगोचर होता है। जब नेतृत्व की नीयत निर्मल हो, लक्ष्य राष्ट्रहित हो और संकल्प लोकमंगल के लिए समर्पित हों, तब परिवर्तन केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह राष्ट्रीय मानस को भी प्रभावित करता है।
निस्संदेह, वर्तमान काल भारत के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव के पुनर्जागरण का काल है। यह वह युग है जिसमें भारत अपनी सनातन सांस्कृतिक चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ विश्व समुदाय के समक्ष एक नई शक्ति के रूप में उदित हो रहा है। ४,३९९ दिनों की यह यात्रा सशक्त, समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का एक महत्त्वपूर्ण स्वर्णिम अध्याय है।
आज विकसित भारत के संकल्प की दिशा में अग्रसर राष्ट्र, आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व, निर्णायक नीतियों और “राष्ट्र प्रथम” की भावना का सशक्त प्रमाण है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर आदरणीय प्रधानमंत्री जी का हृदय से अभिनंदन तथा उनके स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन हेतु मंगलकामनाएँ।
@narendramodi@PMOIndia@AmitShah@RSSorg
#12YearsOfSeva #नरेंद्र_मोदी #LongestServingElectedPMModi
🎥 | Prominent Hollywood singer and actress Mary Millben has extended her heartfelt congratulations to Prime Minister #NarendraModi on becoming India’s longest-serving democratically elected Prime Minister, praising his leadership and historic achievement.
@MaryMillben | @narendramodi | @PMOIndia | #PMModi #longestservingPM #TheStatesman
बाबू मोशाय, इंफ्रास्ट्रक्चर हो तो बिहार जैसा!
जहां नए पुल, चौड़ी सड़कें और आधुनिक परियोजनाएं विकास की नई इबारत लिख रही हैं। बदलता बिहार आज प्रगति की रफ्तार से अपनी नई पहचान गढ़ रहा है।
#NDA4Bihar
सुचना एवम् प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार प्रसार भारती
आकाशवाणी दूरदर्शन कार्यालय मिलकर
माननीय प्रधानमंत्री जी 12 वर्ष विज़न
भारत डिस्कवरी,डेकोमेंटरी डेवलपमेंट भारत सहित दुनिया प्रसारण करें धन्यवाद।
The BRICS Urbanisation Forum journey reflects a shared commitment towards resilient, innovative, cooperative, and sustainable urban futures. 🌍
As BRICS nations come together under India’s Chairship in 2026, the dialogue continues to shape cities for people and progress for all.
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@MoHUA_India
As Prime Minister @narendramodi becomes India’s longest-serving elected Prime Minister, I congratulate him on this significant accomplishment.
The partnership between our two democracies continues to expand across technology, defense, trade, and innovation, creating opportunities for both our nations. 🇺🇸🇮🇳
Congratulations to Prime Minister @narendramodi on becoming the longest-serving Prime Minister in India’s history. This remarkable milestone reflects years of dedicated service and leadership. Cyprus values its strategic partnership with India and is committed to further deepening our cooperation for the benefit of our peoples, 🇨🇾🇪🇺🇮🇳
श्रावस्ती जिले में जो गाय परिक्रमा कर रहीं हैं खेत मालिक से बात करके जन्मांतर के लिए उसका मेहनत का फल जनता कि भागिदारी से भगवान शिव मंदिर में सभी देवताओं का बास है
आज के समय में अच्छा रहेगा कि निजी नहीं सरकारी सिस्टम भागीदारी सुनिश्चित करें
तो ज्यादा अच्छा होगा। धन्यवाद।