🚨STATEMENT
We are deeply concerned by multiple reports reaching us of students and other protestors being targeted, detained, or arrested by various state agencies, particularly in Assam, West Bengal, and Bihar.
The Cockroach Janta Party had called off its nationwide protest only after the Government of India assured us that no punitive action would be taken against any protestor, either now or in the future, in any BJP-ruled or NDA-ruled states. The reports emerging from these states are therefore a matter of grave concern.
First, we wish to assure every protestor that our legal team is already coordinating with brilliant lawyers in the concerned states to secure the release of those detained and to extend all possible legal assistance. This has been happening from Day 1.
Second, we call upon the Government of India, particularly @JPNadda ji and @DrJitendraSingh ji, to immediately honour the assurance given to us by ensuring the release of those detained and by directing that no coercive or retaliatory action is taken against any protestor anywhere in the country. The FIRs registered ought to be withdrawn too.
The Government of India is also reminded of its commitment to furnish us the written guarantee in this regard by tomorrow, Tuesday, 28 July 2026.
Our decision to suspend the nationwide protest was taken in good faith and solely on the basis of the government’s assurance that it would stand by its word. Any departure from that assurance would not merely amount to a breach of trust with the Cockroach Janta Party but would also be a breach of public trust with lakhs of young Indians who chose dialogue over protests.
Such breach of trust will be completely unacceptable to the youth.
The Government of India is reminded that it derives credibility not from just making a promise, but from the promises they honour.
To the young protestors we say, hold on. We are with you. The CJP continues to closely monitor the situation and expects the Government of India and all BJP/NDA state governments to act with utmost urgency, responsibility, and good faith that the present circumstances demand. We demand that all detainees/arrestees be released immediately, and in any case by tomorrow, and that all FIRs be withdrawn immediately, failing which we shall take further necessary steps.
@Cockroachisback
मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से, जो जंतर-मंतर के उस वायरल वीडियो से पूरे देश में पहचाना जा रहा है, जिसमें वह संविधान की प्रस्तावना को जिस आत्मविश्वास, लय और भाव के साथ सुनाता है, वह आसपास खड़े हर व्यक्ति को कुछ पल के लिए ठहरकर सुनने पर मजबूर कर देता है।
एक टूटे-फूटे घर में रहने वाला यह युवा लोकतांत्रिक मूल्यों को केवल पढ़ता नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में जीने की कोशिश करता है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उसने अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा है।
इरफ़ान को केवल उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर, उचित मार्गदर्शन और मंच मिलने की देर है। उसके भीतर सीखने की भूख, बोलने की क्षमता और आगे बढ़ने का जज़्बा है। यक़ीन मानिए, एक बार उसे अवसर मिल गया तो वह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अपनी मंज़िल खुद बना लेगा।
देश की असली ताकत ऐसे ही युवाओं में छिपी है। ज़रूरत सिर्फ़ उन्हें पहचानने, उन पर भरोसा करने और उनका हाथ थामने की है।
कल जंतर-मंतर पर एक बार फिर इरफ़ान से मुलाक़ात हुई. वो वैसा ही था जैसा पहली बार मिला. जंतर मंतर के बाहर दरी बिछाए आंदोलन पर बैठा था. 20 जुलाई की लाठीचार्ज में पुलिस ने उसपर भी लाठियां भांजी. इरफान बताते हैं कि पुलिस ने उनका सिर पैर में फंसा कर मारा. कुर्ता फट गया. चप्पल खो गए. इरफान के पांव में चप्पल नहीं थे. उसे चप्पल भिजवा दिए हैं. लेकिन इरफान के चहरे पर वो मुस्कान थी जो उसे बाकियों से उसे अलग बनाती है. हर बार इरफान से मिलकर अपनी परेशानियां भूल जाता हूं. सोचता हूं ये इतना परेशान होकर भी मुस्कुराता है और हमारे हिस्से तो भगवान ने फिर भी बहुत कुछ दिया है.
इरफ़ान की कहानी लाचारी की नहीं हिम्मत की है.
अपने संस्थान @thelallantop का बहुत शुक्रगुज़ार हूं कि वो हमें इरफ़ान जैसी कहानियों तक जाने का मौक़ा देते हैं.
#cjp #jantarmantar #lathicharge
"जिनका इंतजार मरघट कर रहा है, वो आके यहाँ ज्ञान दे रहे है.. खुद चला नहीं जा रहा है और सोनम वांगचुक को बूढ़ा बोल रहा है.."
ऐसे पेंशनजीवी बूढ़े अंधभक्त इस देश के लिए जहर है, युवा साथी ने सही क्लास लगाई है।
During the vibe check at Jantar Mantar, @AbhinandanSekhr, @MnshaP and @BeechBazar run into @RoflGandh!
Things went exactly where you'd expect.
They spoke about Gen Z's protesters, prime time anchors, and what passes for journalism these days.
Watch: https://t.co/MDCgCiHegM
RSS के 100 साल हो गये। क्या RSS ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया?
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आरएसएस के प्रकाशन- भारतीय विचार साधना नागपुर ने गोलवलकर के द्वारा पूरे जीवन में दिए गए भाषणों और अन्य चीजों को मिलाकर छापा, 1970 के दशक की शुरुआत में उसके सात वॉल्यूम छापे गए, जिन्हें अंग्रेजी में- Complete Works of Guru Golwalkar कहा जाता है और हिन्दी में श्री गुरूजी समग्र.
इसी श्री गुरूजी समग्र में गोलवलकर और हेडगेवार के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऊपर विचार लिखे हुए हैं.
श्री गुरूजी समग्र के वॉल्यूम चार में पेज न. 39-40 पर लिखा है कि- ‘’नित्यकर्म में सदैव संलग्न रहने के विचार की आवश्यकता का और भी एक कारण है. समय समय पर देश में उत्पन्न परिस्थिति के कारण मन में कुछ उथल पुथल होती ही रहती है. सन 1942 में ऐसी उथल पुथल हुई थी. उसके पहले 1930-31 में भी आंदोलन हुआ था. उस समय कई लोग डॉक्टरजी यानी आरएसएस के पहले संस्थापक- हेडगेवार के पास गए थे, इस ‘शिष्टमंडल’ ने डॉक्टर जी से अनुरोध किया कि आंदोलन से स्वातंत्रय यानी स्वतंत्रता मिल जाएगा और संघ को पीछे नहीं रहना चाहिए. उस समय एक सज्जन ने जब डॉक्टर जी से कहा कि वे जेल जाने के लिए तैयार हैं तो डॉक्टरजी ने कहा- जरूर जाओ. लेकिन पीछे आपके परिवार को कौन चलाएगा., उस सज्जन ने बताया- दो साल तक केवल परिवार को चलाने के लिए ही नहीं , आवश्यकतानुसार जुर्माना भरने की भी पर्याप्त व्यवस्था उन्होंने कर रखी है’’. तो डॉक्टर जी ने उनसे कहा- आपने पूरी व्यवस्था कर रखी है तो पहले दो साल के लिए ही संघ का कार्य करने के लिए निकलो.’’ घर जाने के बाद वह सज्जन न जेल गए न संघ का कार्य करने के लिए निकले’’.
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आरएसएस न तो स्वतंत्रता संग्राम में भाग ले रहा था, न किसी को प्रेरित कर रहा था, उल्टा जो आदमी अपना पैसा, घर छोड़ कर अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ना चाहते थे उन्हें भी स्वतंत्रता संग्राम में जाने से रोक रहे थे. और बड़ी ही बेशर्मी के साथ देश छोड़कर आरएसएस के लिए काम करने के लिए कह रहे थे. इसी किताब में अनजाने में खुद गोलवलकर भी स्वीकार कर लेते हैं कि खुद आरएसएस के कुछ स्वयंसेवक आरएसएस को अकर्मण्य यानी कुछ काम न करने वाला, निकम्मा. कहकर नाराज हो रहे थे.
इसी किताब में गोलवलकर आगे कहते हैं- 1942 में भी अनेकों के मन में तीव्र आंदोलन था. उस समय भी संघ का नित्य कार्य चलता रहा., प्रत्यक्ष रूप से संघ ने कुछ न करने का संकल्प लिया. परन्तु संघ के स्वयंसेवकों के मन में उथल-पुथल चल रही थी. संघ यह अकर्मण्य यानी कुछ काम न करने वालों की संस्था है, इनकी बातों में कुछ अर्थ नहीं ऐसा केवल बाहर के लोगों ने ही नहीं बल्कि अपने स्वयंसेवकों ने कहा. वे बड़े रुष्ट हुए.’’ इस पैराग्राफ में खुद गोलवलकर स्वीकार कर रहे हैं कि आरएसएस ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने का संकल्प लिया और आरएसएस के कुछ स्वयंसेवक इस बात से नाराज भी थे. 1940 से लेकर 1947 तक जब तक देश आजाद नहीं हो गया तब तक आरएसएस ने किसी भी ब्रिटिश विरोधी आंदोलन में भाग नहीं लिया. यही कारण है कि ब्रिटिश सरकार भी आरएसएस के प्रति सॉफ्ट थी.
साल 1942 के वक्त भारत छोड़ो आंदोलन के वक्त अंग्रेजी सरकार ने गांधी नेहरु समेत सभी स्वतंत्रता सैनानियों को जेल में डाल दिया था. लेकिन उस वक्त आरएसएस क्या कर रही थी इसे Walter Anderson, Shridhar Damle की किताब- The Brotherhood in Saffron से भी समझ सकते हैं, जिसमें वे लिखते हैं- आरएसएस की एक्टिविटीज पर एक ऑफिसियल रिपोर्ट में, अंग्रेजी सरकार के होम डिपार्टमेंट ने लिखा कि- यह तर्क देना मुश्किल है कि अभी आरएसएस कानून-व्यवस्था के लिए कोई खतरा है..." page- 51- it would be difficult to argue that the RSS constitutes an immediate menace to law and order
यानी जब ब्रिटिश सरकार स्वंत्रता सैनानियों को जेल में डाल दिया उस वक्त ब्रिटिश सरकार आरएसएस को अपने लिए ख़तरा नहीं मानती थी. अंग्रेजों के होम डिपार्टमेंट ने लिखा कि- संघ (आरएसएस) ने ईमानदारी से खुद को कानून के दायरे में रखा है, और विशेष रूप से, अगस्त, 1942 में हुई गड़बड़ी में भाग लेने से परहेज किया है…’’. (page- 51)
“the Sangh has scrupulously kept itself within the law, and in particular, has refrained from taking part in the disturbances that broke out in August, 1942”
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(Part-1)
आगे नीचे पढ़ें…
किसी का नाम नहीं लिया हूँ,मेरी बात जिसको चुभेगी उन्हीं के लिए कह रहा हूँ। अगर आपको बुरा लग रहा है,तो समझ लेना रबी,ख़रीफ़,जायद, तीनों ही सीजन में ज़हर की खेती करते हो आप।
पता है मेरे जैसे आदमी को दुख कहां होता है ??
जब मेरे जैसे लोग तन मन धन से सनातन का समर्थन करने वाली सरकार और मोदी जी के लिए अपने प्राण न्यौछावर तक करने को तैयार रहते हैं ।
हमको लगता है मोदी जी जो करेंगे कहेंगे वो ही सही है , उसके लिए सबसे लड़ाई झगडे केस तक करते हैं करवाते हैं। हमारे जैसों की खुद की औकात लोकल पुलिस स्टेशन में जाकर एक सिपाही से मिलने तक की नहीं है। पुलिस जाकर आम नागरिक की तरह काम करवाना पड़ता है। किसी सरकारी काम में पैसे देकर , चौराहे पर बिना सीट बेल्ट के पकड़े गये तो 500 की पत्ती देकर निकल आते हैं।
पैट्रोल डीजल सीएनजी सिलेंडर महंगा हो तो विरोध करने वालों को रेल देते हैं। मगर अपने लिए कुछ नहीं मांगते , मुकदमे होने पर केस का खर्चा तक खुद ही देते हैं।
पता है क्यूं क्यूंकि भरोसा करते हैं मोदी जी पर , पैसा तो और कमा लेंगे , धर्म गया तो कैसे बचेंगे।
आज प्रभु श्रीराम जी को भरे मंच पर अपमानित करने वाले लोगों के साथ केंद्रीय मंत्री मंच साझा कर रहे हैं। उनकी बातें मानी जा रही है , उस शिक्षामंत्री का इस्तीफा दिया जा रहा जिसने पाठ्यक्रम से मुगलों का इतिहास निकाल दिया।
आज आहत हूं इतना कि बस बता नहीं सकता , मगर @narendramodi जी आज मैं खुद को ठगा महसूस कर रहा हूं, आज इनके सामने झुक गये आप , कल 100-200-5000 की भीड़ आपको ब्लैकमेल करेगी तो आप भी इस्तीफा दे दोगे।
इस इस्तीफे से आपको फर्क पड़े ना पड़े मैं इतना समझ गया हूं मैं आप अपने भक्तों की ना कदर करते हैं ना उनको कुछ समझते हैं।
कोई ग़लती हो गई हो तो माफ़ करना ,आज के बाद ना आपका और भाजपा का नाम समर्थन और ना विरोध
अपना कमाएंगे खाएंगे और मौज लेंगे
Ayesha Khan का नाम सुनते ही बावला हो गया ये लड़का!
Full Video:
https://t.co/umWPbZl8gF
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