मेरा सिर्फ इतना कहना है की अगर सुनने की क्षमता ना हो तो ज़्यादा बोलना भी नहीं चाहिए, और ज- हर खाने से नुक़सान अनिता जी का ही हुआ, उनके घर वाले रो रहे है बाँकी सोचल मीडिया में किसी को क्या फ़र्क़ पड़ेगा भाई ??? अगर तैरना ना आए तो समंदर में छलांग लगाना कहाँ से सही माना जाए ?? जिसे बात समझ आई उसको धन्यवाद और जिसे नहीं आई उसे भी धन्यवाद 🙏
मेरा सिर्फ इतना कहना है की अगर सुनने की क्षमता ना हो तो ज़्यादा बोलना भी नहीं चाहिए, और ज- हर खाने से नुक़सान अनिता जी का ही हुआ, उनके घर वाले रो रहे है बाँकी सोचल मीडिया में किसी को क्या फ़र्क़ पड़ेगा भाई ??? अगर तैरना ना आए तो समंदर में छलांग लगाना कहाँ से सही माना जाए ?? जिसे बात समझ आई उसको धन्यवाद और जिसे नहीं आई उसे भी धन्यवाद 🙏
महिलाओं को नीचा दिखाना अब सोशल मीडिया ट्रेंड बन गया है जिससे आपको तुरंत लाइक्स मिलते है, लेकिन ये सिर्फ़ महिलाओं का विरोध करने वालों की निचले स्तर की सोच को ही दिखाता है ✍🏻
तुम लोग इतने बेशर्म कैसे हो सकते हो ?? तुम धार्मिक नारा लगा के किसी का ग🤬ला रेत सकते हो, लेकिन कोई राम नाम का जयघोष कर उत्सव नहीं मना सकता,, BSDK भारत से लेकर ब्रिटेन तक हर ज़मीन पर सेंधमारी करने के बाद तुम कौन से मुंह से हमे रूल्स बुक दिखा रहे हो ????🤬🤬🤬🤬
फ्लाइट में ‘जय श्रीराम’ के नारों के साथ ख़ुशी का इज़हार किया जा रहा है।
जीत कि ख़ुशी है, होनी भी चाहिए लेकिन फ्लाइट में धार्मिक नारा लगाना कहाँ तक उचित है? इसमें सभी धर्म के लोग यात्रा करते हैं, अगर कोई अपना धार्मिक नारा लगाने लगे तो मीडिया तक में ख़बरें चलने लगेंगी…
"राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी! आज राम नवमी के पावन अवसर पर माता सीता और प्रभु राम से बस यही प्रार्थना है कि आप सबके परिवार में खुशहाली बनी रहे और जैसे हनुमान जी ने प्रभु का साथ निभाया, वैसे ही हमारे दोस्त और भाई भी हमेशा साथ खड़े रहें।
आज आप लोग राम नवमी कैसे मना रहे हैं? घर में क्या विशेष बना है, फोटो के साथ कमेंट में साझा करें। जय श्री राम!" #ramnavami
भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के सारन में राजपूत बच्ची को पाँच पासवान लड़कों ने खींचा, रेप किया और मरने के लिए कुएँ में फेंकने के पश्चात् व्हाट्सएप पर स्टेटस लगाया कि ‘दुल्हन बना कर ले जाएँगे’।
जब रुचि तिवारी को उसके ब्राह्मण होने के कारण पुलिसकर्मियों के सामने से दिल्ली में, भरी दोपहरी में खींचा गया था, मैंने तब भी कहा था कि अगली वारदात खुल्लमखुल्ला रेप और हत्या की होगी। वह आज हो गई है।
प्रदीप भारद्वाज को बाथरूम में बंद कर अग्निशामक चला कर मारने का प्रयास रुचि तिवारी के रेप/हत्या के प्रयास के कुछ ही दिनों के भीतर हुआ। दोनों में ही, मुझे संदेह है कि पुलिस ने अटेम्प्ट टू मर्डर या रेप के चार्ज लगाए होंगे।
जब पुलिस मूक हो जाती है, सत्ता पक्ष सामान्य वर्ग को सताने की नई नीतियों के आविष्कार में व्यस्त रहता है, तब ऐसे ही सवर्ण समाज की बच्चियाँ सत्ताधीश की जातिवादी कुंठा की बलि चढ़ जाती हैं।
@narendramodi जी, 22 से 47 नहीं, 87 कर दो, पर क्या उत्तर दोगे इस बच्ची की माँ को? @BJP4India के नेताओं, तुम्हारी मूक सहमति ऐसी क्रूरता को जनती है।
यही कारण है कि हमारी लड़ाई केवल UGC रोलबैक की नहीं है, हमारी लड़ाई इस तंत्र से है जिसने सामान्य वर्ग की बच्चियों को रेप-हत्या का सामान बना दिया है, जिसमें हमारी सुनवाई है ही नहीं।
राजपूत-ब्राह्मण-भूमिहार-लाला आदि को ले कर घृणा इतनी मेनस्ट्रीम हो गई है कि किसी पासवान समाज के दलित-पीड़ित-शोषित-वंचित को लगता है कि सवर्ण बच्ची का रेप करना, उसके पूर्वजों के साथ हुए कथित अपमान का उचित बदला है।
उसे इसी सरकार ने यह हथियार थमाया है कि दीवारों पर लिखे नारों के मुँह तक पहुँचने, और देश छोड़ने के नारों से कब्र खुदने की बात तक, सवर्णों के प्रति घृणा सामान्यीकृत की जा चुकी है। ये नारे अब केवल नारे नहीं हैं, ये नारे दिल्ली में लगते हैं, बिहार में फोन पर देखे जाते हैं और किसी बच्ची को इस दुष्कृत्य का शिकार बना दिया जाता है।
आप ही बताइए, मैं केवल यूजीसी रोल बैक पर कैसे रुक जाऊँ?
चाहे बागेश्वर बाबा हों, दीपांकर जी हों, अनिरुद्धाचार्य जी हो, देवकीनंदन ठाकुर जी हों, प्रदीप मिश्रा जी हों, जया जी हों, चित्रलेखा जी हों, सभी लोग अपने सभी मंचो से, चाहे कथा का मंच हो, या किसी अन्य समारोह का मंच हों, अपनी पद यात्राओं से, अपने बोल वचनों से समाज को यहीं सन्देश देते हैं कि, हिन्दू एक हो जाओ, हिन्दू सभी एक हैं, कोई जाति नहीं, कोई उच्च नीच नहीं, सब एक हैं। तभी हिन्दू राष्ट्र बनेगा।
लेकिन इनके अथक प्रयास पर सरकारें जब जाति जाति के लिए अलग अलग कानून बनाकर, योजना लाकर, थाने बनाकर, आरक्षण लाकर, कोर्ट बनाकर, वार्ड कमीशनर से लेकर सांसद तक के सीट को आरक्षित कर कुठाराघात करती है, तब इन उपरोक्त किसी भी कथावाचकों के मुंह से सरकार के कुकृत्य के खिलाफ दो बोल नहीं फुटते। कोई सवाल नहीं खड़ा करता कि,- हे महामानव! 🙏🏻, हमने बड़ी मुश्किल से समाज के भेदभाव को मिटाने का प्रयास किया है, आप फिर से कानून लाकर, योजना लाकर क्यों हमारे किए पर पानी फेर रहें हैं? नहीं कोई नहीं पूछेगा. उलटे समाज को हीं नसीहत देंगे कि एक रहो, बटोगे तो कटोगे..
अजी सरकार जी,,, आपसे हम बचेंगे तभी तो अब्दुल काटेगा.. अब तो अब्दुल से पहले कुठार लेकर आप दौड़ लगा रहें हैं। अब्दुल तो जो सामने है उसे हीं काटेगा, पर आप तो उन्हें भी मार रहे हो जो अभी पैदा भी नहीं हुआ है। फिर बताये कि GC को ज्यादा खतरा किससे है, अब्दुल से या मौजूदा सरकार से..
माफ़ कीजियेगा, अब सहन से बाहर है आपके कृत्य।
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
#UGC_काला_कानून
2011 की जनसंख्या में भी जाति-आधारित आँकड़े हैं, जो सार्वजनिक नहीं हुए हैं। भारत में सामान्य वर्ग की जनसंख्या 30.5% है, जिसमें 1.5% अशराफ मुसलमान हैं। सनद रहे कि कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्यों में यह संख्या सिंगल डिजिट में है।
मुसलमानों का प्रतिशत 15 है, यादवों/अहीर आदि की जनसंख्या लगभग 12% है। ST नागरिक 9% हैं। SC 17% हैं।
अब आप सोचिए कि तुष्टिकरण केवल और केवल नैरेटिव के बल पर हो रहा है, आँकड़े इसे सपोर्ट नहीं करते वरना कॉन्ग्रेस जातिगत जनगणना के आँकड़े सार्वजनिक कर चुकी होती।
एक और मस्त बात हुई 2011 के SECC में कि मनु महाराज के समय के चार वर्णों से अंग्रेजों के समय में 4600 जातियाँ हो चुकी थीं और 2011 में कुछ 46 लाख जातियाँ हो चुकी हैं।
हर जाति को OBC में जाना है क्योंकि वो पिछड़ी जाति नहीं, पिछड़ा वर्ग बना देता है। कुछ तो बेचारे ट्राइबल तक बन जा रहे हैं और एक तिहाई रिजर्वेशन एक ही जाति खींच ले रही हैं।
इसका कोई ऑडिट नहीं होगा, इसको ले कर कोई नीति नहीं बनेगी। केवल जातिगत नैरेटिव (जो झूठ है, रेटोरिक बेस्ड है) चलता रहेगा कि उनको ब्राह्मणों ने दो हजार साल सताया, इनको पानी नहीं पीने दिया।
संघ के मूर्ख अधिकारी माइक पर यही बकलोली बोल कर आते हैं, भाजपा वाले उसी सेंटिमेंट पर यूजीसी से ले कर ये फ्री, वो भी फ्री नीतियाँ लाते हैं। समाज कहाँ जा रहा है, कहाँ जाएगा, कोई चिंता नहीं।
और ज्ञान दिया जा रहा है ‘इनोवेशन ड्रिवन इकॉनमी’ का! कैसे होगा मोदी जी ये सब? आप डेटा हब बनने की जगह दलित हब बनना चाहते हो। आपको AI के जगह अम्बेडकर इंटेलिजेंस चाहिए।
मैं कटाक्ष नहीं कर रहा, मैं थक चुका हूँ। आपकी कथनी और करनी देख कर लगता नहीं कि आप जो बोल रहे हो उसे तीव्रता से पाने के लिए नीति भी बनाओगे। इससे मुझे डर लगता है।
आज जिस तरीके का व्यवहार @ajeetbharti दादा और @kalisenachief जी जैसे लोगों के साथ भाजपा कर रही है, यह सब देख ठगा हुआ महसूस हो रहा, जब जब विपक्ष ने मोदी जी को हिटलर/तानाशाह बुलाया, हमने अंध भक्त बनकर उन्हें चुप कराया, आज भाजपा ने जिस तरीके से #UGCRollBack की डिमाड करने वालों को प्रोटेस्ट करने से रोका और हाउस अरेस्ट करके रखा है, ममता बानो महामानव के आगे बौनी दिख रही है 🤬 #UGCRollBack #8March_Ramleela_Maidan
जय जय श्री राम 🚩
होली की हार्दिक शुभकामनाएं ♥️
मेरी बेटी एक क्रिश्चियन स्कूल में पढ़ती है, लेकिन एक अभिभावक के नाते मेरा यह मानना है कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी हिंदू संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं का ज्ञान होना भी उतना ही आवश्यक है।
मैंने स्कूल मैनेजमेंट से मिलकर एक विशेष निवेदन किया था कि भले ही शिक्षा का माध्यम कुछ भी हो, मेरी बेटी को हिंदू त्योहारों और हमारे संस्कारों से परिचित कराया जाए। मुझे बहुत खुशी है कि मैनेजमेंट ने इस बात को गंभीरता से लिया।
आज स्कूल में मेरी बेटी को होली के महत्व के बारे में बताया गया और उससे यह सुंदर पेंटिंग भी बनवाई गई। 🎨✨
"पेड़ चाहे कितना भी ऊंचा क्यों न हो, अगर जड़ें ढीली हो जाएं तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाता है।"
"पौधा तभी फलता-फूलता है जब उसकी जड़ें मजबूत हों।"
यह हम माता-पिता की नैतिक जिम्मेदारी है कि हम अपनी जड़ों को ढीला न होने दें। हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए कि हमारे बच्चे अपनी संस्कृति पर गर्व करना सीखें। अगर हम आज ध्यान नहीं देंगे, तो कल के संस्कार कैसे बदलेंगे?
#SanatanDharma #Culture #ProudParent #Holi2026 #IndianCulture #Sanskriti #Hinduism #ParentingTips
"Happy Holi to everyone! 🌈 In this video, we celebrate the festival of colors with a pinch of salt and a lot of sarcasm. From hot Puris and Gujhiya to the 'crazy' charisma of Donald Trump—we've got it all covered. Sometimes, a little madness is justified, right? Watch the video to see our take on current vibes and why the festive season feels even better this year. Cheers!"
"This video is purely for entertainment and satirical purposes. The views expressed are personal and intended as satire (sarcasm). We do not intend to insult, marginalize, or spread hatred against any specific community, ideology, or political group. Use of certain colloquial terms is purely for creative expression within the bounds of artistic freedom.
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चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद नहाकर ही अन्न-जल ग्रहण करें।
ये ट्वीट उन साथियों के लिए है जो हमसे दिल से जुड़े हैं। नास्तिक कृपया इस पोस्ट से हजारों मिल दूर रहें, अमेरिका और ईरान की तरह दूरी बनाकर रखें।
अबे अंडकोष, अखिलेश की लंगोट से बाहर निकलेगा, तभी तो तुझे बॉयलर की चिमनी और मिसाइल में फर्क पता चलेगा।
अनपढ़, जरा पढ़ भी लिया कर ये चिमनी है, मिसाइल नहीं। वीडियो में भी साफ साफ दिख रहा है।
दुनिया की कोई भी मिसाइल इतनी लंबी नहीं होती।
तू ब्राह्मणों को गालियां देने वाला काम कर, जो तुझे आता है। उससे ज्यादा तुझे आता भी नहीं।
मातम नहीं आजादी? होलिका दहन और एक नई शुरुआत।
ईरान की बहादुर बेटियों के लिए नई सुबह हो सकती है जिन्होंने 'Zan-Zendegi-Azadi' (महिला-जीवन-आजादी) का नारा बुलंद किया।
बुराई की राख से ही नए और स्वतंत्र भविष्य का जन्म होता है। आइए, इस होलिका दहन पर हम न सिर्फ अपनी बुराइयों को जलाएं, बल्कि दुनिया भर की महिलाओं की आजादी की कामना भी करें।
आपकी इस पर क्या राय है? कमेंट्स में बताएं।
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