आज की राजनीति में लोहिया जी की कथन बहुत ही प्रासंगिक है जिस प्रकार से पूरे देश में अघोषित आपातकाल लागू है संवैधानिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है न्यायपालिका से भी न्याय की उम्मीद नहीं है ऐसे में लोहिया जी के क्रांतिकारी विचारों पर चलकर ही गरीबों की पिछड़ों दलित के
भाई अरुण
आज की राजनीति में लोहिया जी की कथन बहुत ही प्रासंगिक है जिस प्रकार से पूरे देश में अघोषित आपातकाल लागू है संवैधानिक संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है न्यायपालिका से भी न्याय की उम्मीद नहीं है ऐसे में लोहिया जी के क्रांतिकारी विचारों पर चलकर ही गरीबों की पिछड़ों दलित के
भाई अरुण