रात का अंधेरा था, सामने सत्ता थी और बीच में अकेली दिव्या मदेरणा।
न झुकीं, न डरीं, न पीछे ह��ीं। यही है मारवाड़ की शेरनी का अंदाज।
@ashok_Jodhpurii @nakuldevarshi
#DivyaMaderna
एक तस्वीर, जो आज संघर्ष का प्रयाय बन गया है।
दिव्या मदेरणा उन जुझारू नेताओं में हैं जो सत्ता के सामने खड़े होकर अपनी बात मनवाना जानती हैं।
@balmukundjoshi@purohitvaibhav#DivyaMaderna
जब सत्ता को चुनौती देने की बात आई, तो द���व्या मदेरणा पीछे नहीं हटीं।
यही बेखौफ तेवर उन्हें कांग्रेस की एक मजबूत राजनीतिक asset बनाते हैं।
@8PMnoCM @ShekharGupta
#DivyaMaderna
इतने पुरुषों के बीच इकलौती महिला, और सामने सत्ता का पूरा तंत्र।
दिव्या मदेरणा का यह Bold और Powerful अंदाज बताता है कि मारवाड़ की शेरनी सत्ता से डरती नहीं, लड़ना जानती है।
@omthanvi@arvindchotia#DivyaMaderna
सत्ता के सामने बेखौफ खड़ी यह महिला सिर्फ एक नेता नहीं, कांग्रेस की ताकत और asset है।
जुझारूपन, हिम्मत और जमीन पर लड़ने का माद्दा, दिव्या मदेरणा की यही पहचान है।
@pantlp@Viveksbarmeri#DivyaMaderna
सैकड़ों पुरुषों के बीच अकेली महिला, लेकिन सबसे मजबूत आवाज।
यह तस्वीर राहुल गांधी के Smash the Patriarchy के विचार को जमीन पर और बुलंद करती हुई दिव्या मदेरणा की है।
@mukesh1275@Parihar_India#DivyaMaderna
इतने पुरुषों के बीच खड़ी यह एक महिला पूरे सिस्टम को चुनौती देती दिखाई दे रही है।
यह तस्वीर सिर्फ साहस नहीं, ��हिला नेतृत्व की ताकत का ऐलान है।
@Deepakkhatri812 @iSatyenRaj_
#DivyaMaderna
मथानिया में नगर निकाय चुनाव के नामांकन के दौरान जो हुआ, उसने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समय सीमा के बाद क्षेत्रीय विधायक और BJP के एक प्रत्याशी को RO कार्यालय में प्रवेश की अनुमति दी गई। क्षेत्रीय थानाधिकारी द्वारा स्थानीय विधायक को गेट से रिसीव कर कार्यालय के अंदर तक लाया गया, जबकि कार्यालय के अंदर मौजूद कांग्रेस प्रत्याशी के साथ बदतमीजीपूर्ण व्यवहार करते हुए उन्हें बाहर निकाल दिया गया। एक ही नियम दो लोगों के लिए अलग-अलग कैसे हो सकता है?
मैं इस भेदभाव के खिलाफ़ अभी RO कार्यालय, मथानिया के बाहर प्रशासन से जवाब मांगने के लिए बैठी हूँ। अगर चुनाव प्रक्रिया में ही पक्षपात होगा, तो निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र पर जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा? यह सिर्फ़ कांग्रेस प्रत्याशी के साथ भेदभाव नहीं, बल्कि संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है।
RO को जवाब देना होगा कि आखिर यह भेदभाव किसके दबाव में और क्यों किया गया?
पुलिसकर्मियों से गाली-गलौज करने वाले व्यक्ति को कथित रूप से उच्च अधिकारियों व नेताओं के दबाव में बिना मामला दर्ज किए छोड़ दिया गया। अगर यह सही है, तो कानून का राज और पुलिस की गरिमा दोनों पर सवाल है। निष्पक्ष जांच हो और कार्रवाई हो।
@RajPoliceHelp@CP_Jodhpur#कानून_सबके_लिए_समान
@CP_Jodhpur@RajSampark@RajPoliceHelp राजस्थान पुलिस बताए—अगर कोई आम व्यक्ति पुलिसकर्मी से गाली-गलौज करे तो क्या उस पर कार्रवाई नहीं होगी? फिर प्रभावशाली लोगों के मामले में अलग नियम क्यों? कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।
#RajasthanPolice#न्याय
राजस्थान पुलिस बताए—अगर कोई आम व्यक्ति पुलिसकर्मी से गाली-गलौज करे तो क्या उस पर कार्रवाई नहीं होगी? फिर प्रभावशाली लोगों के मामले में अलग नियम क्यों? कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए।
@CP_Jodhpur@RajSampark@RajPoliceHelp#न्याय
@CP_Jodhpur@RajSampark@RajPoliceHelp विकल्प 1 — सीधा सवाल
राजस्थान पुलिस से सवाल है—पुलिसकर्मियों से गाली-गलौज करने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या अधिकारियों या नेताओं के दबाव में कानून अपना रास्ता बदल देता है? निष्पक्ष जांच और जवाब जरूरी है।
#RajasthanPolice#कानून_सबके_लिए_समान