राजस्थान विश्वविद्यालय की परीक्षा में प्रश्नपत्र की जगह आंसर शीट दे दी जाती है, पिछले ढाई साल में राजस्था में 10 अधिक परीक्षाओं में धांधली हुई, फिर कौनसा पेपर लीक बाकी रह गया?
NEET 2024, 2025, 2026, विश्वविद्यालय परीक्षाएं, SCC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं सब लीक हो रही हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हो, तब शिक्षा विभाग की प्राथमिकता क्या है? क्या पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियां रोकने व जवाबदेही तय करने के लिए कोई ठोस रोडमैप बनाया गया?
नेता विपक्ष @RahulGandhi जी लगातार कह रहे हैं कि देश का शिक्षा तंत्र संकट में है, पूरी तरह कोलैप्स हो चुका है। बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, इसलिए इस सिस्टम में बदलाव की आवश्यकता है।
लेकिन भाजपा सरकार सुबह से शाम तक सिर्फ RSS के एजेंडों और भ्रष्टाचार में लगी है, सरकार कोई कंट्रोल नहीं है।
#ChhatronKiGoonj
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी के "छात्रों की गूंज" अभियान की मूल प्रस्तुति के प्रमुख बिंदुओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिला कांग्रेस कमेटियों द्वारा 20 से 27 जून तक जिला स्तरीय प्रेस वार्ताओं एवं प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई, लगातार हो रहे पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को प्रभावी ढंग से जनता के समक्ष रखा जाएगा।
संजय राउत आज की सियासत में एक वफादार नेताओं में गिने जाते हैं... जेल डाल दिया फिर भी बंदे ने ठाकरे परिवार को कभी ठोकर नहीं मारी... अरविंद सावंत और अनिल देसाई भी टिके हुए है... ऐसे ही ममता के साथ महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ ब्रायन, कल्याण बनर्जी और सागरिका घोष जैसे नेता टिके हुए है... केजरी का सिसोदिया और संजय साथ निभा रहे हैं... इनको खूब ऑफर दिए, नहीं माने तो कुछ को जेल में टिकाया पर टूटे नहीं... इतिहास तो हमेशा लड़ने वालों ने ही बनाया है... जो टूट गए और डर गए उनको लगता है पब्लिक तो पॉलिटिक्स के मामले में मूर्ख है इसलिए हमें आगे भी जीता देगी... ऐसे लोग पहले अपना सुख देखते है...
If you've suffered because of paper leaks, exam issues, or high fees
If this education system has shattered your dreams
If your family has invested a lifetime of savings in your education
Then “Chhatron Ki Goonj” is your voice.
This isn't just a campaign - it's a platform to take your demands directly to the government.
Affordable education. Fair examinations. Dignified employment.
Join the movement:
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2️⃣ Fill in your name and share your ideas.
3️⃣ Sign the petition - that's it.
Your signature will strengthen this movement. More the signatures, louder the goonj!
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#ChhatronKiGoonj
ट्रंप बोले : जब तक मोदी लीडर हैं, इंडिया हर फील्ड में बड़ा रोल निभाएगा। मोदी शांत और जबरदस्त नेता हैं, लेकिन मैं मोदी की तरह नहीं हूँ!
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यह प्रशंसा कम, शर्तों में बंधी सुरक्षा-गारंटी अधिक है
ट्रंप के कथन को पूरा पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने मोदी को “calm, cool and a total killer” कहा। यहाँ killer का शाब्दिक अर्थ है अत्यंत कठोर, चतुर और परिणाम निकालने वाला व्यक्ति। “मैं मोदी जैसा नहीं हूँ” कहकर ट्रंप केवल अपनी आक्रामक और खुली शैली की तुलना मोदी की शांत लेकिन कठोर शैली से कर रहे थे। असली धमकी इस वाक्य में नहीं, इसके बाद बोले गए शब्दों में छिपी है।
ट्रंप ने कहा कि भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका उसकी सहायता करेगा; लेकिन फिर जोड़ा—“यदि कोई नया नेता आया, तो मुझे नहीं मालूम।” यही पूरा खेल खोल देता है। उन्होंने अमेरिकी समर्थन को भारत नामक संप्रभु राष्ट्र से हटाकर नरेंद्र मोदी नामक व्यक्ति से जोड़ दिया। यह सामान्य कूटनीति नहीं है। राष्ट्रों के संबंध सरकारें बदलने के बाद भी संस्थागत रूप से चलते हैं; लेकिन ट्रंप कह रहे हैं—हमारी सुरक्षा-प्रतिबद्धता भारत के प्रति स्थायी नहीं, मोदी के नेतृत्व तक सीमित भी हो सकती है।
इसमें तीन स्तरों की धमकी है
पहली धमकी भारत से है:
मोदी के बाद नेतृत्व बदला, तो अमेरिका अपनी सामरिक सहायता, रक्षा-सहयोग या राजनीतिक समर्थन पर पुनर्विचार कर सकता है। यानी संदेश है वॉशिंगटन के अनुकूल व्यक्ति सत्ता में रहेगा, तो संरक्षण मिलेगा; अन्यथा कुछ निश्चित नहीं।
दूसरी धमकी भारतीय विपक्ष और मतदाता से है:
ट्रंप अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय लोकतंत्र में अपनी पसंद घोषित कर रहे हैं। वे बता रहे हैं कि अमेरिका किस नेतृत्व को अपने लिए अधिक उपयोगी और भरोसेमंद मानता है। यह प्रशंसा के आवरण में बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप जैसा संकेत है नेतृत्व बदलिएगा तो रणनीतिक छतरी कमजोर पड़ सकती है।
तीसरी धमकी स्वयं मोदी सरकार से है:
इसे coercive flattery यानी ऐसी प्रशंसा, जिसमें दबाव धमकी के बजाय दृढ़ता से देने वाला रूप कहा जा सकता है। पहले किसी नेता को असाधारण मित्र, कठोर वार्ताकार और वैश्विक शक्ति बताइए; फिर उस व्यक्तिगत समर्थन की कीमत व्यापार, टैरिफ, रक्षा-खरीद, ऊर्जा नीति अथवा पश्चिम एशिया संबंधी फैसलों में माँगिए। ट्रंप ने उसी बातचीत में व्यापार समझौतों पर काम चलने और मोदी के “tough negotiator” होने की बात भी कही।
लेकिन इसे अभी अमेरिका की औपचारिक नीति नहीं माना जा सकता। कोई नई संधि या लिखित सुरक्षा-गारंटी घोषित नहीं हुई। यह ट्रंप की व्यक्तिकेंद्रित और अक्सर तत्क्षण गढ़ी जाने वाली कूटनीतिक भाषा है। फिर भी राष्ट्रपति के शब्द महत्व रखते हैं।
डिकोड किया हुआ संदेश यह है:
“भारत महत्वपूर्ण है, लेकिन मेरे लिए भारत से अधिक महत्वपूर्ण वह भारतीय नेतृत्व है जिसके साथ मैं सौदा कर सकता हूँ। मोदी रहेंगे तो अमेरिकी समर्थन का भरोसा है; उनके बाद नया नेतृत्व मेरी शर्तों पर परखा जाएगा।”
इसलिए यह मोदी की तारीफ करते हुए भारत को दिया गया प्रेमपत्र नहीं है। यह मखमली कागज में लिपटा हुआ संदेश है कि अमेरिका संबंधों को संस्थाओं के बजाय व्यक्तियों से बाँध सकता है और मित्रता की कीमत वसूल सकता है।
👉अगर आपने पेपर लीक का दर्द झेला है…
👉अगर परीक्षा में धांधली ने आपकी मेहनत पर पानी फेरा है…
👉अगर बढ़ती फीस ने आपके परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ाया है…
👉अगर नौकरी की तैयारी करते-करते आपके सपने इंतजार में बदल गए हैं…
तो ‘छात्रों की गूंज’ आपकी आवाज़ है।
यह सिर्फ़ एक अभियान नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई है। शिक्षा, रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाएं और समान अवसर हर युवा का हक़ है।
आप भी इस अभियान से जुड़िए और अपनी आवाज़ को मजबूत बनाइए।
👉 https://t.co/ozcoTdyEjQ
आपका एक हस्ताक्षर बदलाव की इस लड़ाई को और ताकत देगा।
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देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिसको लेकर नेता विपक्ष @RahulGandhi जी काफी समय से चिंतित हैं।
हर साल 22 लाख से अधिक बच्चे NEET की परीक्षा देते हैं। बच्चों के परिवारवाले अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी कोचिंग, हॉस्टल, किराए और किताबों पर खर्च कर देते हैं। मेहनत की कमाई का 1.25 लाख करोड़ रुपए तैयारी पर खर्च हो जाता है। लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें महज 80 हजार ही हैं। निजी कॉलेजों की फीस 1 से 2 करोड़ रुपए है.. आखिर गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चे डॉक्टर कैसे बनेंगे? क्या डॉक्टर बनने का सपना सिर्फ अमीरों के लिए रह गया है?
इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद भी लाखों युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, 80% इंजीनियर्स के पास उनकी डिग्री के मुताबिक काम नहीं है।
ऊपर से पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली, सीमित अवसर और एक ऐसा सिस्टम, जो मेहनत करने वालों को नहीं बल्कि पैसे वालों को आगे बढ़ने का मौका देता है। युवाओं के साथ हो रही इस नाइंसाफी को राहुल जी खत्म करना चाहते हैं। आखिर शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में बदलाव क्यों नहीं होना चाहिए?
#ChhatronKiGoonj
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में 5 प्रसूताओं की मौत का कारण जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर 'इलाज में लापरवाही' सामने आना बेहद संगीन, विचलित करने वाला और अक्षम्य है। यह सामान्य मौतें नहीं, बल्कि व्यवस्था की घोर संवेदनहीनता के कारण हुई संस्थागत हत्याएं हैं। एम्स (AIIMS) की टीम द्वारा ऑपरेशन थिएटर (OT) में इन्फेक्शन की आशंका जताया जाना अस्पताल प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ाता है।
हद तो यह है कि इस जानलेवा लापरवाही के बाद भी वहां 5 महिलाएं जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं और किडनी फेल होने जैसी गंभीर स्थिति में हैं, जिनका अभी डायलिसिस के जरिए इलाज चल रहा है। उनके लाचार परिजनों ने मुझसे मिलकर अपना दर्द बयां किया; उन्हें यह भरोसा ही नहीं है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सरकार आगे उनका इलाज करवाएगी भी या नहीं।
सरकार को तुरंत यह घोषणा करनी चाहिए कि यदि इन पीड़ित महिलाओं की किडनी पूरी तरह डैमेज होती है, तो उनके किडनी ट्रांसप्लांट और भविष्य के पूरे इलाज का शत-प्रतिशत खर्च उठाने की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
सिर्फ कोटा ही नहीं, बीकानेर की स्थिति भी रूह कंपाने वाली है। वहां भी प्रसूताओं की किडनी फेल होने के पीछे अस्पतालों की बदहाली, गंदगी और ओटी में इन्फेक्शन का खौफनाक सच सामने आया है। ये तमाम तथ्य चिल्ला-चिल्लाकर गवाही दे रहे हैं कि पूरे प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा खुद वेंटिलेटर पर आ चुका है और विभाग की इस आपराधिक लापरवाही ने गरीबों की जिंदगी को खिलौना बना दिया है।
राज्य सरकार को अब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागना होगा। कोटा और बीकानेर की इन दर्दनाक घटनाओं को महज 'हादसा' मानकर रफा-दफा करने की कोशिश कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कल कोटा दौरे के दौरान जब मैंने इन पीड़ित और भर्ती प्रसूताओं से मुलाकात की, तो दिल दहल गया। ये सभी अत्यंत गरीब परिवारों की बेबस महिलाएं हैं, जो सरकारी तंत्र के भरोसे अस्पताल आई थीं।
मेरी मुख्यमंत्री जी से सीधी और दोटूक मांग है कि इस अक्षम्य लापरवाही के लिए जिम्मेदार बड़े अधिकारियों और डॉक्टरों को तत्काल सस्पेंड कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
साथ ही, पीड़ित परिवारों को तुरंत मुआवजा राशि दी जाए। सरकार को यह स्वीकार करना ही होगा कि यह पूरी तरह से आपकी सरकार और सिस्टम की घोर विफलता है, जिसकी कीमत निर्दोष महिलाओं को अपनी जान देकर और अपनी किडनियां गंवाकर चुकानी पड़ रही है। @BhajanlalBjp
कुछ लोगों ने पहले से ही भविष्यवाणी कर दी थी, "देखना, गुर्जर समाज के लोग आएँगे, गाली देंगे, बुरा भला कहेंगे।" जैसे उन्होंने पूरे एक समाज को एक साँचे में ढाल दिया हो। जैसे क्रोध ही उनकी एकमात्र भाषा हो।
लेकिन लोग आए। लोगों ने मेरे शब्दों से असहमति जताई। उनका अपना तरीका था। — और उनके साथ आए उनके शब्द। नाराज़गी थी, हाँ; लेकिन उस नाराज़गी में भी एक तहज़ीब थी, एक गरिमा थी। कोई चीख नहीं, कोई आग नहीं। बस एक साफ, सच्चा, तराशा हुआ दर्द] जो बताता था कि बात दिल तक पहुँची थी।
और यहीं वह विडंबना सामने आती है जो सदियों पुरानी है। कुछ जातियों को खास निशाना बनाना। लेकिन वे इंसानियत की ऊँचाई जानते हैं उनसे कहीं बेहतर, जो "ऊँचे कुल" का दम भरते हैं। शालीनता कोई विरासत नहीं होती जो खून में उतरती है; वह अर्जित होती है, उस हर पल में जब क्रोध भीतर उठता है और आप उसे अपनी मुट्ठी में थामे रहते हैं, बिना किसी पर फेंके।
इसीलिए मैं आप सभी का, गुर्जर समाज के हर उस मित्र का जिसने अपनी बात कही; हृदय से आभारी हूँ। आपने साबित किया कि प्रेम और संयम ही नहीं, शिकायतें भी साथ साथ चल सकती हैं। आपका यह प्रेम बना रहे; उस दीपक की तरह जो खुद जलता है, पर किसी को नहीं जलाता।
शुक्रिया।
🙏🙏🙏
अगर आपने पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, या महँगी fees का दर्द झेला है
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कांग्रेस ने राजस्थान से शुरू किया गया ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम...
कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बताया कि राहुल गांधी की भूमिका कितनी अहम रहेगी, और राहुल गांधी बच्चों और छात्रों की आवाज़ बन रहे हैं, उनका अभियान पूरे देश में ले जाएंगे। साथ ही बीजेपी के लगाए आरोपों और महाराष्ट्र की सियासत पर भी की खास बात
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