अम्बेडकर बहुत बड़े वकील थे, प्रश्न बस एक के कितने आंदोलनकारी भारतीयों के केस उन्होंने लड़े?
वो साइमन कमीशन के सदस्य क्यों थे?
अंग्रेजों के (वायसराय एग्जिक्यूटिव्स काउंसिल ) लेबर मंत्री क्यों थे, वायसराय के सुरक्षा सलाहकार क्यों थे?
उनका काम वायसराय की सुरक्षा करना और क्रांतिकारियों पर नज़र रखना था, तो क्या यही निष्ठा थी आंबेडकर की भारत के प्रति?
लगातार आप सब के विचारों के सुनने के उपरांत, हमने एक सरलीकृत माँग पत्र बनाया है। एक बार आम सहमति बन जाए, फिर डिजिटल से धरातल की योजना बनाई जाएगी। तब तक, नीति निर्धारकों के लिए यह पत्र हम सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि उन्हें AI से हिन्दी लिखवा कर, उसमें प्राइवेट में आरक्षण जैसी बकलोली न करनी पड़े।
@JPNadda जी, कॉपी ही करना है, तो ठीक से करो। वैसे, आपको दोबारा झुका देख कर दुख हुआ।
जब ब्राह्मण समाज की लड़कियों के लिए कुछ लोग बड़ी-बड़ी बातें कहते हैं, “मुझे तो ब्राह्मण की लड़की चाहिए”, तो सवाल ये है कि लड़की ले लेने से क्या लड़का भी ब्राह्मण हो जाता है?
अंबेडकर की पत्नी ब्राह्मण थीं। हमारे कन्नौज के विधायक-मंत्री जी की पत्नी ब्राह्मण हैं। रामविलास पासवान की पत्नी भी ब्राह्मण थीं। लेकिन क्या उनके बच्चे ब्राह्मण पैदा हुए?
लड़की ले ली आपने, लेकिन लड़के को ब्राह्मण नहीं बना पाए। फिर सिर्फ ब्राह्मण समाज पर लगातार हमला क्यों?
हमारे समाज की सामाजिक स्थिति ऐसी बना दी गई है कि लोग खुलकर बोल भी नहीं पाते, क्योंकि एससी-एसटी एक्ट का डर सामने खड़ा कर दिया गया है।
हमारी समाज की बच्चियाँ डरती हैं घर से निकलने में। बहुत से परिवार उन्हें बाहर भेजना तक बंद कर देते हैं। लेकिन जरूरतें सबकी होती हैं। जैसे आपकी बेटियाँ पैसा कमाने के लिए घर से निकलती हैं, वैसे ही हमारी बेटियाँ भी निकलती हैं।
अगर किसी के पास भरपूर पैसा है तो बात अलग है, लेकिन हर परिवार इतना सक्षम नहीं होता। सवाल सिर्फ ब्राह्मण समाज की बेटियों का नहीं है, सवाल उनके सम्मान, सुरक्षा और बराबरी के अधिकार का है।
@surendrabaloti2@BhaiiSamrat L o d u agar koi naam chupake dusro ko ungli karta hai to phir ye sub bhi sehna padega. Jub khud sahan karne ki aukat na ho tub parody account se nahi aana chahi.
आओ हम -सब मिलकर कसम खाते है कि ...
हम मौजूदा किसी पार्टी को वोट नहीं देंगे। जो नई पार्टी सवर्ण समाज की होगी उसको वोट देंगे।
अगर सवर्ण समाज की पार्टी का प्रत्याशी पसंद नहीं आयेगा तो हम NOTA को वोट देंगे।
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
—
मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
@HimanshuValmi13 Abey iy niland pahele tere vo bhai ko bol pahle Rohini Ghavari vala mater sulja le. Vo bhi usi ki pol khol rahi hai!!!tum gadhe ki gaand uski to tume parvah hai nahi sale vo tumahari hi samaj ki hai pahle use to nyaay divao...
बीजेपी को पिछले कुछ सालो में बेवजह के उड़ते तीर लेने की आदत सी हो गई है …खामखा UGC का उड़ता तीर लेकर अपना वजूद खतरे में डाल दिया
ये भीड़ आज जंतर-मंतर पर UGC ROLL BACK को लेकर एकत्रित हुई है …
@INCIndia Kutte kabhi sherni ka dudh nahi chakh sakte....vese hi bate se congressiyo ko shikha ki baat nahi karni chahiye kyun ki jinki parti neta hi baccho ki samaj ki tarah rakhta hai
Note-correct your self not judging this person in photo
The Real Balochistan
बलोचिस्तान में ॐ नमः शिवाय🙏
यह बलोच लड़की बलोचिस्तान की आजादी के लिए महादेव और हिंगलाज माता से पुकार कर रही है । 4 मिनिट के इस गीत के शब्द तो आपके पल्ले नहीं पड़ेंगे लेकिन आनन्द आ जाएगा सुनकर , ये पक्का है।
बलोचिस्तान में गूंजता “ॐ नमः शिवाय”।
एक बलोच बेटी महादेव और हिंगलाज माता से अपने वतन की आज़ादी की पुकार कर रही है।
इस गीत के शब्द भले पूरी तरह समझ न आएँ, लेकिन इसकी भावना और स्वर सीधे दिल तक पहुँचते हैं।
सुनकर आनंद आ जाएगा, ये पक्का है।
आखिर देवराज सिंह का क्या कसूर था!
शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने निकला लेकिन घर वापिस नहीं आया!
सरकार की लाठी सिर्फ सवर्णों के लिए आवाज़ उठाने वालों पर चलती है?
क्या UGC नियमों का विरोध इतना बड़ा अपराध था कि इस बच्चे की जान ले ली गई?
जवाब तो देना होगा!
#JusticeForDevrajSingh