@aditya_pandit08 जब भगवान कृष्ण को चूडियां बेचने आया जैसे गाने गाकर लोग खुश होन्गे तो कुछ भी हो सकता है। धर्म की डीन्गें हाँकने वाले क्या अपने बच्चों की गीता पढ़ाते हैं? क्या गीता के श्लोक याद करवाते हैं? भारत मे धर्म की इतनी ग्लानि हो रही है कि कौ भी धर्म की रक्षा करने के लिये गीता नही पढता।
गीता को पढा होता तो शायद आत्मा जाग जाती। आज धर्म को न जान कर,शृ कृष्ण भगवान जो योगीराज थे उनको चूडियां बेचने वाला बना कर गाने गाये जाते हैं तो कैसे विधर्मियों के समक्ष पराक्रम दिक्खाया जाएगा? आज धर्म को बचाने के लिये धर्म का आचरण करना होगा,अपने महापुरुषों का सतचरित्र दिखाना होगा।
@KumaarSaagar जीना है तो अपने श्वासों पर जिए। किसी के स्वसों से मनुष्य जी नही सकता। मानव की शिक्षा पालन पोषण कैसे हुआ यह सब उसके व्यवहार से पता लगता है। इसमे कोई वर्ग, श्रेणी, जाति, समाज आदी का कोई उत्तरदायित्व नही है।
@DrMohanIND मूल को पकडो। बच्चों को गीता पढा दो। यह पृषन ही न उठेगा सभी संशय समाप्त, कौइ भय नही होगा। पत्तों पर पानी न देकर मूल को जड की सिचायि करो। लेकन, यह काम नही करना। घर घर गीता पढाओ।
@GuptaRakesh1959@DrMohanIND शृ कृष्ण भगवान का अर्जुन को दिया गया संदेश गीता के रूप मे सभी धर्म प्रेमियों को सदा नित्य याद करना चाहिये। जो धर्म्प्रेमी लोग गीता नही पढते वे बहकावे मे आ कर धर्म को छोड जाते और विधर्मी बन जाते हैं, तभी तो इस प्रकार की समस्या विकराल दिखाई देती है। गीता प्रचंड शक्ती देती है।
@DrMohanIND इसका उत्तर है, पराक्रम। वेदों मे मनुष्य को संगत्जीत होकर पराक्रम की शिक्षा दी है। अब जनता वेदों को भूल कर नये नये दुनिया के खोखले विचारों से बडे हवाई किले बनाते रह्ते हैं। मनुष्य को सिर उठा कर जीना है तो शृ कृष्ण जी का कुरुक्षेत्र मे अर्जुन को दिया संदेश याद रखना होगा।
@DrMohanIND इतना ही काफी है कि जब कोई सिर पर ही आ चड़े और अपनी जान पर आ बने तो पराक्रम दिखाना होगा न कि अन्य किसी की प्रतीक्षा क्योंकि तब तक की जब तक कोई आये बचाहे के लिये, अपने प्राणों से ही हाथ धो बैठो। आप मरे जग्ग परलो( प्रलय)। वेदों मे पराक्रम को बार बार उद्धृत किया गया है। पराक्रम।
@Babymishra_ भारत के लोग भी कैसे हैं। वेदों का ज्ञान त्याग दिया। ऋग्वेद सामवेद यजुर्वेद अथर्ववेद मे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र का सम्पूर्ण ज्ञान मानवता के आधार पर दिया गया है। वेदों मे किसी मत मजहब का नां नही, केवल एक सत्य की ही महिमा गायी गयी है।वेदपढो।मनुर्भव। ईश्वर, जीव, पृकृति क्या है,जानो।
@margdata8705 ब्राह्मण का अर्थ है जो वेदों को पढ़ कर आचरण कर्ता है। आज कितने लोग वेदों को जानते पढते है। ब्राह्मण कोई समुदाय नही बल्कि वेदों के ज्ञान को जानने वाला व्यक्ति होता है। आज भारत मे भ्रम का बोलबाला है।अज्ञान रूपी धूल की आन्धी मे कुछ भी स्पष्ट नही, वेदों के सिवा। वेदों को पढना होगा।
@news24tvchannel@priyankagandhi भारतमे राजनीती, राजनेता,कुछ भी करें, कहें,इस पर क्या अंकुश है? देश अव्यवस्था की ओर निरन्तर अग्रसर हो रहा है। जो अत्यन्त आवशयक काम हैं, उन पर सरकार जा ध्यान नही, जैसे सडक यातायात का सुचारु रूप से चलाना। पार्टियों के नेता अपनी शान बनाने के लिये एक दूसरे को नीचा दिखाने मे लगे हैं।
@Lakhanmeena1918 सनातन धर्म के बारे बहुत कं लोग ही ज्ञान रखते हैं। सनातन धर्म का आधार वेद ज्ञान है। चार वेदों मे जीवन जीने का ज्ञान दिया गया है उसको कम लोग जानते हैं। टि वी debates से पता चलता है कि अपने को सनातन कहने वाले दिग्गजों नेभी शायद कभी वेदों को पढा हो।भारत मे बहुत अव्यवस्था फैल चुकी है।
@grafidon@RahulGandhi भारत की वर्तमान समस्याये है सडक पर अव्यवस्थित यातायात। फुटपाथ पर दुकाने।गरीब और गरीबी के नां पर भूमि पर कब्जा करना। भारत मे घर से बाहर का जीवन अति अव्यवस्थित हो गया है। इसका कौन उत्तरदायी है। पार्कों मे भी चैन नही, क्योंकि क्रिकेट फुटबाल्ल का बॉल कभी भी सिर फोड सकता है।वंदे भारत।
@news24tvchannel भारत की समस्या धर्म नही है। भारत की समस्या सड़कों पर अव्यवस्थित परिवहन संचालन है। शासन,प्रशासन और जनता ,सभी इस समस्या को गम्भीरता से नही लेते।घंटों के हिसाब से सडक पर जाम लगते हैं किन्तू कोई भी कारण को ढूढ़ कर उसका निवारण नही करता।फुटपाथ पर दुकाने सजी हैं पैदल चलना दूभर।यह अधर्म।