भारत की नारीशक्ति राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। हमारी माताएं, बहनें और बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी अद्भुत प्रतिभा और कौशल से मां भारती का गौरव बढ़ा रही हैं।
नारी त्रैलोक्यजननी
नारी त्रैलोक्यरूपिणी।
नारी त्रिभुवनाधारा
नारी शक्तिस्वरूपिणी॥
#12YearsOfNariShakti
कृषि केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पोषण का मूल आधार है। हमारे किसान भाई-बहनों का पसीना जब मिट्टी में मिलता है तो अन्न बनकर देशवासियों के जीवन को संबल देता है।
ते कृषिं च सस्यं च मनुष्या उप जीवन्ति।कृष्टराधिरुपजीवनीयो भवति य एवं वेद॥
#12YearsOfKisanSamriddhi
जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी कसौटी है। विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा के साथ निरंतर कार्य करने वाला व्यक्ति ही जनविश्वास अर्जित करता है।
सदानुरक्तप्रकृतिः प्रजापालनतत्परः।
विनीतात्मा हि नृपतिर्भूयसी श्रियमश्नुते॥
Tonight, a prayer for the mother of Sepoy Janjal Pravin Prabhakar receiving her son’s Kirti Chakra. Young Sepoy Janjal was killed in action in July 2024 after killing 2 terrorists in Kulgam, J&K. 💔🇮🇳
राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है। बीते 12 वर्षों में 'सबका साथ, सबका विकास' की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं।
#12YearsOfSeva
आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते।
हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥
प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है। इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते।
तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥
प्रकृति का संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों का भी अभिन्न हिस्सा है।
मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः।
माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥
योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से जीवन संतुलित और ऊर्जावान बनता है।
योगेन चित्तस्य पदेन वाचां
मलं शरीरस्य च वैद्यकेन।
योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां
पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥
जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। भारतवासियों के इसी सामूहिक संकल्प से आज देश उन्नति की नित-नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च।
धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥
दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।
निश्चित्य यः प्रक्रमते
नान्तर्वसति कर्मणः।
अबन्ध्यकालो वश्यात्मा
स वै पण्डित उच्यते॥
At a very young age,a bramachari named Brihaspati (Just 10 years of age), who is performing his duties as an 'Adhvaryu' in 'Purnamaseshti'. 😊🙏🕉️
His parents are Ahitagni, Sashikala and Gyanendra Sapakota. Words are less to express the agility and devotion of this Vatu.
Thread.
जनगणना केवल जनसंख्या की गणना नही, अपितु राष्ट्र की सांस्कृतिक, भाषिक एवं सामाजिक पहचान का महत्त्वपूर्ण आधार है। भारत की समृद्ध ज्ञानपरम्परा और देववाणी संस्कृत हमारी अमूल्य धरोहर हैं। अतः जब जनगणना अधिकारी आपके घर आएँ, तब भाषा संबंधी जानकारी में निःसंकोच संस्कृत का उल्लेख करें।
‘मम भाषा संस्कृतम्’ एवं ‘अस्माकं भाषा संस्कृतम्’ कहकर संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और राष्ट्रीय पुनर्जागरण में अपना योगदान दें।
संस्कृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की सांस्कृतिक चेतना है। जनगणना में संस्कृत का सही उल्लेख हमारी अस्मिता, हमारी परम्परा और हमारी ज्ञानपरम्परा को सशक्त करेगा।
आइए, जनगणना 2027 को संस्कृत जागरण का जन-अभियान बनाएं।
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— प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी
कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
@shrivarakhedi@ragamuki
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विनम्रता, क्षमाशीलता और उत्तम आचरण ही व्यक्तित्व के सच्चे आभूषण हैं। इन गुणों के साथ ही आज देशवासी विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में निरंतर जुटे हैं।
तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता।
भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।
Central Sanskrit University launches IKS-funded internship on Indian Aesthetic Science in Living Traditions......
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महान क्रांतिकारी और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक वीर सावरकर जी को उनकी जयंती पर सादर नमन! वीरता और बौद्धिकता से भरा उनका व्यक्तित्व देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
अनन्तोद्भूतभूतौघसङ्कुले भूतलेऽखिले।
शस्त्रे शास्त्रे त्रिचतुराश्चतुरा यदि मादृशाः।।
निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।
यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात् ।
अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थान् निवर्तते ।।