आज सबसे बड़ी चुनौती अब जंतर मंतर पर धरनास्थल खाली हो गया युवा सब अपने अपने घर पहुच रहे हैं
लेकिन उस जुनैद का क्या जिसने 37 दिन पूरे इस आंदोलन में इन सब युवाओ को खाना खिलाया पानी पिलाया पूरे आंदोलन में अपनी इंसानियत की सेवा दिया ।
उसके साथ बहुत बुरा हो गया पिता बहन रिश्तेदार सबको पुलिस गिरफ्तार कर लिया उठाकर ले गयी ।
उसका क्या दोष था क्या वी मुस्लिम था इस कारण उसको टोपी की और मुस्लिम होने की सजा मिली कब तक मुस्लिम समाज को देशभक्ति और अपनी पहचान बतानी पड़ेगी
कब तक मुस्लिम समुदाय के साथ इस देश मे यह नफरत की राजनीति होगी बताओ जवाब दो और जुनैद को न्याय दिलाओ अब सब मिलकर।
#NEETExamProtest#DharmendraPradhan
The journey is far from over, and the struggle for change continues. History has often shown that lasting change begins with ordinary people who decide to speak up.
@PradeepMaikhur3@narendramodi Wahi hai na jo so Raha ho use jagaya ja sakta hai, lekin jo jaan puchkar sone ki acting kar raha ho use ni jagaya ja sakta.
@PradeepMaikhur3@narendramodi Are bhaiya, ye to kaam hi hai government ka, ab aap btao teacher ka kaam h padhana, to kya agar wo padhaye to unke liye taali bajaye, government ka jo kaam hi h karna, wo to karna hi chahiye, or modi government chup hi rahti jab tak parliament tak protest ni hoti,
@DDNewslive@narendramodi Logo ne apne reel khush hokar nahi dekhe, ye dekhne k liye dekhe ki aap ne sab me 20 July ko jo students k sath hua or dharmendra pradhan k registration k baare me kya kaha.. but again you failed,, and ab aap log kisi bhi tarah ki narrative set nahi kar payenge so don't even try
आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है।
हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा।
हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया।
इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है।
कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।”
यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी।
यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है?
हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है?
यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है।
यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।
सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे।
#JantarMantar
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@PTI_News@ANI@ians_india@thewire_in@IndianExpress@ravish_journo@prakashraaj@CJP_for_India@INCIndia@BJP4India@INCDelhi@DelhiPolice@_YogendraYadav@abhijeet_dipke@SauravDassss@srinivasiyc@UdayBhanuIYC
His name is Sarthak Goswami, and I believe the entire country needs to watch his reporting, understand it, and become more aware. If this isn't stopped now, it may never be stopped.
This video gives you an idea of how dangerous ethanol factories can be. Not only that, producing ethanol also consumes a huge amount of water, as many of you may already know.
The Ethanol Minister seems to be prioritizing personal interests over the risks of pollution and worsening water shortages. Across the country, many people oppose ethanol blending—except, it seems, the Ethanol Minister
and his son.
What are your thoughts on this?🤔
@RiseofBurnol@protagonist_xi Tumhare ghar k bachhe neet paper leak se hi doctor Bane honge,, petrol 200 hone se fark ni padega kyuki BJP ne tumko bhi kharid liya hoga, and haa now a days it's not about party it's about basic rights