Stop punishing women for the crimes committed against them.
Across our country, women are afraid to walk the streets, afraid of being harassed, afraid of being raped. And the government’s answer: stay at home.
This is patriarchy at work: a system that blames the victim and shields the criminal. It is time to smash it.
The solution is not to lock women inside. It is to make our streets safe, to confront the mindset of men who mistreat women, and to punish those who attack them, swiftly and without exception.
Thousands of students and young people are on the streets demanding safety for women. I urge even more young women, especially GenZ across India to come out in stronger numbers.
This government is deaf to your pain and will only listen when it’s under pressure.
Peaceful protest is your democratic right, and I stand with you wholeheartedly.
यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए।
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं हैं।
आज मैं इनकी झुग्गी में गया और सीधे इन्हीं से सुना कि चुनाव आयोग ने इनके साथ क्या किया है।
SDM से फ़ोन पर मैंने यही कहा - मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। ख़ुद CEC ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि "हाउस नंबर 0" बेघरों के लिए है। फिर भी 727 लोगों का नाम काट दिया गया।
यह SIR नहीं - यह वोट चोरी का तरीक़ा है। जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताक़त छीनी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार तो जाएँगे। पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा।
#VoteChori
दिल्ली की BJP सरकार के एक मंत्री वीडियो में एक नौजवान को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं।
उसका गुनाह? वो वीडियो बना रहा था।
मंत्री के सामने सड़क खोदकर दिखाई जा रही थी, और उसके हाथ में कैमरा था।
ये उस सत्ता का चेहरा है जिसे अब वोटर से डर लगना बंद हो गया है।
सड़क पर सवाल पूछो - थप्पड़।
पेपर लीक पर सवाल पूछो - लाठी।
संसद में सवाल पूछो - माइक बंद।
ये लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि इन्हें अब ये डर ही नहीं कि चुनाव इन्हें हटा सकता है। वोट चोरी यही ख़रीदती है - सिर्फ़ नतीजा नहीं, उसके बाद आने वाला अहंकार भी।
जो सरकार जीत को पक्का मान लेती है, उसे आपकी रज़ामंदी नहीं चाहिए - आपकी ख़ामोशी और अंधभक्ति चाहिए।
First, Gyanesh Kumar - then a serving IAS officer - was used to recruit for the BJP.
Then Modi and Shah made him the umpire and put him in charge of match-fixing India's elections.
The vote is the foundation of Indian democracy.
From the vote flows the power of our Constitution, the authority of our laws, and the legitimacy of our public institutions - this chain defines modern India.
Today this chain is broken, and this has never happened in India before. By destroying the vote, this government and the Election Commission have attacked the expression of every single Indian.
Everything this government has done on the strength of stolen votes is illegal. An MP elected through vote chori holds an illegitimate seat, and every law passed with that MP's support is an illegitimate law.
मैं तीन साल से वोट चोरी का पर्दाफ़ाश करता आ रहा हूँ। अब चुनाव आयुक्त खुद इसे स्वीकार कर सच्चाई उजागर कर रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार ने देशद्रोह किया है। वो अभी इस्तीफ़ा दें और approver बन जाएं।
वोट चोरी की साज़िश में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पूरी जांच होगी।
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 जी,
इंदौर में ‘छात्रों की गूँज’ कार्यक्रम में OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27% OBC आरक्षण के तहत 13% पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं।
सभी छात्र बहुत पीड़ा में हैं - चार साल से अधिक समय से इंतज़ार कर रहे इन युवाओं का कीमती वक्त अब और ज़ाया नहीं होना चाहिए।
उनकी बात सुनिए, सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27% OBC आरक्षण लागू कीजिए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति दीजिए।
Vote Chori is the most serious anti-national act.
वोट चोरी सबसे बड़ा देशद्रोह है।
India is not only the biggest but the greatest democracy in the world.
BJP and the Election Commission are colluding to destroy our democracy and rob people of their voice.
Vote chori is a crime against the Indian people and a direct attack on our constitution.
The BJP, RSS and EC who organised it have committed an act of treason.
Justice will be served.
“उस मासूम की क्या गलती थी?”
सत्य निकेतन की त्रासदी में अपने बेटे, अर्पित जाज, को खोने वाला परिवार डबडबाई आंखों से यही सवाल पूछ रहा है।
अगर अच्छे और सुरक्षित हॉस्टल होते, तो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी खतरनाक जगह में रखने के लिए मजबूर न होना पड़ता। और अगर सुरक्षा मानकों का सच में पालन होता, तो शायद यह त्रासदी होती ही नहीं - एक ऐसी त्रासदी, जिसकी कल्पना उन बच्चों और उनके माता-पिता ने सपने में भी नहीं की होगी।
सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से भरे कई परिवारों को उजाड़ दिया।
अर्पित का परिवार भी पूरे देश की तरह जवाबदेही मांग रहा है। वे चाहते हैं कि छात्रों की जिंदगी की जिम्मेदारी तय हो, ताकि फिर किसी माता-पिता को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द न सहना पड़े।
सिस्टम से मेरा सीधा सवाल है: नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे? छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची?
"सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है - हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?"
यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा।
गाँव से पढ़ने शहर आई। हॉस्टल है नहीं, तो PG में रहना पड़ता है। सिर्फ़ सुरक्षित रहने में लाखों ख़र्च हो जाते हैं। हर महीने किराए की चिंता, और बेघर होने का डर - इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है।
कई लड़कियाँ इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं। सिर्फ़ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है।
और आवास भत्ता? महंगाई के साथ बढ़ता नहीं, ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
@narendramodi जी - उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है आपके पास?
देश पर एक system का कब्ज़ा है - परत दर परत।
कौन है ये सिस्टम?
RSS और "हम दो, हमारे दो" की अगुवाई में गिनती के लोगों ने मिल कर भारत की हर संस्था पर अपना नियंत्रण कर लिया है।
सरकार हो, व्यापार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, खेल हो, मीडिया हो, न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या bureaucracy - इस सिस्टम में हुनर नहीं, पैसा और पहुंच मायने रखता है।
इस क़ब्ज़े के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ छात्रों की आवाज़ ही सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसीलिए system को students से खतरा है - क्योंकि वो सवाल पूछते हैं, जवाबदेही मांगते हैं।
इसी डर से सिस्टम छात्र नहीं, अंधभक्त चाहता है - छात्रों को प्रताड़ित करता है, अंधभक्त को बढ़ावा देता है, ताकि कोई सवाल न उठे और मनमानी चलती रहे।
#ChhatronKiGoonj
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कोई संयोग नहीं, राजनीतिक प्रतिशोध है - लोकतंत्र की हत्या है।
BJP का निष्पक्ष चुनाव में भरोसा ही नहीं - इसलिए कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी और कभी पार्टी चोरी से सत्ता बचाना चाहती है।
वो चुनाव नहीं लड़ना चाहते, चुनावी मुकाबला ही खत्म कर देना चाहते हैं।
कांग्रेस न डरेगी, न झुकेगी।
हम लड़ेंगे भी, जीतेंगे भी।
दिल्ली में 17 साल की युवती के साथ गैंगरेप हुआ, उसकी हत्या कर शव खुले मैदान में फेंक दिया गया। राजधानी में इतनी बड़ी दरिंदगी और पुलिस को कई दिनों तक भनक नहीं लगती।
दुर्भाग्य है कि दिल्ली आज राजधानी नहीं, महिलाओं के लिए हर दिन की खौफनाक कहानी बनकर रह गई है।
अमित शाह जी, दिल्ली पुलिस आपके अधीन है। महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
या दिल्ली पुलिस का काम सिर्फ़ आम नागरिकों को डराना-धमकाना रह गया है? क्योंकि अपराधी तो बेखौफ घूम रहे हैं।
दरिंदों की तत्काल गिरफ्तारी हो, कड़ी कार्रवाई और सज़ा मिले, और इस आपराधिक गैर-जिम्मेदारी की जवाबदेही तय हो।
महिलाओं की सुरक्षा के बिना भारत आगे नहीं बढ़ सकता।