मैंने भी डिम्पल यादल को इतने गुस्से में नहीं देखा। डिम्पल जो बात कह रही हैं किसी का भी सब्र जवाब दे सकता है मगर वे आपे से बाहर नहीं हैं। अपनी बात मज़बूती से रख रही हैं। एक युवा लड़की जिस भरोसे के साथ महिला सांसद से शिकायत करती है, महिला सांसद उस भरोसे को बनाए रखती हैं।
गोल्ड मेडलिस्ट युवा बेरोज़गारी के चलते आत्महsत्या कर रहे हैं; क्या ये हालात सरकार के ख़िलाफ़ उठ खड़े होने के लिए काफ़ी नहीं हैं?
देशद्रोही अंधभक्तों को सरकार के ख़िलाफ़ कुछ भी नहीं सुनना है, लेकिन आप तो देशभक्त हैं! आप अपने देश की ये दुर्दशा चुपचाप कैसे देख सकते हैं?
भीड़ का हिस्सा होना
हर बार बुरा नहीं होता
जरूरी नहीं की भीड़ का साथ देना
आपकी अज्ञानता का सूचक या फिर
डर की निशानी ही समझा जाए
अकेला चलना
लीक से हटकर खुद की नई पहचान बनाना
अच्छा है मगर!
उस वक्त अपने चेहरे की परवाह किए बिना
ओढ लेना भीड़ का चेहरा
जब उसके माथे पर लिखा देखो
भूख, गरीबी, बेरोजगारी, अन्याय, तिरस्कार, बेबसी
जब भीड़ का दुख तुम्हें अपना ही दुख लगे
अपने जैसे हजारों, लाखों का दुख लगे
तब बिना एक पल गंवाए
हो जाना उन हजारों, लाखों में तुम भी शामिल
जब किसी एक कमजोर कंधे पर अचानक
आ पड़ा हो दुख का विशाल पहाड़
उसे सहारा देने को
बेझिझक आगे बढ़ा देना अपना कंधा
सुनो!
जब किसी की पीड़ा अपने सुख से बड़ी जानो
उतार फेंकना अपनी सीमाओं का कवच
याद रखना
जब लक्ष्य समुंदर से भी विशाल हों
उन्हें समूह बनकर ही पार किया जा सकता है
अगर भीड़ के पास भीड़ बन जानें के अलावा
कोई दूसरा मार्ग शेष ही ना बचा हो
या फिर तुम्हें भीड़ ना होने पर भी
समझा जाता रहा हो मात्र भीड़
जब सुनने वाला हो गया हो बहरा
या एक अकेले की आवाज बेअसर हो अपनी बात कहने में
तब भीड़ का स्वर बन कर आकाश गूंजा देना
जब किसी शिकारी के मजबूत जबड़े से छीन कर
लाने पड़ जाएँ अपने अधिकार
भीड़ को जरूरत होगी तुम्हारे हाथों की
उस समय तुम सहयोग के लिए निःसंकोच अपनी बाहें फैला देना
जब भेड़ समझ कर उसके रेशों की तरह हर कोई
नोचने में लगा हो तुम्हारी देह से चमड़ा
उस वक्त भीड़ बन कर ही बचाया जा सकता है अस्तित्व
शक्ति और सत्ता के मद में चूर हाथी
जब दुर्बल चींटी जान कर पैरो तले रोंदने लगे तुम्हें
उस पल कतारबद्ध हो चढ़ जाना उसके मस्तक तक
याद रखना भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता
मगर आवाज और ताकत जरूर होती है।
~ चित्रा पंवार
कौन कैसा रिपोर्टर है उसको तो पहचानो भाई 🙄🙏
@Abhinav_Pan जी एक अच्छे रिपोर्टर है, निष्पक्ष पत्रकारिता करते हैं, युवा पीढ़ी को निष्पक्षता का हमेशा सपोर्ट करना चाहिए।
आज इन पुलिस वाले गुंडे अपनी सारी हदे पार कर दी, इन्होने क्रूरता कि ऐसी तस्वीर दिखाई कि आज इन पर से विश्वास ही हट गया कि ये किसी कि जान भी बचा सकते है।
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