यह फैसला क्यों दिया गया ? क्योंकि प्रबंधकों की तरफ से जो वकील था वह भारत सरकार की तरफ से (solicitor general) पब्लिक प्रोसेक्यूटर तुषार मेहता अपनी बात रखने आया था।
अब यह बात तो सबको पता है कि सभी लोगों को पदोन्नति चाहिए, सभी लोगों को ऊंची पहचान चाहिए।
न्यायपालिका न्याय के मंदिर माना जाता है । तो मंदिर में भगवान थोड़े ना सबको मिलते हैं वहां तो प्रसाद भी उन्हीं को मिलता है जो पंक्ति में सबसे आगे रहते हैं या फिर पैसे वाले को , पंक्ति में पीछे वाले को तो प्रसाद भी नहीं मिलता।
अंदरूनी खबर तो यह है कि इस फैसले के बाद न्यायाधीश महोदय उस एडवोकेट के साथ फोटो खिंचवाने गए थे। (होते हैं ये सब )
बचपन में एक भ्रांतियां सुनाया जाता था कि न्यायाधीश फैसले के बाद कलाम की नीव तोड़ देते हैं। तो महोदय मत तोड़िए गा क्योंकि अभी आगे बहुत सारा फैसला सुनना है और इस कलम की बहुत जरूरत पड़ने वाली है।
इस फैसले ने, ना ही देश में दिए गए नागरिक को संवैधानिक अधिकार को ध्यान में रखा गया और ना ही हमारे पक्ष को सुना गया।
पूरी फैसला आप नीचे के दिए गए संलग्न फोटो में केस संख्या पर दिल्ली हाई कोर्ट के website पर जाकर पढ़ सकते हैं।
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[भारत के my l@'d की न्याय]
दिनांक 16 सितंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय में एक अर्जी दायर किया गया जिसमें AIESL के इंजीनियरिंग विभाग के कर्मचारियों के द्वारा ऑल इंडिया एयरक्राफ्ट मेंटिनेस इंजीनियरिंग यूनियन(AIAMEU )के बैनर तले अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रोक लगाने की मांग की गई।
यह याचिका 16 को दायर की गई। 17 को सुनवाई होनी थी परंतु हुआ नहीं , अगले दिन 18 को नई याचिका की पहले नंबर पर सुनवाई हुई और उसी दिन फैसला भी आ गया।
खैर न्यायाधीश महोदय को फैसला देना था उन्होंने दे दिया और हड़ताल पर रोक लगा दिया गया।
न्यायाधीश महोदय का फैसला का आधार इस तरीका से।
1 सबसे पहला आधार (PUS) सार्वजनिक उपयोगिता के आधार पर दिया गया अर्थात जिसमें देश की जनता का सीधा-सीधा जुड़ाव या उस पर निर्भर हो। तो न्यायाधीश महोदय यह जरूरी नहीं समझे कि। क्या MRO (psu) जनता से सीधा जुड़ाव कैसे हैं! और यह Pus कैसे हो गया काश इस पर कोई सवाल कंपनी से ही कर लेते ।
2 फैसले का दूसरा आधार एयरफोर्स , नेवी , DRDO के विमान( लड़ाकू विमान छोड़कर) से रख रखाव का था।
बात तो सही है परंतु इतनी महत्वपूर्ण क्षेत्र के विमान के रखरखाव क्या संविदा कर्मचारियों से द्वारा करवाया जाता है? क्या उस विमान का रखरखाव के लिए हमेशा के लिए AIESL के पास है या कुछ समय के लिए आता जाता है?और जब इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र का विमान रख रखाव जो कर्मचारी कर रहा है क्या उसको ज्यादा सुविधाएं और नहीं मिलना चाहिए था ?
3 अब इस फैसले का तीसरा और महत्वपूर्ण आधार पर - श्रम आयुक्त के पास चल रहे हैं समझौता के समय हड़ताल पर नहीं जा सकते। तो न्यायाधीश महोदय समझोता तो 5 बार से ज्यादा हो चुका है परंतु परिणाम कुछ भी नहीं निकला। हालत तो यह हो गया है कि यूनियन के प्रतिनिधि जब श्रम आयुक्त के कार्यालय जाते हैं , तो दूर से ही वहां के अधिकारी बता देते हैं कि भाई आपके प्रबंधक कुछ कर नहीं पा रहे हैं, और मेरे हाथ बंधे हुए हैं मेरी शक्ति सीमित है, तो मैं क्या करूं? और कागजात पर कागजात जमा हो रहा है ।
यहां तक के कि श्रम आयुक्त के पहले समझौते का हजार दिन से ज्यादा हो गया है परंतु कोई निर्णय नहीं आया।
4. इस फैसले में जज की एक असीम शक्ति का उपयोग किया गया है । मामला यह है कि 2 मई को स्थाई करने के लिए पांच सदस्य कमेटी का जो निर्माण किया गया था उसका रिपोर्ट 16 जुलाई को मैनेजमेंट को दिया गया कुछ दिन बाद यूनियन के द्वारा या आरोप लगाया गया कि इस रिपोर्ट में जालसाजी और छेड़छाड़ किया गया है जिसके संबंध में पुलिस के पास case भी किया गया। न्यायाधीश महोदय ने यहां पर भी यह लिख दिया कि - जालसाजी का आरोप निराधार और बेबुनियाद है । अब न्यायाधीश महोदय से बस यही सवाल है? कि आपके पास ऐसा कौन सी दिव्यज्ञान आ गया था, ऐसी कौन सी शक्ति आ गई थी, कि बिना जांच के 5 मिनट में आपको यह पता चल गया कि यह आरोप निराधार है।
खैर फैसला देना था उन्होंने यह भी दे दिया।
अब आते हैं एक शब्द पर एक अजीबोगरीब शब्द हालांकि आजकल इस देश में इसका प्रयोग बहुत हो रहा है और वह ' राष्ट्रीय सुरक्षा'। महोदय ने अपने फैसले में यह लिखा है कि हड़ताल राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है। तो न्यायाधीश महोदय बस इतना बता दीजिए कि जब कंपनी के लिए काम कर रहे हैं, तो ठीक और अगर हम न्याय की मांग के लिए हड़ताल पर जा रहे हैं तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हम खतरा हो गए !
खैर अभी देश में दौड़ ही ऐसा चल रहा है। इस देश में एक कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों को देश हित और देशभक्ति की बात सीख रहा है। भले वह शोषण कितना ही करें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है । क्योंकि मामला देशभक्ति का है।
अब बात दिल्ली उच्च न्यायालय की एक और case की करते हैं जो यूनियन के द्वारा 2023 में Wpc 12601/2023 दायर किया गया था। ताकि कानूनी मदद से न्याय मिल सके परंतु 3 साल होने के बाद भी इस याचिका पर आज तक एक भी सुनवाई नहीं हुई । हमारी 5 साल की नौकरी में जिसमें 3 साल से किए गए याचिका पर एक सुनवाई नहीं होती है।
यही बात यूनियन के तरफ से वकील चीख - चीख कर बोल रहे थे और अपनी बात पूरी सत्यता के साथ वहां रखने की कोशिश की। ना ही इस केस की सुनवाई हो रहा है और ना श्रम आयुक्त के समझौते के इतने दिनों बाद भी कोई परिणाम नहीं आया। न्याय के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और मजबूरी में यह लोग स्ट्राइक कर रहे हैं। यूनियन के तरफ से जो वकील थे, उनकी बात बिना सुने पहले ही फैसला दे दिया गया।
क्योंकि फैसला तो देना ही था।
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आदरणीय @dpsahuINC जी,
हम हृदय से आपका धन्यवाद करते हैं कि आपने हमारी समस्याएँ सुनीं और हमें अपना बहुमूल्य समय दिया। 🙏
यह संघर्ष हमारे अधिकारों, हमारे साथ हो रहे अन्याय और भेदभाव के खिलाफ है।
न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। ✊
भविष्य में भी आपके सहयोग और मार्गदर्शन की हम अपेक्षा रखते हैं।
धन्यवाद्
प्रशांत कुमार
सचिव ( AIAMEU)
Through storms, sweat and sleepless nights,
FTE engineers & technicians keep the skies safe.
Yet after carrying aviation on their backs,
they’re treated like third-class citizens.
This strike isn’t a choice — it’s survival
@aiameunion
#FTE2Permanent#UniteForPermanent#strike
@RamMNK@MoCA_GoI
When a government institution fails to honor a written agreement, it's not just the credibility of that institution at risk, but also that of its ministry and the entire government.
Plz find the reason that @aiameunion is being forced to go on strike again?
The maintenance engineers and technicians @aiameunion of the country’s largest aircraft maintenance and repair company has given a strike notice for Sep 19 over promotion and pay issues as the strength of contractual staff instead of permanent hirings keeps growing at AIESL. Move after a committee’s recommendations not implemented and were allegedly altered.