सोचिए अगर ये दो फुटेज नहीं होते तो लालू कल समाचारों में कहां होते. मीडिया भले ही लालू को इन बयानों के कारण फुटेज दे दे, लेकिन जनता अब बयान नहीं, मुद्दे पर ही वोट देती है, जो लालू यादव नहीं, नीतीश कुमार के पास है.
#15साल_बिहार_बदहाल#15साल_बिहार_ख़ुशहाल
नीतीश कुमार के मुद्दे और लालू के बयान
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बिहार विधानसभा की दो सीटों के लिए हो रहे उपचुनाव में @NitishKumar की चुनावी सभा हुई. 3 साल बाद @laluprasadrjd भी बिहार लौटे. दोनों नेताओं की पिछले 24 घंटे के बयानों पर गौर करें तो नीतीश कुमार बिहार को 30 साल आगे की तस्वीर दिखा रहे हैं,
समाजवाद के आंगन से निकले इन दोनों नेताओं के बीच मुद्दे इतने बदल गए हैं कि अब यह कहा जा सकता है कि नीतीश एक अविरल धारा हैं और लालू ठहरे हुए पानी. पिछले 24 घंटे में नीतीश कुमार जहां अपने कामों की चर्चा करते दिखे, वहीं लालू की चर्चा उनके अपशब्द और बेटे की नौटंकी को लेकर होती रही.
. जनता भाषण और वायदे पर नहीं अब आंकड़ों को टटोलती है और आंकड़े बताते हैं कि 2005 में 128 बच्चों पर बिहार में एक शिक्षक हुआ करता था, आज महज 28 छात्रों पर एक शिक्षक है. रोजगार भी मिला है, वेतन भी मिल रहा है, इसलिए वोट भी मिलेगा. क्योंकि,जनता जानती है.
#नीतीश_हैं_तो_हम_निश्चिंत_हैं
बिहार विधानसभा की दो सीटों के लिए कल मतदान होना है. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन राजद कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar जी की सभा में रोजगार को लेकर हंगामा किया. जनता ने उनका साथ न सभास्थल पर दिया न कल मतदान के समय देने वाली है.
पेंशन तय होने में ही वर्षों लग जाता था. हालात इतने बुरे थे कि वेतन मिलने की खबर अखबारों की सुर्खियां हुआ करती थी.आज रोजगार की बात हो रही है. लाखों शिक्षकों के पद भरे जा चुके हैं. हजारों पद पंचायत चुनाव के बाद भरे जाएंगे. अब वेतन तो समय से दिया ही जा रहा है, नौकरी भी दी जा रही है.