@SanjayAzadSln मैं अपने आप को इसलिए भी दुनिया का खुशनसीब इंसान मानता हूं कि मेरे पास आफताब अलवी भाई जैसी मुहब्बत करने वाली और मेरी क़दम क़दम पर सरपरस्ती करने वाली शख्सियत मौजूद है।
जो मेरे हर ग़म और खुशी में शामिल है। और मेरी ज़िन्दगी का अहम हिस्सा है। जो अपनी इतनी मसरूफ ज़िन्दगी में
Happy Birthday Bhai Aftab Alvi sahab
Executive Director Shriram Finance,
Founder Mehfil e tehzeeb o adab
आप जैसे जो ये अहबाब हुआ करते हैं।
सच तो यह है कि ये नायाब हुआ करते हैं।
@SanjayAzadSln
कभी इक़रार के मुजरिम कभी इनकार के मुजरिम।
कभी इस पार के मुजरिम कभी उस पार के मुजरिम।
कहीं भी हो इलेक्शन पर बनेंगे हम ही आखिर में।
किसी की जीत के मुजरिम किसी की हार के मुजरिम।
...........बिलाल सहारनपुरी.........
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जहां कबीरा और तुलसी ने प्रेम की वाणी बोली थी।
वहीं पे नफरत बांट रहे हैं हम अपनी औलादों में।
रोज़ी रोटी शिक्षा और इंसाफ़ जिन्हें देना था यहाँ।
वो सब मंदिर ढूंढ रहे हैं मस्जिद की बुनियादों में।
..........बिलाल सहारनपुरी........
#Sambhal
वक़्त ऐसा कि.... बग़ावत भी नहीं कर सकते,
और ज़ालिम की हिमायत भी नही कर सकते,
हम नें इंसाफ को...... मरते हुए देखा है मगर,
हम तो तौहीन ए अदालत भी नही कर सकते,،
नफ़रतें इतनी बढ़ा दी हैं...... सियासत ने यहाँ,
खुलके इज़हार ए मुहब्बत भी नही कर सकते।
Bilal Saharanpuri।
कैसे ख़िताब मिल गया उसको अमीर का
जिससे भरा ना जा सका कासा फक़ीर का
उसको मुशायरे में ज़रा दाद क्या मिली
खुद को समझ रहा है वो उस्ताद मीर का
उस वक़्त अपना कौन सा फ़िरक़ा बताएगा
जब सामना करेगा तु मुनकिर नकीर का
क़ाबू में रखना सीख ले अपनी ज़ुबान को ॥
आ जाये ना जलाल कहीं आसमान को ॥
चौदह सौ साल हो गए तारीख़ पढ़ के देख॥
कोई घटा सका ना मौहम्मद की शान को॥
….बिलाल सहारनपुरी ….
#arestNarsinghanand
आ जाऊं मैं भी देश के कुछ काम इसलिए ॥
निकला हूं सर से बांध के अपने कफन को मैं॥
कुल्लड़ में चाय पीने का यह भी है इक सबब ॥
होठों से चूम लेता हुँ ख़ाक ए वतन को में ॥
..........बिलाल सहारनपुरी .......
#JashneAzadi
क्या मर्तबा है आज भी देखा हुसैन का॥
बजता है दो जहान में डंका हुसैन का ॥
झुकता नहीं है जब कोई ज़ालिम के सामने ॥
आता है फ़िर ज़बान पे चर्चा हुसैन का ॥
हक़ बोलने की दे मुझे ताक़त मेरे खुदा ॥
आशिक़ बना दे मुझको भी सच्चा हुसैन का॥
...........बिलाल सहारनपुरी .........