बिहार के हजारों करोड़ के रिशु श्री महाघोटाले पर 21 साल की एनडीए सरकार हमारे सवालों के जवाब दें:-
1. एक मामूली सा ठेकेदार (रिशु श्री) कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से कैसे मैनेज कर रहा था? सरकार का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक क्या कर रहा थी? या अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था?
2. ED की जांच में सामने आए चैट्स से पता चलता है कि रिशु श्री कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के प्रभावशाली कॉकस को सत्ता और सर्वोच्च अधिकारियों का संरक्षण कैसे प्राप्त था? वह अधिकारियों को निर्देश किसकी शह पर देता था?
3. चार्जशीट में बड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया है? क्या ऐसा करने में देरी के पीछे क्या कोई राजनैतिक दबाव है अथवा सत्ता में बैठे लोगों को खुद पकड़े जाने का डर है?
4. दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया गया लेकिन चार्जशीट में उनका नाम नहीं है? उनकी तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?क्या सरकार को उनसे सबके पत्ते खोल देने की धमकी मिली है? सत्ता संरक्षित और पोषित भ्रष्टाचारियों को सजा से इम्यूनिटी क्यों दिया हुआ है?
5. वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद, क्या सरकार ने इस बात की समीक्षा की है कि इन्होंने अब तक कुल कितने करोड़ के सरकारी फंड को डायवर्ट किया? और अगर हां तो इस राशि को सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है?
6. आरोपी रिशु श्री पहले से तय करता था कि ठेका किसे मिलेगा और उसी हिसाब से विभागीय टेंडर की शर्तें (क्राइटेरिया) बदलवा देता था। क्या इस सिंडिकेट के सरगना मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय व निवास में बैठे अधिकारी थे और है?
7. जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर देने के बदले 2% से 3.5% तक का फिक्स्ड कमीशन चलता था। क्या यह भ्रष्टाचार में नग्न सरकार के "जीरो टॉलरेंस" के दावों की धज्जियां नहीं उड़ाता?
8. क्या सरकार रिशुश्री और उनसे संबंधित कंपनियों को मिले सभी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराएगी?
9. क्या यह संयोग है कि सारी Beneficiary कंपनियाँ गुजरात से है इसलिए उसे बचाया जा रहा है?
10. रिशु श्री द्वारा अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेशी यात्राओं, एयर टिकट और महंगे गिफ्ट्स का खर्च उठाने की बात सामने आई है। गृह विभाग, EOU, निगरानी और खुफिया विभाग इस वित्तीय लेन-देन से बेखबर क्यों थे?
11. छापेमारी में रिशु श्री के पास से 99 संपत्तियों के डीड और करोड़ों की नकदी/जेवरात मिले हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा कैसे चला गया?
12. सरकार केवल "छोटी मछलियों" और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को बलि का बकरा बना रही है। इस सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे असली राजनैतिक आकाओं और "अमृत"पान करने वाले अधिकारियों के नाम कब सामने लाए जाएंगे?
13. जिन विभागों में यह महाघोटाला हुआ, उनके विभागीय मंत्रियों ने अभी तक अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया है?
14. सरकार को सभी जानकारी उपलब्ध हो जाने के बाद भी एक साल से अधिक का समय लगा। ED के कहने के बावजूद भी बिहार पुलिस ने महीनों तक FIR क्यों दर्ज नहीं की थी? क्या यह देरी सबूतों को मिटाने, "अपनों" को बचाने और फाइलें दबाने के लिए की गई थी?
15. कुछ अधिकारी इस घोटाले को दबाने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा ले रहे है? बिहार सरकार के वकील रिशुश्री के ख़िलाफ़ कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हुए?
16. कोसी बेसिन विकास परियोजना और गुजरात की कंपनी को कोसी बराज का ठेका दिलाने में टेंडर माफिया रिशु श्री ने मदद की। बिहार के बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील प्रोजेक्ट में इतनी आसानी से भ्रष्टाचार कैसे हो जा रहा है?
17. क्या सरकार का पूरा आंतरिक ऑडिट सिस्टम और विजिलेंस विभाग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है जो इस स्केल के महाघोटाले को ससमय उजागर नहीं कर सकता या सभी इस भ्रष्टाचार में कहीं ना कहीं से लिप्त हैं?
18. जब राज्य में सब कुछ ई-टेंडरिंग के जरिए होता है, तो BJP-JDU सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा था?
19. एसवीयू ने 4000 पन्नों की चार्जशीट में सिर्फ 7 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है और कहा है कि अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह बाकी बचे रसूखदार अधिकारियों और नेताओं को "क्लीन चिट" देने की जल्दबाजी नहीं है तो क्या है?
20. यह NDA का संयोग कहिए या प्रयोग, सभी बड़े घोटालों में दबाब पड़ने पर अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी की दिखावटी गिरफ़्तारी करनी-करानी है या उसे बलि का बकरा बनाना है तो वह दलित-पिछड़े और मुस्लिम समुदाय का ही अधिकारी क्यों होता है?
हजारों करोड़ के रिशु श्री टेंडर महाघोटाले पर 21 साल की एनडीए सरकार मौन है।
हर बार एक बड़ा घोटाला उजागर होता है, कुछ छोटे किरानी-कर्मचारी गिरफ्तार होते है। लेकिन नीतीश-BJP-NDA के राज में इस संगठित संस्थागत भ्रष्टाचार के मुख्य सरगना, Master Mind, ताकतवर, प्रभावशाली और लाभार्थी लोग कभी भी गिरफ़्तार नहीं होते, उन तक कोई जाँच एजेंसी नहीं पहुंच पाती? चाहे वो एस्टीमेट घोटाला हो, सृजन घोटाला हो, CAG घोटाला हो या टेंडर घोटाला हो।
डॉक्टर कह रही हैं “अंडे बच्चों के ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी हैं और उसे बच्चों के खाने से नहीं हटाना चाहिए।”
हो सकता है NDA वाले अब डॉक्टर से ही माफ़ी मँगवा ले!
सात्विक भोजन के नाम पर इस्कॉन वालों को मलाई मिल रही है और ग़रीब बच्चों को कुपोषित बनाया जा रहा!
इसमें कोई दोराय नहीं है कि बिहार पुलिस ने फेक एनकाउंटर किया है। ये पहली घटना नहीं है इससे पहले भी कई फेक एनकाउंटर किए गए हैं। जाति को देखकर भी एनकाउंटर किए गए हैं। पुलिस थाने के अंदर भी कई लोगों की हत्या पुलिस द्वारा की गई हैं।
- श्री तेजस्वी यादव जी
बिहार का एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर इतना बर्बाद है कि शुभम कुमार जैसे प्रतिभाशाली युवाओं को पढ़ाई करने के लिए दिल्ली और कोटा जाना पड़ता है।
सम्राट चौधरी को पता हो कि शुभम की सफलता में बिहार सरकार का कोई योगदान नहीं है। न ही उस नरेंद्र मोदी का योगदान है, जिसका फोटो लगाया गया है।
क्रेडिट लेते समय शर्म आनी चाहिए।
नेताजी अपनी CV पर नज़र डालिए!
IPC धारा 420 ~ संपत्ति दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी
IPC धारा 468~ धोखधड़ी और जालसाज़ी
IPC धारा 477A ~ खातों में हेराफेरी
IPC धारा 471 ~ जाली दस्तावेज़ को असली के रूप में इस्तेमाल
सभी को अपने जैसा नहीं समझें!
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21. अगर मंत्री संतोष सुमन और उनकी विधायक पत्नी दीपा कुमारी को अलग-अलग बंगला आवंटित है तो लालू जी और राबड़ी देवी जी को अलग-अलग दो बंगले आवंटित क्यों नहीं हो सकते हैं?
22. सम्राट चौधरी को यह बताना चाहिए कि पटना में पांच सांसदों को किस नियमित के तहत बंगले आवंटित किये गये हैं जबकि पांचो सांसदों को दिल्ली में भी बड़े बंगले मिले हुए है। क्या पांचों सांसद अवैध कब्जा करके सरकारी आवास में रह रहे हैं।
जब महागठबंधन की सरकार थी तो हमने कभी भी ओछी राजनीति नहीं की? भवन निर्माण विभाग तत्कालीन उपमुख्यमंत्री श्री तेजस्वी यादव जी के पास रहने पर भी उन्होंने निवेदन करने पर कभी भी बीजेपी के वरीय नेताओं श्री प्रेम कुमार, नंदकिशोर यादव, मंगल पांडे और नितिन नवीन का आवास खाली नहीं कराया था लेकिन सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति को अपनी विषैली मानसिकता से दूषित कर रहे हैं।
लोकलाज और स्थापित लोकतांत्रिक मूल्यों और परंपराओं को त्याग कर सम्राट चौधरी अगर ऐसी ही द्वेषपूर्ण निम्नस्तरीय राजनीति करेंगे तो राष्ट्रीय जनता दल के लोग अपना आवास और सुरक्षा सम्राट चौधरी को वापस सौंप देंगे ताकि वो उन सभी आवासों और सुरक्षा को स्वयं के प्रयोग में ला सके।
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मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने अगल-बगल के बंगले को 1 अणे मार्ग में मिला लिया। सम्राट चौधरी का बंगला अब प्रधानमंत्री से भी बड़ा बंगला है। देश के सबसे गरीब राज्य बिहार के मुख्यमंत्री का बंगला, अब भारत का सबसे बड़ा आलीशान, भव्य और सात सितारा सरकारी बंगला है।
सम्राट चौधरी 15 एकड़ ज़मीन यानि 24 बीघा यानि 480 कट्टा जमीन पर सोते हैं। लेकिन इनको बिहार के दो पूर्व मुख्यमंत्री जिस बंगले में रहते हैं, वो खाली करवाना है।
सम्राट चौधरी से हमारे कुछ सवाल है वो स्वयं इसका जवाब दें कि:-
1. सम्राट चौधरी ने उपमुख्यमंत्री के लिए कर्णांकित 5, देशरत्न मार्ग को 1 अणे मार्ग में क्यों मिलाया? 2019 में पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार ने लिखित में बताया था कि यह बंगला उपमुख्यमंत्री के नाम कर्णांकित है। अब किस नियम के तहत सम्राट चौधरी ने इस आवास को 1 अणे मार्ग में मिलाया?
2. क्या सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री आवास का नाम बदल कर "लोक सेवक आवास" इसलिए किया ताकि अगल-बगल के अनेक बंगलों को इसमें मिलाकर सैकड़ों कट्टा जमीन पर जनता के पैसे से विलासिता से परिपूर्ण जीवन जी सके?
3. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से 3, टेलर रोड क्यों नहीं छुड़वाया? क्या यह सच नहीं है कि 3, टेलर रोड आवास को अभी कुछ दिन पूर्व ही किसान आयोग के अध्यक्ष के नाम से आवंटित किया है लेकिन आवास नितिन नबीन के ही कब्जे में है? किसान आयोग के अध्यक्ष को इतना बड़ा बंगला दिया गया है तो उसमें आवासीय क्यों नहीं है?
4. तरैया के विधायक जनक सिंह को मंत्री का आवास 28/10 हार्डिंग रोड क्यों दिया गया है?
5. पूर्व विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू को किस हैसियत से 23/10 आवंटित किया गया है? उसका आवास खाली क्यों नहीं कराया गया?
6. सांसद देवेश चंद्र ठाकुर को 1, टेलर रोड बंगला किस हैसियत से आवंटित किया गया है? MLC पद छोड़े हुए उन्हें दो साल से अधिक का समय हो चुका है लेकिन सम्राट चौधरी डर के मारे उनसे खाली नहीं करा सकता?
7. पूर्व मंत्री राजू सिंह को 11/13, मैंगल्स रोड, किस हैसियत से आवंटित किया गया है?
8. करणजीत सिंह विधायक को हार्डिंग रोड आवास किस हैसियत से आवंटित किया गया है?
9. मनोरमा देवी को 20/बी, हार्डिंग रोड किस हैसियत से आवंटित किया गया है?
10. पूर्व मंत्री कृष्ण कुमार मंटू को 17, हार्डिंग रोड किस हैसियत से आवंटित किया गया है?
11. दीपक कुमार (रिटायर्ड आई.ए.एस. ऑफिसर) को किस हैसियत से 3, पोलो रोड जैसा बड़ा बंगला आवंटित किया गया है?
12. सांसद संजय झा किस हैसियत से एम. स्टैंड रोड के सरकारी आवास में रहते हैं?
13. क्या सांसद उपेन्द्र कुशवाहा 24 एम स्ट्रैंड रोड में 2023 से ही अनाधिकृत रूप से नहीं रह रहे हैं? क्या कभी उन्हें आवास खाली करने के लिए नोटिस दिया गया? उपेन्द्र कुशवाहा की पत्नी और बेटे के नाम से दो अलग आवास और आवंटित है। उपेंद्र कुशवाहा परिवार को तीन आवास क्यों आवंटित किए गए हैं?
14. क्या सभी विधायक जो केंद्रीय पूल के बंगलों में अनाधिकृत रूप से रह रहे हैं उन्हें MLA फ्लैट में भी अलग से आवास आवंटित नहीं किया गया हैं?
15. आयोगों के कितने सदस्यों को विपक्षी विधायकों से बड़े आवास दिए गए है इसकी सूची भी सार्वजनिक करे।
16. जेडीयू की IT cell और उसके मुखिया किस हैसियत से सरकारी आवास से कार्यालय चला रहे है? वो आवास किसके नाम आवंटित है?
17. मंत्री नंदकिशोर राम को इसी सरकार ने 11 मई को 21 हार्डिंग रोड, आवास आवंटित किया था, फिर उसी मंत्री को दुबारा 27 मई को 10 सर्कुलर आवास आवंटित क्यों किया गया? क्या इस विवाद में डालने के लिए एक दलित मंत्री की आड़ ली जा रही है?
18. जीतनराम मांझी और नीतीश कुमार दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हैं। दोनों के नाम से बंगला आवंटित है, जबकि दोनों सांसद भी हैं। कोर्ट का आदेश है कि पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला आवंटित नहीं किया जा सकता तो फिर अब नीतीश कुमार और जीतनराम मांझी के बिहार विधानमंडल का सदस्य नहीं रहने के बावजूद पटना में बंगला आवंटित क्यों किया गया है?
19. सम्राट चौधरी को अब यह बताना चाहिए कि इन दोनों को किस हैसियत से पटना में भी और दिल्ली में भी बंगला आवंटित है? यदि दोनों को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला आवंटित है तो लालू जी को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला क्यों नहीं मिलना चाहिए? सर्वविदित है कि लालू जी और राबड़ी जी दोनों पूर्व मुख्यमंत्री है लेकिन आवास एक ही आवंटित है।
20. अगर सरकार आदरणीया राबड़ी देवी जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में नया बंगला आवंटित करती है तो भी श्री लालू यादव पूर्व मुख्यमंत्री के नाते आवास के अधिकारी हैं ही। सम्राट चौधरी अपनी सहूलियत अनुसार नियम नहीं बना सकते।
विद्यार्थियों के पेपर लीक हो रहे हैं।
विपक्ष के सांसदों पर हमले हो रहे हैं।
सवाल पूछने वाले छात्रों को पाकिस्तानी घोषित किया जा रहा है।
जो शिक्षक विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं, उनके ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है।
क्या देश में लोकतंत्र का ढोंग चल रहा है?