कर्मणा मनसा वाचा
यदभीक्षणं निषेवते,
तदेवापहरत्येनं
तस्मात् कल्याणमाचरेत्।
मन, वचन और कर्म से हम निरंतर जिस के बारे में सोचते हैं, वह हमें अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। अतः हमें सदा शुभ का चिंतन करना चाहिए।
शुभ सोचें, शुभ कर्म करें,
शुभ का हर पल वरण करें।
'शुभ होना ही निश्चित है'
तुलसीदास की रामचरितमानस में शूद्र, गँवार, ढोल, पशु, नारी...के मायने क्या हैं?
जन्म में राम, मरण में राम. वाह में राम, आह में राम. उत्साह में राम, स्याह में राम...
जय सनातन संस्कृति
जय श्री राम 🚩
सुप्रभात मित्रों...
🙏🙏
.…यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा ‘आप’
शब्द का, उसके बाद ‘हम’ शब्द का और सबसे कम 'मैं'
शब्द का उपयोग करना चाहिए।
ये महसूस मत होने दो
कि आप अंदर से टूट चुके
हो! क्योंकि ...
लोग टूटे हुए मकान की
ईंट तक उठा ले जाते हैं।
जय श्री राम 🚩