बीजेपी को छोड़कर सारी विपक्षी पार्टियां बिहार वासियों और हिंदुओं से घृणा करती है। सभी बिहार वासियों और हिंदुओं से घृणा करने नेताओं का आपस में गठजोड़ है।
किसी भी जाति या समुदाय को खुलेआम गाली देना न सामाजिक न्याय है,न बहादुरी और न विचारों की लड़ाई। ब्राह्मण समाज को अपमानजनक शब्द कहे जा रहे हैं, तो उसकी उतनी ही स्पष्ट और कड़ी निंदा होनी चाहिए, जितनी किसी अन्य समुदाय के अपमान की होती है।
आवाज उठाने के लिए धन्यवाद @yogrishiramdev
जी
जंतर मंतर पर पूरे देश से आए युवा अकेले नहीं है
हम पूरी ताक़त के साथ खड़े है साथ
भोजन पानी रुकने की व्यवस्था हॉस्पिटल व अन्य कोई भी सकंट होने पर निसंकोच फ़ोन कीजिए
8882002222 प्रीत सिरोही
#JantarMantar
दिल्ली में सांसद चंद्रशेखर रावण की आज़ाद समाज पार्टी ने पत्रकार अजीत भारती के खिलाफ़ SC/ST एक्ट और IT एक्ट 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।
अजीत भारती पर ये कार्रवाई सरासर गलत है यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है जब इनके पास कोई तर्क नहीं बचता तो यह SC/ST एक्ट का सहारा लेते है।
ये रहा आईने अकबरी👇
मुग़ल काल में जिन जातियों को ज़मींदारी मिली उनमें हैं
-अहीर
-जाट
-गुर्जर
-कुर्मी
और आज ये सब जमींदार "पिछड़े" बनकर आरक्षण ले रहे हैं!
है ना कमाल??
ध्यान से देखिए आरक्षण किसे मिल रहा है !!
अगर वर्गीकरण होता तो ऐसा कभी नहीं होता !!
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC 70वीं) में चयनित अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों में
जाटव समाज – 111
वाल्मीकि समाज – सिर्फ 01
आरक्षण किसे मिल रहा है ?
एक ही कोटे के अंदर इतनी असमानता क्यों ?
गरीब और पिछड़े उप-समुदायों का हक कब तक छिना रहेगा ?
#BPSC #आरक्षण #वाल्मीकिसमाज #जाटव #सबकोबराबरी #Subcategorization
जो लोग हाशिए पर पड़े हैं, उन्हें उनका अधिकार और समान अवसर मिलना चाहिए। चाहे वे किसी भी जाति, समाज या देश के किसी भी क्षेत्र से आते हों, उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलना चाहिए।
ऐसा नहीं होना चाहिए कि शहरों में रहने वाले या कुछ विशेष परिवारों के लोग जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी जज बनते रहें, कुछ लोग हमेशा विधायक-सांसद बनते रहें और वंचित समाज के लोगों को सिर्फ एक फिक्स वोट बैंक समझकर छोड़ दिया जाए। सरकार को यह सोच बदलनी होगी कि ये लोग हमेशा हमें ही वोट देंगे।
आरक्षण के मुद्दे पर रविवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन, लखनऊ और दिल्ली में उमड़ी भीड़
आरक्षण के मुद्दे को लेकर दिल्ली, लखनऊ समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए।
वहीं, महाराष्ट्र के मालेगांव में एससी समुदाय से जुड़े लोगों ने SC आरक्षण में उप-वर्गीकरण के मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराया।
डिग्रियों का ढेर, लेकिन नौकरी नहीं
देश में सबसे ज्यादा डिग्रियां 11 साल में 16 इंटरव्यू
लेकिन आरक्षण न होने पर नौकरी नहीं मिल रही
आरक्षण की वजह से प्रतिभा का पतन हो रहा हे
डॉक्टर लक्ष्मण सिंह की कहानी
Reverse Discrimination क्या है? कब हुआ?
“भूरा बाल साफ करो” नारा बिहार की राजनीति में मुख्यत 1990 के दशक, खासकर मंडल राजनीति और लालू प्रसाद यादव के शुरुआती सत्ता काल से जोड़ा जाता है।
“भू-रा-बा-ला” का अर्थ भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और लाला/कायस्थ बताया जाता था।
जिसकी वजह से हमारे माता-पिता ने conscious decision कि हमारे सरनेम में भारती, रंजन, उत्कर्ष, समीर, प्रकाश आदि हमें जोड़ना पड़ा! ताकि हमारे नाम से हमारी जाति का पता ही ना चल सके।
मेहरबान, कदरदान, साहिबान……. हो जाइए सावधान…..
पूरे देश में मातंग, वाल्मीकि, भील, भिलाला, सहरिया, मुसहर, भुइयाँ, डोम, मेहतर भंगी, कोरी, बांसफोर, खरवार, गोंड, बैगा, कोरकू, कोल जैसे SC/ST समाज के लोग आरक्षण में वर्गीकरण के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।
इन गरीब पिछड़े समाज का हर वर्ग को साथ देना चाहिए। जो इनका विरोध करेगा वो दलित विरोधी मानसिकता से ग्रसित है।
NOTE- तस्वीर पुरानी है। वर्गीकरण के किसी आंदोलन से
इस लड़के, श्रेष्ठ ने GATE Aerospace Engineering में AIR 525 हासिल की, लेकिन आरक्षण के कारण उसे दाखिला नहीं मिल सका। देश के केवल पाँच IITs में Aerospace Engineering की पढ़ाई होती है।
उसने अपना पूरा एक साल खो दिया, दिन-रात मेहनत की और अगले साल और मजबूत वापसी करते हुए AIR 53 हासिल की। इसके बावजूद उसे अपने सपनों के कॉलेज IIT Madras में दाखिला नहीं मिल सका।
ज़रा उन कटऑफ्स को देखिए—किसी आरक्षित वर्ग के छात्र को 10,000 के आसपास की रैंक पर भी सीट मिल सकती है, जबकि कहीं अधिक प्रतिभाशाली और मेहनती छात्र को वर्षों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह व्यवस्था कितनी उचित है, इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
अगर भारत को विकसित राष्ट्र बनना है, तो योग्यता और उत्कृष्टता को अधिक प्राथमिकता देनी होगी। हम प्रतिभाशाली छात्रों के वर्षों को बर्बाद नहीं कर सकते।
योग्यता की जीत होनी चाहिए।
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