क्रांतिवीर मंगल पांडे जी ने 1857 की क्रांति का बिगुल फूंककर स्वसंस्कृति, स्वाभिमान और राष्ट्रहित के लिए संघर्ष की जनचेतना जागृत की। अंग्रेजी दमन और अन्याय से मां भारती को मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपने प्राणों तक की आहुति दे दी। उनके बलिदान से प्रज्वलित हुई क्रांति की चिंगारी आगे चलकर स्वतंत्रता की महाज्वाला में परिवर्तित हुई।
ऐसे अद्वितीय बलिदानी, अमर क्रांतिवीर मंगल पांडे जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
दिल्ली की लोकप्रिय, कर्मठ एवं जनसेवा के प्रति समर्पित माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती Rekha Gupta जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आपको उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, यशस्वी जीवन एवं निरंतर ऊर्जा प्रदान करें।💐
इंडोनेशिया, लाओस, कंबोडिया, बांग्लादेश, बहरीन, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, वियतनाम...
भारत केवल धरोहरों का पुनर्निर्माण नहीं कर रहा, बल्कि सभ्यताओं के बीच विश्वास, संस्कृति और आत्मीयता के उन संबंधों को नई मजबूती दे रहा है, जिन्होंने सदियों से दुनिया को एक-दूसरे से जोड़े रखा है।
🌱 एक पेड़ माँ के नाम 🌿
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी एवं प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के आह्वान पर जसराना विधान सभा के अपने प्रभार क्षेत्र पाड़म मण्डल में बृहद ब्रक्षा रोपण करने का काम किया गया।
तेलंगाना की प्रदेश कार्यसमिति बैठक के समापन सत्र में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष श्री एन रामचंद्र राव जी, केंद्रीय मंत्री श्री जी किशन रेड्डी जी एवं प्रदेश महामंत्री संगठन श्री चंद्रशेखर जी सहित पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।
@BJP4Telangana
Mon'n pran par dan seremoni pour remet bato patrol rapid apele Lespwar, bann Lanbilans ek Veikil litilite pour Lafors Defans Sesel (SDF) kot baz Gard Lakot Sesel ansanm avek Prezidan, Dokter Patrick Herminie.
@StateHouseSey
यशस्वी प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों से संवाद करेंगे।
जनभागीदारी के इस प्रेरक संवाद से आप भी जुड़िए...
🗓️ दिनांक: 28 जून, 2026 रविवार
⏰ समय: सुबह 11:00 बजे
#MannKiBaat
देश की एकता और अखंडता के प्रखर उपासक, जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के अग्रदूत डॉ. मुखर्जी ने जहाँ कश्मीर में 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' का मुखर विरोध किया, वहीं बंगाल भारत का ही हिस्सा रहे, इसके लिए भी संघर्ष किया। आज उनकी जन्मभूमि राष्ट्रप्रथम का संकल्प लेकर देश की सुरक्षा और अपनी विरासत की रक्षा की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कश्मीर से लेकर बंगाल तक, राष्ट्रनिर्माण के एकसूत्र में बँधकर यह देश उनके पदचिह्नों पर आगे बढ़ता रहेगा।