ओम शांति।शुभ नुमा शाम।कैसे हो।हम सब एक परम पिता की संतान है।रूहानी स्नेह से ही हम is जगत में जन्न त की रचना कर सकते है।वर्तमान तो दोजख है जिसे अपने अंदर बैठे हुवे शैतान ने रचा है।तो आओ हम सब रूहे एक खुदा को याद करे।
ओम शांति।सर्व आत्माये आपस में भाई भाई है।यह विश्व एक रूहानी परिवार है।एक परमात्मा की हम संतान है।जन्नत या हेवन हम इस धरती पर रूहानी प्यार से बना सकते है।कोशिश करे।
ओम शांति भाई जी।कैसे हो।आप सभी मेरे आत्मीय हो।आपका सुख दुख मै महसूस करता हू।क्यो कि हम सब एक ही नाव में बैठे है।जिसका खींवैया एक भगवान् है जो हम सब आत्माओंका पार लौकिक पिता है।आओ हम सब मिलकर उसे याद करे।