सोनम वांगचुक, जिसने कभी अपने लिए नहीं माँगा, कुछ कि पद चाहिए, सत्ता चाहिए।
अपनी ज़िंदगी देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए लड़ते रहे है और 15-16 दिनों से अनशन पर बैठे हैं!
अपने लिए नहीं, देश के लिए। देश के बच्चों के भविष्य के लिए! उसके बाद भी देश के नेताओं की सोई हुई संवेदनाएँ नहीं जाग पा रही।
सत्ता की ख़ामोशी बरकरार है।
भूख हड़ताल और अनशन भी अगर व्यवस्था को सुनाई नहीं दे रहा, तो एक आम नागरिक की आवाज़ की कीमत क्या ही होगी?
अब दर्द सिर्फ़ यह नहीं कि एक व्यक्ति अनशन पर है, बड़ा दर्द यह है कि देश धीरे-धीरे उस मुकाम पर पहुँच रहा है जहाँ जनता की पीड़ा का महत्व खत्म है और उस पर सत्ता हावी है।
सोचिए, आज अगर एक ऐसे व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी की जा सकती है, जिसने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, तो कल बेरोज़गार युवा, न्याय की गुहार लगाता परिवार, किसान, छात्र या कोई भी आम नागरिक किस उम्मीद से अपनी तकलीफ़ के लिए लड़ पाएगा और कौन उसकी सुनेगा?
लोकतंत्र का मतलब सिर्फ़ चुनाव है क्या? अगर सत्ता अपने शांत नागरिक की आवाज़ नहीं सुन रही, तो ये लोकतंत्र पर सवाल नहीं है?
और अगर वह आवाज़ भी अनसुनी होने लगे! तो यह चिंता सिर्फ़ पूरे देश को होनी चाहिए।
Be stand with Sonam Wangchuk
संयुक्त राष्ट्र (UN) के मुख्यालय, जिनेवा पहुँचने के दौरान स्विट्ज़रलैंड के ज़्यूरिख़ शहर के करीब स्थित विश्व प्रसिद्ध राइन फॉल्स का भ्रमण किया।
राइन फॉल्स, राइन नदी पर स्थित यूरोप के सबसे प्रसिद्ध और विशाल जलप्रपातों में से एक है। यह नदी आल्प्स पर्वतमाला से निकलकर कई देशों से होकर बहती है और यूरोप की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में गिनी जाती है।
साथियों, यूरोप के एक दिन के अनुभव ने बहुत कुछ सिखाया, उसमें सबसे बड़ी सीख यहां का अनुशासन हैं।
आप सभी के विश्वास और सहयोग से मुझे संयुक्त राष्ट्र (UN) के आदिवासी अधिकारों पर 13 जुलाई से 17 जुलाई तक आयोजित होने वाले विशेष मंच EMRIP के 19वें सत्र, जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में भारत के आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
यह केवल मेरा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों आदिवासियों की आवाज़ को विश्व पटल तक पहुँचाने का अवसर है।
मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि जल, जंगल, ज़मीन, संविधान, वनाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, भाषा, विस्थापन या आदिवासी समाज से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे व सुझाव मुझे अवश्य भेजें।
आपके सुझावों को यथासंभव संयुक्त राष्ट्र के इस वैश्विक मंच पर उठाने का प्रयास किया जाएगा। जोहार
सुपरस्टार शाहरुख खान का बेटा आर्यन खान अपने दोस्त ध्रुव जुरेल की पार्टी में गया था.
आर्यन खान ने इस पार्टी से इतनी शराब पी लिया, की बहार आने पर उसे चार चार लोग पकड़कर उसकी गाड़ी तक ले गए.
आर्यन खान इतने नशे में था कि वो ठीक से चल नही पा रहा था. अगर किसी ने सहारा नही दिया होता तो वो जमीन पर गिर जाता.
आर्यन खान ने शाहरुख खान का नाम मिट्टी में मिला दिया. शराब उतनी ही पीनी चाहिए थी जितनी पचा पाओ. मुंबई की भाषा इस व्यवहार को BEVDA (बेवड़ा) कहा जाता है.
आर्यन खान इससे पहले ड्रग्स मामले में फंस चुका था, जेल भी गया. बाप ने वकीलों पर करोड़ों रुपए खर्च कर बचाया. आज उसी बाप का सिर फिर झुका दिया.
जब सवर्ण प्रोटेस्ट करता है तो प्रशासन दांत निपोरते हुए उनके साथ हाहाहा करते हैं, पर जब दलित न्याय मांगता है तो यही पुलिसवाले उन्हें गाली देते हैं, थप्पड़ मारते हैं।
जाति और सत्ता का फर्क है बाबू। वर्ना अविनाश पांडेय की क्या औकात कि वह दलितों को बहन की गाली दे देता।
मैं इसीलिए कहता हूँ कि दलित समुदाय के लोग अपने घर में आग लगाकर पड़ोसी के महल में बैठकर खुश होने वाली सोच का दंश झेल रहे हैं। अगर समाज ने आज बसपा को कमजोर न किया होता, तो क्या एक IPS अफसर की इतनी औकात होती कि वह "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने, इनके पिता जी की रोड नहीं है" जैसी गालियां देता? क्या वह आंदोलन में खड़े युवाओं को थप्पड़ मारता और बंदी वाहन में घुसकर समाज के युवाओं पर अपना जातीय रौब दिखाता? चूंकि वह मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह का खास अफसर है, जाति से ब्राह्मण है, इसलिए सरकार उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
दलितों को हिंदू कहकर हिंदू एकता का नारा देने वाले लोगों का दोहरा चरित्र देखिए। आज वे खुलकर गालीबाज SSP अविनाश पांडेय के समर्थन में हैशटैग चला रहे हैं। इससे साफ सिद्ध होता है कि सवर्णों की हिंदू एकता का मतलब सिर्फ सवर्ण हितों को सुनिश्चित करना है। वरना जो द्विज हिंदू कल तक बिहार के कुख्यात अपराधी भरत तिवारी के लिए विलाप कर रहे थे, आज वे अविनाश पांडेय की गालीबाजी और गुंडागर्दी का समर्थन क्यों कर रहे हैं? सवर्ण प्रभुत्व ही इनकी हिंदू एकता का सार है; भाजपा सरकार और उसके अफसर इसी हित को बचाने के लिए काम कर रहे हैं।
कोई नियम तोड़े या कानून हाँथ में ले,
कोई गुंडागर्दी करे या दंगा करे,
उसको पकड़ के बंद करो मुकदमा करो,न्याय की किताब में हर चीज की सजा है,
लेकिन हाँथ उठाने का अधिकार किसने दिया? किस कानून की किताब में है?
भाजपा राज में पुलिस अन्याय का रिकॉर्ड तोड़ रही है। मेरठ में दलित समाज की बेटी ललिता गौतम के लिए न्याय की आवाज़ उठाने पर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार सहित अन्य लोगों पर किया प्रहार और लाठी चार्ज बेहद निंदनीय है।
जब प्रदेश-प्रमुख ही सरेआम एक मृतक की माँ के साथ असंवेदनशील होने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो उनकी पुलिस से कोई उम्मीद करना बेमानी है।
घोर निंदनीय!
मेरठ पुलिस और SSP अविनाश पांडेय से सीधा सवाल।
FIR में BNS की धारा 74, 109(1) (हत्या का प्रयास), 126(2), 132, 189, 190, 195, 196, 121, 221, 223, 226, 270 जैसी गंभीर धाराएँ लगा दी गईं।
सवाल यह है कि जब प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीक़े से हो रहा था और वीडियो में देखा जा सकता है अविनाश पांडेय तुम ख़ुद लोगों को संविधान में दिए क़ानूनी दायरों से बाहर जाकर लोगों पे हाथ उठा रहे थे, लेकिन अब तुम अपने पॉवर का ग़लत इस्तेमाल करके इतनी गंभीर धाराएँ निर्दोष लोगों पर तुम्हारे द्वारा लगाई गईं हैं |
यदि वास्तव में हत्या के प्रयास, दंगा, पुलिस पर हमला और अन्य गंभीर अपराध हुए हैं, तो उनके सभी सबूत—वीडियो, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य—सार्वजनिक किए जाएँ, या सिर्फ़ हवा हवाई में अपने पद का दुरुपयोग करोगे ?
कानून का काम न्याय करना है, डर पैदा करना नहीं।ये धाराएँ लगाई गई हैं, तो प्रमाण सामने रखिए। और अगर बिना पर्याप्त आधार के लगाई गई हैं, तो यह गंभीर सवाल खड़े करता है कि पुलिस कानून के अनुसार काम कर रही है या अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है।
अगर ऐसा कोई कृत प्रोटेस्ट कर रहे लोगों ने किया था तो उसका साक्ष्य सार्वजनिक करो !
@Uppolice कृपया मेरठ की पुलिस से कहिये कि अपने पॉवर का दुरुपयोग ना करें |
राजस्थान के करौली जिले में एक दलित युवक के साथ हुई बर्बरतापूर्ण मारपीट की घटना शर्मनाक और निंदनीय है।
दिनभर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालने वाला एक गरीब युवक जब घर लौट रहा था, तब उसके साथ की गई बर्बरता ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। आखिर गरीब, दलित और कमजोर व्यक्ति कब तक इस तरह की हिंसा और अत्याचार का शिकार होते रहेंगे?
जहां जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां वहां दलितों और आदिवासियों पर आए दिन ऐसे अत्याचारों की विडियोज़ सामने आती रहती हैं। प्रशासन या तो अपराधियों को पकड़ने की जगह पीड़ित को ही परेशान करने में लग जाता है या फिर चुप्पी साध लेता है।
ये बहुत शर्मनाक है, प्रशासन और सरकार इसका तुरंत संज्ञान ले और अपराधियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाए।
मै कक्षा 12 की छात्रा हु UP ki ,कोई व्यक्ति मेरे पास call और massage कर के मुझे बहुत परेशान कर रहा है मना करने के बाद भी बार२ कर रहा है उसका mobil no-9302616713 है, राहुल नाम बता रहा है, पुलिस से निवेदन है समझ दे मेरे पास कॉल न करे
@Uppolice@CMHelpline1076@w
वर्तमान सरकार में आदिवासी बच्चों के स्वास्थ्य के साथ भारी खिलवाड़ किया जा रहा है।
पशु आहार जैसी खाद्य सामग्री TAD के छात्रावासों में वितरण करने की कोई मामूली लापरवाही नही बल्कि यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े TAD विभाग की हकीकत है। इस खबर के बाद TAD मंत्री जी की मानसिकता से हम भलीभांति परिचित हैं। वो अब त्वरित कार्रवाही करते हुए शिकायत करने वाले वार्डनों पर कार्रवाई कर अन्य को एक संदेश दे देंगे कि वार्डन रहना है तो मुँह बंद रखो और जो मिले वही बच्चों को खिलाओ।
बाकी आम जनता को गुमराह करने के लिए BAP पार्टी पर धर्म-विरोधी व देश-विरोधी का आरोप लगाकर आम जनता को असली मुद्दों से भटका देंगे और अंधभक्तों को खुश कर देंगे।
#बाबूलाल_खराड़ी_शर्म_करो @zeerajasthan_@News18Rajasthan@1stIndiaNews@rpbreakingnews
भारत आदिवासी पार्टी के बांसवाड़ा–डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र के लोकप्रिय, सरल स्वभाव एवं जनप्रिय सांसद आदरणीय भाई श्री राजकुमार जी रोत को कुदरती अवतरण दिवस की अनंत जोहार शुभकामनाएँ एवं बधाई। @roat_mla