ये बात सत्य है कि, पहाड़ का कोई भी जनप्रतिनिधि ऐसा नहीँ जो पहाड़ के घटिया स्वस्थ्य व्यवस्थाओं और हालातों को सुधारने की सुध ले सकें, असुविधाओं के चलते कोई महीना ऐसा नहीँ जाता, जिसमें पहाड़ की बहन/बेटियों को अपनी जान ना गवानी पड़े।
@drdhansinghuk जी जिस स्पीड सें आपने विदेश दौरे किये है, क्या सीखा और क्या बदला उसका धरातल मे कब तक दिखेगा, पहाड़ियों की जान इतनी सस्ती नहीँ माननीय की उनको सिर्फ रेफेर सेंटर की चक्कर काट अपना दम तोड़ना पड़े।
मा. स्वास्थ्य मंत्री @JPNadda जी, उत्तराखंड के स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम बने तमाम रेफर सेंटर आखिर कब तक सुधरेंगे, आपसे आग्रह है कृपा कर इनके सुधार और सुविधाओं का रोड़मैप तय हो।
@AmitShah@PMOIndia@narendramodi
#NonStopAchievement
#Health #Uttarakhand
पहले रेफेर-रेफेर, अब प्रसव कराने से पहले भले हॉस्पिटल मे सुविधा हो या ना हो, डॉक्टर को अनुभव हो या ना हो, लेकिन परिजनों से पहले ही शपथ पत्र ले लिया जा रहा हैं।
@drdhansinghuk जी अब ये किस तरह का नियम-क़ानून।
किसी बीमार को रेफर-रेफर खेल खेलने के बाद, जो उसकी अंतिम उम्मीद का बेहतर व्यवस्थाओं का जो अंतिम पड़ाव था, अब उस अस्पताल पर भी निर्भर ना होना।
#Uttarakhand#Healthissue#Medical_equipment
नहीं! अब माताओं और बहनों को आगे मत करो अगर अपने समाज का उज्ज्वल भविष्य चाहते हो तो.. क्योंकि माता-बहन आगे रहती हैं तो बाहर के आदमियों ने निष्कर्ष निकाल रखा है कि पहाड़ी पुरुष बेकार है.. इसीलिए अब पिता-भाई-पुत्र आगे रहें ताकि यहां की महिलाओं पर कोई हाथ ना डाल पाए!
When Uttarakhand speaks, women lead. From Chipko to the state movement, Matra Shakti has always been at the front.
Today in Dehradun, the same truth stands on the streets.
She is a BJP mandal president herself, yet she is protesting.
Listen carefully.
This is not opposition politics.
This is conscience speaking.
@narendramodi@PMOIndia
#JusticeForAnkitaBhandari
सभी जान चुके हैं, किसकी क्या भूमिका रही #AnkitaBhandari केस मे, माता-पिता की जरूरतों पर वो सब गायब, जिन्होंने माता-पिता को आश्वासन दिया था की न्याय जरूर मिलेगा।
अब आज वो दिन हैं, जब उस बेटी के साथ हुई घटना पर न्याय का फैसला सुनाया जायेगा।
उम्मीद हैं फैसला फ़ासी हो।
#Update#news
मोदी जी, देख लीजिए हम पहाड़ियों का हाल। अगर आपकी नज़र पड़े तो शायद एक पल आपको भी यह देखकर डर-सा महसूस हो। पूछना बस यह है कि वह दशक कहाँ विलुप्त हो गया, जो हम पहाड़ियों के हिस्से था। मंच से ताल ठोककर पूरे देश को कहा गया था कि, + @narendramodi
Another frightening incident from Uttarakhand
Yesterday morning, a woman from Pab village in Pokhari area went to the forest to collect grass and did not return home till evening. During the family’s search, her scarf and belongings were found along with blood stains, raising fears of a wild animal attack.
Today morning she has been found injured in the forest, and local villagers, the Forest Department and SDRF teams are reaching the spot.
This comes right after the previous incident where another woman’s face was torn apart in a bear attack.
How many more warnings do we need before someone accepts that this is no longer normal?
Women in the hills are facing danger every single day simply for doing basic daily work.
@narendramodi@PMOIndia@pushkardhami
कोई कैसे ये कह सकता है उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार का चौतरफा विकास हो रहा है?
@pushkardhami जी आप लोगों ने शर्म बेच खाई है।ये दशक का उत्तराखंड का ऐसे ही होगा जब रोज हमारे लोग ऐसे मरते रहेंगे?और आप क्या करोगे,एक और कमेटी बना दोगे।आदमी के जान की कीमत कुछ नहीं है #उत्तराखंड में।
ये बाघ का हमला कोई नई घटना नहीं है। लगभग 1.5 साल पहले इसी तरह के हमले में बाघ ने माता जी को घायल किया था। अब सवाल यह उठता है कि प्रशासन क्या कर रहा है। जिस समस्या से पहाड़ी जूझ रहे हैं, उसका समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा है?
भला कौन रोक रहा हैं, ये जाना का अधिकार तो रखते हैं।
एक और गुलदार का हमला
द्वाराहाट क्षेत्र के ग्राम पंचायत असगोली निवासी श्री रमेश सिंह अधिकारी, पुत्र स्वर्गीय खड़क सिंह अधिकारी, पर आज गुलदार ने हमला कर दिया। उन्हें एम्बुलेंस के जरिए तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोचर में भर्ती कराया गया है।
पहाड़ के लगभग हर क्षेत्र की तरह चौखुटिया ब्लॉक के कई गांव भी लगातार आतंक में जी रहे हैं। कहीं गुलदार, कहीं भालू और अब जंगली सूअर, हमले रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। हालात हर दिन और भयावह होते जा रहे हैं।
एक और हमला, एक और परिवार सदमे में.
ये हमले अब थमते नहीं दिख रहे। सुरक्षित रहें, सावधान रहें।
@narendramodi@PMOIndia
वो कौन था वो मैं भी नहीं जनता।
लेकिन भट्ट जी आपसे ये जानना था की आप इनको जानते थे क्या?
इनके इंसाफ के लिये आपने आवाज उठाई क्या?
आपको बता दु की ये भाई आपके ही फिल्ड से थे।
मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा की स्वास्थ्य व्यवस्था इसी टूटी-फूटी व्हीलचेयर की तरह लाचार दिखती है।
यह फोटो स्थानीय निवासी वैभव पांडेय जी ने अपनी फेसबुक पर साझा की है। आप खुद देखिए और अंदाज़ा लगाइए कि हालात कितने दयनीय हैं।
जिस तरह रोडवेज़ की बस अपने शुरुआती स्टॉप से निकलकर बीच रास्ते में किसी ढाबे पर थोड़ी देर रुकती है और फिर आगे बढ़कर आखिर में अपने गंतव्य स्टॉप तक पहुँचती है, ठीक उसी तरह अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज भी मरीजों के लिए बस एक अस्थायी ठहराव बनकर रह गया है।
थोड़ी देर रुकना, थोड़ी औपचारिकता और अंत में लगभग हर मरीज को हल्द्वानी रेफ़र होकर ही अपने असली इलाज के गंतव्य तक पहुँचना पड़ता है।
यह हालात बदलने की ज़रूरत है, न कि लोगों को इसी हाल में छोड़ देने की।
@DmAlmora@drdhansinghuk