टीचरों को दो कौड़ी के बताने वाली अंजना ओम कश्यप की स्टूडियो के बाहर घिग्घी बंध गयी, स्टूडियो से दहाड़े मारने वाली पत्रकार यहां शांत है।
लोग सवाल पूछ रहे हैं आपका इतना विरोध हो रहा है कुछ बोलना है, लेकिन यहां इन्हें कुछ नहीं बोलना है चार दिवारी के अंदर स्टूडियो में बैठ कर बोलेंगी।
“अगर मेरा आँख नहीं खुलता और मेरी बेटी को उठा ले जाता तो हम घर किस मुँह से जाते!”
ये शब्द एक पिता के हैं।होटल के कमरे से उनके सामने उनकी बेटी को अगवा करने की कोशिश हुई वो भी पटना में!
जातिय द्वेष फैलाने वाले CM बतायेंगे,अपराधी का मन कैसे इतना बढ़ा हुआ है?
कृपया प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करते हुए शीघ्र निस्तारण कराने का कष्ट करें।
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