रविशंकर भारती चाहते तो अपनी बेटी को दुर्गा वाहिनी या संस्कार भारती जैसी महान संस्था में भेज सकते थे।
VHP के मुस्लिम विरोधी अभियान,चर्च जलाने जैसे कार्यों में लगा सकते थे।
पर उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ने के लिए बॉस्टन यूनिवर्सिटी भेज कर जो त्याग किया है, उसके लिये रविशंकर को युगों -युगों तक याद रखा जायेगा ।
"टिकट दिखाइए, नेतागिरी नहीं"
बिना टिकट सफर और फिर सत्ता का रौब?
AC कोच में सफर कर रहे एक भाजपा नेता और उनके साथी से जब TTE ने टिकट मांगा, तो बहस शुरू हो गई।
नेता ने राजनीतिक रसूख का हवाला देते हुए सांसद-विधायकों से संबंध और 22 साल से BJP में होने की बात कही, साथ ही TTE पर फर्जी आरोप भी लगाए।
BJP leader caught travelling without a ticket.
When the TTE asked for his ticket, the leader lost his temper instead of showing one.
The TTE reportedly told him, “Show your ticket, not your leader antics.”
The BJP leader then allegedly claimed the TTE was abusing PM Modi and threatened to get him suspended.
He also boasted, “I’ve been in the BJP for 22 years. I know MPs and MLAs. Ask anyone in Buxar who I am.”
क्या @DelhiPolice ने हर थाने को युवाओं को गिरफ्तार करने का कुछ टारगेट दिया है?
निज़ामुद्दीन स्टेशन के पास ऑटो में जा रही नाबालिग बच्चियों का ऑटो रोक कर उन्हें उतारा, ग़ैर कानूनी तरीक़े से उनका मोबाइल चैक किया और फिर उन्हें ज़बरदस्ती थाने ले जा रहे हैं। ये कौन सा क़ानून है?
This is shocking!
Five Muslim Students returning to Jamia area from Jantar Mantar were detained by the police near @jmiu_official and taken to the police station. Social activist Zeba Khan @zeba_kh_an and the reporter Afzal Alam @afzalalamjmi chased the police vehicle and freed all the Students.
Hello @DelhiPolice, Why were they detained, is it a crime to participate in Jantar Mantar protest?
Why are young Students from the Jamia area being treated like criminals just for participating in the protest?
कल @DelhiPolice की मौजूदगी में इस आदमी ने बच्चों को दौड़ा दौड़ाकर मारा, दिल्ली पुलिस भी इसका खुलकर साथ दे रही थी।
ये कौन है? क्या करता है? दिल्ली पुलिस ने इसको स्पेशल अधिकार क्यों दे रखे थे?
प्रिय दिल्ली पुलिस कुछ पता चला इनका। वर्ना लोग प्रदर्शनों में इनकी तरह कपड़े में जाने लगेंगे और लाठी लेकर भी। आपको लगेगा कि पुलिस ही पुलिस आई है। जनता तो आई नहीं। सोशल मीडिया में इस तरह के पोस्टर चल रहे हैं।
BJP MP Ravi Kishan : Whoever leaked NEET Newspaper must be punished
This is the IQ level of BJP MPs who doesn't even know, NEET is a Examination and not a Newspaper
These people are in power and ruling our country 😭😭
राहुल का धरना ही दोपहर 3:30 बजे शुरू हुआ, परीक्षा 11 से 2 बजे के बीच थी, और आपका बेटा आधे घंटे फिर भी लेट हो गया।
अगर 11 बजे की परीक्षा में आपका बेटा लेट पहुंचा तो यह ट्वीट कर कहीं आप इनडायरेक्टली दिल्ली पुलिस की ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल तो नहीं खड़े कर रहे?
फिर से भस्मासुर?
यह दोनों के चेहरे नक़ाब में देश की जनता के सामने रख रहा हु यह एक तो है यस कांवत और दूसरा है हनी डागर यह दोनों ही दिल्ली पुलिस के हवलदार है तो अब दिल्ली पुलिस @DelhiPolice कब इनके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर रहे हो
इनकी सच्चाई सुनकर आप हैरान हो जाओगे यह पढ़ लिख कर नॉकरी नहीं लगे यह इनके पिता जी की मौत के बाद उनकी जगह नॉकरी लगे हैं देश की जनता को पता होना चाहिए यह ।
यह पिता की मौत के बाद दोनों नॉकरी लगे हैं लेक़िन कल यह ड्यूटी बिना युवाओं को पीटने आए हुए थे अब दिल्ली पुलिस इनके खिलाफ कार्यवाही करती है या नही देश इंतजार में रहेगा
He is Nishikant Dubey, BJP Leader
He is Famous for Spreading Lies
Today He Claimed that His Son got late from Bar Council Exam because of Rahul Gandhi's Protest
Rahul Gandhi Staged His Protest after 4 Pm
And his Son's Exam timing was 11 am to 2 Pm.
Remember, He Never Spoke for NEET students Deaths
He never Spoke for 2 minutes late Entry in NEET exams
He never Spoke on Lathicharge on Students on Jantar Mantar
Even Lie Detector Can not Catch his Lies. Two Words for him please??
Viral allegation by @PMFNEWS that goons were deployed along with the @DelhiPolice - they assaulted students & protesters (in this case for just asking a question)
I'm sure that Delhi Police spokesperson will have an explanation (like this man is their Hamza or something) However - are plainclothes cops allowed to sport gold earrings? Cool perk!
(see the brutality of this goon / policeman below 👇🏼)
आज जंतर-मंतर से सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से लगभग 80 छात्रों को दिल्ली पुलिस छत्रसाल स्टेडियम लेकर गई। उन्हें वहाँ रात लगभग 9 से 9:30 बजे तक रखा गया और उसके बाद अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाकर विभिन्न पुलिस स्टेशनों में ले जाया गया।
रात लगभग 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हमें कुछ छात्रों के परिवारजनों का फोन आया। उन्होंने बताया कि लगभग 6–7 छात्रों को मुखर्जी नगर थाने लाया गया है। परिवार वालों का आरोप था कि उन्हें अपने बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा, कई छात्रों के फोन तोड़ दिए गए हैं और पुलिस अधिकारी यह तक बताने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें केवल हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है, अथवा उनके विरुद्ध कोई FIR दर्ज की गई है। यहाँ तक कि वकीलों को भी उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।
रात लगभग 2 बजे हम मुखर्जी नगर थाने पहुँचे। वहाँ जो हुआ, उसे देखकर यकीन करना मुश्किल था कि जिस पुलिस को हम कानून का रक्षक मानते हैं, वह कभी-कभी नागरिकों के अधिकारों के प्रति इतना असंवेदनशील व्यवहार भी कर सकती है।
हमने पहले बिना कैमरा चालू किए लगभग 15 मिनट तक अधिकारियों से बातचीत करने और जानकारी लेने की कोशिश की। लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई उत्तर देने से इनकार कर दिया। मजबूर होकर हमें कैमरा चालू करना पड़ा।
हमने देखा कि छात्रों को अलग-अलग पुलिस वाहनों में बैठाया जा रहा था और उन्हें किसी अन्य स्थान पर ले जाने की तैयारी हो रही थी। जब पूछा गया कि उन्हें कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है, तो कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। कई पुलिस अधिकारी कैमरे से अपना चेहरा छिपाते दिखाई दिए। हमने थाना प्रभारी से मिलने की भी कोशिश की, लेकिन उन्होंने भी मिलने से मना कर दिया।
इसी पुलिस स्टेशन में महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई है और डी.के. बसु (D.K. Basu) दिशानिर्देशों का उल्लेख भी किया गया है। कानून स्पष्ट है—किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने पर उसके परिवार को सूचित किया जाना चाहिए और उसे अपनी पसंद के वकील से मिलने तथा कानूनी सलाह लेने का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुलिस का कहना था कि छात्रों को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा है। लेकिन यदि उन्हें कई घंटे पहले ही हिरासत में लिया गया था, तो रात 2 बजे अचानक मेडिकल कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का भी किसी के पास कोई उत्तर नहीं था।
यह वीडियो लगभग 17 मिनट का है, लेकिन यदि आप इसे पूरा देखेंगे तो समझ पाएँगे कि किस प्रकार जवाबदेही की जगह केवल “ऊपर से आदेश है” कहकर संवैधानिक और कानूनी दायित्वों से बचने की कोशिश की जाती है।
कई छात्रों ने आशंका व्यक्त की है कि जंतर-मंतर से हिरासत में लिए गए छात्रों के विरुद्ध झूठे या अनुचित FIR दर्ज किए जा रहे हैं। परिवारजनों ने हमें यह भी बताया कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से जानकारी माँगी तो उन्हें कहा गया कि “घर चले जाइए, नहीं तो आपके ऊपर भी FIR दर्ज कर दी जाएगी।”
यदि कोई सामान्य नागरिक अपने हिरासत में लिए गए बेटे, बेटी, भाई या बहन से मिलने की भी कोशिश न कर सके और पुलिस का रवैया ऐसा हो, तो सोचिए उन परिवारों पर क्या बीतती होगी।
यदि इस देश के युवा शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की माँग कर रहे हैं, तो क्या उनके साथ लाठीचार्ज करना और आधी रात को इस प्रकार का व्यवहार करना उचित है? क्या पुलिस की भी कोई जवाबदेही नहीं है?
हर अधिकारी का केवल एक ही उत्तर था - “ऊपर से आदेश है।” लेकिन यह “ऊपर” कौन है? आदेश किसने दिए? और क्या कोई भी आदेश संविधान और कानून से ऊपर हो सकता है?
यह वीडियो लंबा है, लेकिन यदि संभव हो तो इसे पूरा अवश्य देखिए। विशेष रूप से मेरे सभी अधिवक्ता साथियों और कानूनी समुदाय से मेरा आग्रह है कि इस पर अपनी आवाज़ उठाएँ। कानून-व्यवस्था की पहली सीढ़ी एक पुलिस थाना होता है। यदि राजधानी दिल्ली में, हर विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुलिस मानवाधिकारों और कानूनी दिशानिर्देशों की अनदेखी करती रहे, तो यह केवल प्रदर्शनकारियों का नहीं बल्कि पूरे विधि-तंत्र का प्रश्न बन जाता है।
यदि देश की राजधानी में यह स्थिति है, तो देश के दूर-दराज़ इलाकों में नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है।
सवाल बड़े हैं। लड़ाई लंबी है। लेकिन जहाँ भी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता होगी, हम अपने साथियों के साथ खड़े रहेंगे।
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