सुनो
जब हो मन व्याकुल
और लगे कुछ खालीपन सा
श्वास थकी
और मन विचलित सा
तुम मेरे पास चले आना
जब क्रोध
तर्क से तेज़ दौड़ने लगे
और कांपने, हाथ लगे
तुम मेरे पास चले आना
यू तो मैं
कोई निष्कर्ष नहीं
न शब्दों से
ठंडी छांव
बस एक ठहराव बन जाऊँ
शायद
तुम मेरे पास चले आना
समर्पण में प्रेम की गहराई शब्दों से नहीं, मौन से मापी जाती है.....
यह जानने से नहीं कि सामने वाला क्या देगा, बल्कि इस विश्वास से कि जो भी देगा, वह सच्चा होगा...!!
#Love#Life
स्त्री प्रेम नहीं करती,
वो पूजा करती है,
उस पुरूष की,
जो उसे सम्मान देता है,
स्त्री सौंप देती है
अपना सब कुछ ,
उस पुरूष को,
जिसके स्पर्श,
और भाव से वो
संतुष्ट होती है !
स्त्री छूना चाहती है प्रेम में,
उस पुरूष को,
जिसके कांधे पर सिर रख,
ख़ुद को सुरक्षित
महसूस करती है !!