नरेंद्र मोदी ने अपने 'मित्रों' को 'लूट की खुली छूट' दे रखी है।
अब देखिए ना- मोदी के चहेते और BJP के पूर्व सांसद सुभाष चंद्रा पर 22,006 करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज था...
जिसे सिर्फ 6.5 करोड़ रुपए लेकर रफा-दफा कर दिया गया।
यानी- अगर आप मोदी के दोस्त हैं तो 22,006 करोड़ रुपए का कर्ज, सिर्फ 6 करोड़ रुपए देकर फ्री हो सकते हैं।
ऐसे में अब किसान और आम नागरिक नरेंद्र मोदी से पूछ रहे हैं- क्या उन्हें भी इस स्कीम का फायदा मिलेगा?
NCLT - “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल”
किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। Salaried एक EMI न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता।
मगर, चुनिंदा "मित्रों" के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है - कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।
मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं - एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए।
@yadavakhilesh ठीक है भैया, वो भी सरकारी धन बांटेगे और आप भी, क्या फर्क है दोनों में। या तो अपने-अपने पास से बांटिये या कानूनी रूप से सामाजिक सुरक्षा की कोई स्थाई योजना लाइये। और इससे पहले तो शिक्षा, स्वास्थ्य दीजिए,सबसे आवश्यक भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था दीजिए....
मैं पहले दिन से कह रहा था कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जाकर बातचीत करनी चाहिए छात्रों से।
लेकिन अंततः उन्होंने भी लाठी का रास्ता चुना। यह पूरी तरह से ग़लत है, अक्षम्य है।
आपसे लोकतांत्रिक होने की उम्मीद थी
आपने तानाशाही दिखाई
BSNL is national infrastructure, not an experiment. Stop forced restructuring that threatens employees and service quality. Implement the 3rd PRC now.
@PMOIndia@DoT_India
@BSNLMgmt #NoToBSNLRestructuring
@ajitanjum ये क्या, धर्मस्थान/तीर्थस्थल जाने वाले श्रद्धालुओं से कानून व्यवस्था और हमारे बच्चों को खतरा ! मैं तो समझता था कि धर्म कर्म से तन-मन शांत, पवित्र और विवेकशील हो जाते हैं, यदि ऐसा नहीं होता तो फिर ये ढोंग या दिखावा से ज्यादा कुछ नहीं? धर्म तो धर्म है वहां अधर्म संभव नहीं ।
@nehafolksinger जी हां , फीस एक होनी चाहिए और पढ़ाई की जगह भी एक होनी चाहिए। गरीबों के बच्चे अमीरों के स्कूल में क्यों नहीं पढ़ सकते। सभी के लिए शिक्षा के समान अवसर हों......
@NigarNawab जब वोट देकर चुनने का मौका मिलता है तब candidate का न तो शिक्षा देखते हैं, न सोच,न आचरण, न नैतिकता,न प्रकृति; अगर धर्म, जाति,समाज, क्षेत्र देखकर या लालचबस चुनेंगे तो फिर शिकायत किसलिए। लोग ऐसा सिर्फ एक बार नहीं, बार-बार करते हैं। हमें अपने आप को बदलना होगा और पहला कदम है शिक्षा।
गृह मंत्री अमित शाह जी ,
बिना वर्दी वाले ये गुंडे कौन हैं ? हाथों में लाठियां हैं और चुन चुनकर प्रदर्शनकारियों को मार रहे हैं . क्या दिल्ली पुलिस ने युवाओं की पिटाई करने के लिए भाड़े के लोगों को बुलाया था ?
20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संसद चलो मार्च पर चप्पल पहनकर, बिना वर्दी के एक व्यक्ति प्रदर्शनकारियों पर डंडे भांज रहा था.
लल्लनटॉप के पत्रकार अभिलाष ने सवाल किया तो केवल सवाल पूछने की वजह से ही रिपोर्टर को लाठी मार दी गई.
इसके बाद पुलिस ने भी लाठी मारने वाले का बचाव किया और बदतमीज़ी करते हुए माइक जमीन पर फेंक दिया.
@DelhiPolice
CJP | Delhi Police | Reporter