As we’re starting up soybean harvest this year it’s got me thinking back on the past 12 months. A year ago my farming world completely changed when we were fortunate enough to break the world record for soybeans. I’ve been able to travel places and meet people that I never could have before. It’s opened doors and opportunities for me and has taught me a ton. I’ve been able to speak at different field days and ag shows all over the country and South America sharing what I’ve learned and have met some awesome farmers and other people in the ag industry along the way. The high input costs and low commodity prices this year have got the entire ag industry in a dark haze, especially in the southeast. Going forward this year I feel like we have a very good chance at breaking our own record if the last bit of weather would cooperate through harvest. But if we don’t, that’ll be just fine too. I know that I’ve done everything in my power that I can, as well as everyone that works with me day in day out has. We put together a plan, we implemented it, we carried it to the end as best as I know how. This has been one of the toughest growing seasons that I’ve been a part of in my farming career. In the end it’s all up to the good Lord and Mother Nature. Breaking records is cool and it’s sure fun seeing those massive numbers but at the end of the day the ROI on every acre across the farm is what keeps us going and I’m sure hoping there’s some drastic changes coming in the future or there’s gonna be a lot less farmers in a year or 2 than there are today. So to all my fellow farmers across this great country out there. Keep your heads up through these tough times, keep the combines rollin, and stay safe through harvest to make it home to all your families at the end of the day. 🫛 🌱
9 दिनों में तीसरी बार पेट्रोल और डीजल महंगा कर दिया गया।
मध्य प्रदेश में पेट्रोल ₹111.71 प्रति लीटर पहुंच चुका है,
लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जी सिर्फ विदेश में छुट्टियां मनाने में व्यस्त हैं!
मोदी जी,
अच्छे दिन नहीं ला सकते,
तो कम से कम बुरे दिन ही वापस कर दो!
17 लाख से ज्यादा छात्रों की मेहनत,
और सिस्टम की ऐसी लापरवाही?
कहीं सही जवाब पर नंबर काट दिए गए,
कहीं धुंधली कॉपी जांच दी गई,
और अब लाखों छात्र री एवल्यूएशन के लिए भटक रहे हैं।
यह सिर्फ “टेक्निकल गलती” नहीं,
यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
7 साल पहले मध्यप्रदेश को “ODF+” घोषित कर भाजपा सरकार ने वाहवाही लूट ली थी।
अब जनगणना के आंकड़े बता रहे हैं कि प्रदेश के आधे घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं।
यानी ज़मीन पर काम कम,
कागज़ों में प्रचार ज़्यादा हुआ।
अगर अधिकारी खुद दोबारा सर्वे कराने को मजबूर हैं, तो साफ है कि सरकार ने विकास नहीं, सिर्फ़ आंकड़ों की राजनीति की है।
UGC का काम तमाम...
विपक्ष के सारे षड्यंत्र धरे के धरे रह गए..!!
मैंने तो पहले ही कहा था,
जैसे ही मोदीजी यूरोपियन FTA निपटा कर फ्री होंगे सारे एजेंडाधारियों के एजेंडा धराशायी हो जाएंगे।
दरअसल,
मोदी सरकार UGC, AICTE और NCTE को खत्म करके इन तीनों को मिलाकर एक ही नई बॉडी बनाने की तैयारी में है,
जिसका नाम होगा - HECI
(Higher Education Commission of India)
दिसंबर 2025 में संसद में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) विधेयक पेश किया गया था। इस बिल में साफ कहा गया है कि UGC, AICTE और NCTE को मिलाकर एक सिंगल हाईयर एजुकेशन बॉडी बनाई जाएगी।
इसका मतलब यह है कि UGC अब एक अलग और स्वतंत्र संस्था नहीं रहेगी, और उसके पुराने नियम अपने आप खत्म हो जाएंगे।
फिलहाल यह बिल एक जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास है। उम्मीद है कि बजट सत्र खत्म होने से पहले इस पर रिपोर्ट आ जाएगी। इस सेलेक्ट कमेटी में करीब 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।
प्रस्तावित HECI में लगभग 10 सदस्य होंगे, जिनमें सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और शीर्ष पदों पर बैठे लोग शामिल रहेंगे। जब HECI लागू हो जाएगी, तो UGC के सारे पुराने गाइडलाइंस अपने आप बेअसर हो जाएंगे।
सरकार का मानना है कि कुछ विदेशी एजेंडा चलाने वाले लोग और विपक्षी नेता शिक्षा व्यवस्था के जरिए राजनीति करना चाहते थे।
लेकिन मोदी सरकार को यह अंदाजा पहले ही हो गया था। इसी वजह से दिसंबर में ही यह बिल लाकर UGC की मनमानी पर रोक लगाने की तैयारी कर ली गई।
सरकार का कहना है कि देश की शिक्षा नीति को एक साफ, मजबूत और एकजुट सिस्टम में लाना जरूरी है, ताकि आगे किसी तरह की गड़बड़ी या भ्रम न रहे।
इसलिए अभी घबराने की जरूरत नहीं है।
सब कुछ प्रक्रिया में है।
थोड़ा धैर्य रखें—
आने वाले समय में तस्वीर और साफ हो जाएगी।
मध्यप्रदेश में दलित और बाबा साहब अंबेडकर का अनुयायी होना अब अपराध हो गया है!
@DrMohanYadav51 जी,
रोंगटे खड़े कर देने वाला यह वीडियो एक दलित के दुख और आपकी पुलिस के बर्बर अत्याचार का सबूत है! क्या @BJP4MP राज में दलित और आदिवासी पर पेशाब कर प्रताड़ित करना आम हो गया है?
तत्काल जांच करवाएं!
सख्त और निर्णायक कार्रवाई करें!
नहीं तो मैं पीड़ित को न्याय दिलवाने के लिए उसके साथ धरने पर बैठूंगा!
राहुल गांधी जी लगातार तीन बार हारने के बाद कुंठित हो गए हैं और देश की छवि खराब करके अमेरिका में अपनी कुंठा निकाल रहें हैं।
देश के बाहर जाकर देश की छवि खराब करना देशद्रोह जैसा अपराध है। कोई देश भक्त ऐसा नहीं कर सकता।
दो दिन की बहारे हैं जग में, कब जोर किसी का चलता है।
जुल्म का सूरज लाख चढ़े, हर शाम को लेकिन ढलता है।
हेमंत सोरेन सरकार के जुल्म के सूरज के ढलने का वक्त आ गया है।
नेटफ्लिक्स पर ‘कल्कि’ पूरा देख कर समय बर्बाद न करें। बहुत ही बेकार फिल्म है। प्रभास से एक्टिंग एक असंभव बात लगती है। अमिताभ के पात्र के अलावा, यह फिल्म कम से कम सात हॉलीवुड फिल्मों से कॉन्सेप्ट, सेट डिजाइन, पात्र, सब-प्लॉट, एक्शन सीन्स आदि चुरा कर बनाई गई एक खिचड़ी मात्र है।
इसकी सफलता यह बताती है कि भारतीय फिल्म जगत में यदि आप औसत फिल्म भी बना दें, और कहानी (यदि पौराणिक आदि हो) पर डटे रहें, तो भी जनता आपको स्वीकारती है।
लोगों को अंत के दृश्य अच्छे लगे पर मुझे थर्मोकोल के भाले और नीले-उजले पेंट वाले यान देख कर ऐसा चीप फील आया कि आइफोन के डब्बे में किसी ने जियोनी का आठ स्पीकर और चार सिम वाला फोन बेच दिया हो।
बहुत ही वाहियात फिल्म है। ‘बाहुबली’ के बाद से प्रभास आज तक किसी भी फिल्म में पाँच मिनट भी एक्टिंग करता नहीं दिखता।