"रिश्ता सिर्फ कागज़ों से नहीं, विश्वास और सम्मान से चलता है। जब साथ रहने की भावना खत्म हो जाए, तो मजबूरी में निभाया गया रिश्ता किसी के लिए भी सुखद नहीं होता।"
#सुप्रीमकोर्ट#न्याय#वैवाहिकजीवन#संबंध#सामाजिकविचार
"मोहन प्रॉपर्टी डीलर प्रा. लि."
कभी सरकारें जनता की सेवा के लिए जानी जाती थीं, लेकिन मध्य प्रदेश में तो मानो नया मॉडल लॉन्च हो गया है — "मुख्यमंत्री कम, प्रॉपर्टी डीलर ज़्यादा!"
अब तो ऐसा लगता है कि विकास का मतलब सड़क, शिक्षा और रोजगार नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं के आसपास ज़मीन की खरीद-फरोख्त रह गया है। दावा ऐसा कि मानो पूरा मध्य प्रदेश किसी रियल एस्टेट मेले में बदल गया हो और मुख्यमंत्री कार्यालय किसी प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी का हेड ऑफिस।
नकद पैसा, तुरंत कब्ज़ा, सरकारी प्रोजेक्ट के पास ज़मीन और खास लोगों के लिए विशेष छूट! जनता पूछ रही है कि आखिर ये सरकार चला रहे हैं या ज़मीनों का कारोबार? विकास की हर घोषणा के पीछे अगर कुछ लोगों की ज़मीनों के दाम बढ़ते दिखाई दें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
निसंदेह मध्य प्रदेश में अब नया नारा होना चाहिए—
"जहाँ-जहाँ सरकारी योजना जाएगी, वहाँ-वहाँ ज़मीन की कीमत मुस्कुराएगी!"
और अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में सरकारी विज्ञापन कुछ यूँ हो सकते हैं—
"रोज़गार की गारंटी नहीं, लेकिन प्लॉट की संभावना ज़रूर है!"
जनता को तय करना है कि प्रदेश विकास की राह पर है या कुछ चुनिंदा लोगों की ज़मीनों के भाव बढ़ाने की परियोजना पर। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है।
"मोहन प्रॉपर्टी डीलर प्रा. लि."
कभी सरकारें जनता की सेवा के लिए जानी जाती थीं, लेकिन मध्य प्रदेश में तो मानो नया मॉडल लॉन्च हो गया है — "मुख्यमंत्री कम, प्रॉपर्टी डीलर ज़्यादा!"
अब तो ऐसा लगता है कि विकास का मतलब सड़क, शिक्षा और रोजगार नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं के आसपास ज़मीन की खरीद-फरोख्त रह गया है। दावा ऐसा कि मानो पूरा मध्य प्रदेश किसी रियल एस्टेट मेले में बदल गया हो और मुख्यमंत्री कार्यालय किसी प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी का हेड ऑफिस।
नकद पैसा, तुरंत कब्ज़ा, सरकारी प्रोजेक्ट के पास ज़मीन और खास लोगों के लिए विशेष छूट! जनता पूछ रही है कि आखिर ये सरकार चला रहे हैं या ज़मीनों का कारोबार? विकास की हर घोषणा के पीछे अगर कुछ लोगों की ज़मीनों के दाम बढ़ते दिखाई दें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
निसंदेह मध्य प्रदेश में अब नया नारा होना चाहिए—
"जहाँ-जहाँ सरकारी योजना जाएगी, वहाँ-वहाँ ज़मीन की कीमत मुस्कुराएगी!"
और अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में सरकारी विज्ञापन कुछ यूँ हो सकते हैं—
"रोज़गार की गारंटी नहीं, लेकिन प्लॉट की संभावना ज़रूर है!"
जनता को तय करना है कि प्रदेश विकास की राह पर है या कुछ चुनिंदा लोगों की ज़मीनों के भाव बढ़ाने की परियोजना पर। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है।
"मोहन प्रॉपर्टी डीलर प्रा. लि."
कभी सरकारें जनता की सेवा के लिए जानी जाती थीं, लेकिन मध्य प्रदेश में तो मानो नया मॉडल लॉन्च हो गया है — "मुख्यमंत्री कम, प्रॉपर्टी डीलर ज़्यादा!"
अब तो ऐसा लगता है कि विकास का मतलब सड़क, शिक्षा और रोजगार नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं के आसपास ज़मीन की खरीद-फरोख्त रह गया है। दावा ऐसा कि मानो पूरा मध्य प्रदेश किसी रियल एस्टेट मेले में बदल गया हो और मुख्यमंत्री कार्यालय किसी प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी का हेड ऑफिस।
नकद पैसा, तुरंत कब्ज़ा, सरकारी प्रोजेक्ट के पास ज़मीन और खास लोगों के लिए विशेष छूट! जनता पूछ रही है कि आखिर ये सरकार चला रहे हैं या ज़मीनों का कारोबार? विकास की हर घोषणा के पीछे अगर कुछ लोगों की ज़मीनों के दाम बढ़ते दिखाई दें, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
निसंदेह मध्य प्रदेश में अब नया नारा होना चाहिए—
"जहाँ-जहाँ सरकारी योजना जाएगी, वहाँ-वहाँ ज़मीन की कीमत मुस्कुराएगी!"
और अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में सरकारी विज्ञापन कुछ यूँ हो सकते हैं—
"रोज़गार की गारंटी नहीं, लेकिन प्लॉट की संभावना ज़रूर है!"
जनता को तय करना है कि प्रदेश विकास की राह पर है या कुछ चुनिंदा लोगों की ज़मीनों के भाव बढ़ाने की परियोजना पर। क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है।
नाकाम सरकार की नाकामियां देखिए फिर से पेपर लीक होने की खबर है आखिर बच्चे क्या करें डॉक्टर बनने के लिए इस सरकार के रहते कोई भी व्यवस्था सुधारने वाली नहीं है
मोदी ही मुसीबत है बच्चों के लिए तो सभी अभिभावकों से विनम्र निवेदन है भविष्य सुरक्षित करने के लिए घरों से निकलना होगा इंकलाब जिंदाबाद
नाकाम सरकार की नाकामियां देखिए फिर से पेपर लीक होने की खबर है आखिर बच्चे क्या करें डॉक्टर बनने के लिए इस सरकार के रहते कोई भी व्यवस्था सुधारने वाली नहीं है
मोदी ही मुसीबत है बच्चों के लिए तो सभी अभिभावकों से विनम्र निवेदन है भविष्य सुरक्षित करने के लिए घरों से निकलना होगा इंकलाब जिंदाबाद
कितनी मौतें और चाहिए?
लखनऊ की शिवानी यादव और अहमादाबाद के कहान पटेल की मौत की खबर ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया है।
NEET परीक्षा विवाद और उससे जुड़ी परिस्थितियों के बीच अब तक जिन छात्रों की जान जाने की खबरें सामने आई हैं, उनकी संख्या 12 बताई जा रही है—
• ऋतिक मिश्रा
• अंशिका पांडे
• प्रदीप मेघवाल
• सिद्धार्थ हेगड़े
• आकांक्षा चतुर्वेदी
• भाग्यश्री
• रेणु मीणा
• रिया कुमारी थापा
• उमेश माली
• अनुकीर्तना
• शिवानी यादव
• कहान पटेल
हर नाम के पीछे एक सपना था, एक परिवार था, एक भविष्य था।
सवाल सिर्फ परीक्षा का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जो छात्रों पर लगातार बढ़ते दबाव, अनिश्चितता और जवाबदेही के संकट को नजरअंदाज करती दिख रही है।
क्या देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों ने इन बच्चों और उनके परिवारों के दर्द पर संवेदना व्यक्त की? क्या किसी ने यह भरोसा दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों?
जब लाखों युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हों, तब सरकार की पहली जिम्मेदारी जवाबदेही और संवेदनशीलता दिखाना है।
देश के बच्चों का भविष्य कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
याद रखिए, आंकड़े नहीं बढ़ रहे हैं — सपने टूट रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो...
कितनी मौतें और चाहिए?
लखनऊ की शिवानी यादव और अहमादाबाद के कहान पटेल की मौत की खबर ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया है।
NEET परीक्षा विवाद और उससे जुड़ी परिस्थितियों के बीच अब तक जिन छात्रों की जान जाने की खबरें सामने आई हैं, उनकी संख्या 12 बताई जा रही है—
• ऋतिक मिश्रा
• अंशिका पांडे
• प्रदीप मेघवाल
• सिद्धार्थ हेगड़े
• आकांक्षा चतुर्वेदी
• भाग्यश्री
• रेणु मीणा
• रिया कुमारी थापा
• उमेश माली
• अनुकीर्तना
• शिवानी यादव
• कहान पटेल
हर नाम के पीछे एक सपना था, एक परिवार था, एक भविष्य था।
सवाल सिर्फ परीक्षा का नहीं है, सवाल उस व्यवस्था का है जो छात्रों पर लगातार बढ़ते दबाव, अनिश्चितता और जवाबदेही के संकट को नजरअंदाज करती दिख रही है।
क्या देश के सर्वोच्च पदों पर बैठे लोगों ने इन बच्चों और उनके परिवारों के दर्द पर संवेदना व्यक्त की? क्या किसी ने यह भरोसा दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों?
जब लाखों युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हों, तब सरकार की पहली जिम्मेदारी जवाबदेही और संवेदनशीलता दिखाना है।
देश के बच्चों का भविष्य कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
याद रखिए, आंकड़े नहीं बढ़ रहे हैं — सपने टूट रहे हैं।
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो...
अखिलेश यादव को "टोंटी चोर" और लालू यादव को "चारा चोर" कहने वाले आज राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और चोरी के आरोपों पर खामोश क्यों हैं?
जब आरोप राजनीतिक विरोधियों पर लगते हैं, तब नैतिकता, ईमानदारी और जवाबदेही की लंबी-लंबी बातें होती हैं। लेकिन जब सवाल अपने लोगों पर उठते हैं, तो वही लोग मौन धारण कर लेते हैं।
यदि भ्रष्टाचार गलत है, तो वह हर जगह गलत है। अगर जांच की मांग विपक्ष के मामलों में जायज़ है, तो फिर किसी भी धार्मिक या राजनीतिक संस्था पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उतनी ही जायज़ होनी चाहिए।
सवाल व्यक्ति का नहीं, सिद्धांत का है। क्या ईमानदारी और जवाबदेही के पैमाने सबके लिए एक जैसे हैं, या फिर आरोपों का वजन आरोपी की पहचान देखकर तय किया जाएगा?
चुप्पी अक्सर सवालों से बड़ी दिखाई देती है।
अखिलेश यादव को "टोंटी चोर" और लालू यादव को "चारा चोर" कहने वाले आज राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और चोरी के आरोपों पर खामोश क्यों हैं?
जब आरोप राजनीतिक विरोधियों पर लगते हैं, तब नैतिकता, ईमानदारी और जवाबदेही की लंबी-लंबी बातें होती हैं। लेकिन जब सवाल अपने लोगों पर उठते हैं, तो वही लोग मौन धारण कर लेते हैं।
यदि भ्रष्टाचार गलत है, तो वह हर जगह गलत है। अगर जांच की मांग विपक्ष के मामलों में जायज़ है, तो फिर किसी भी धार्मिक या राजनीतिक संस्था पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उतनी ही जायज़ होनी चाहिए।
सवाल व्यक्ति का नहीं, सिद्धांत का है। क्या ईमानदारी और जवाबदेही के पैमाने सबके लिए एक जैसे हैं, या फिर आरोपों का वजन आरोपी की पहचान देखकर तय किया जाएगा?
चुप्पी अक्सर सवालों से बड़ी दिखाई देती है।
Ati kar rakhi hai aap logo ne pahle dhai ghnte m kanpur se lucknow laa paaye fir ab 22453 jo aapne time khud diya tha 03.15 pm chalne ka us time pr bhi ni chalw paa rhe. Apko khud se ni lagta kitna glt krte ho public ke sath
@RailMinIndia@RailwaySeva@AshwiniVaishnaw